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Siddharthnagar News: बाहर नहीं अंदर वाले कर रहे मरीजों का शोषण..रहे सतर्क

Fri, 06 Sep 2024 03:00 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर Updated Fri, 06 Sep 2024 03:00 AM IST
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It is not outsiders who are exploiting the patients..be alert
कौन स्टाफ, कौन बाहरी पहचान करने में उलझ जा रहे मरीज
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अगर बाहर की दवा लाने के लिए बनाएं दबाव तो तत्काल सीएमएस से करें शिकायत

मेडिकल कॉलेज में बाहरी से अधिक अंदर वाले मरीजों को दवा के लिए भेजते हैं बाहर

सीएमएस ने शिकायत पर तीन स्वास्थ्यकर्मियों को एक दिन पहले पकड़ा, दी चेतावनी
संवाद न्यूज एजेंसी

सिद्धार्थनगर। बेहतर और निशुल्क इलाज के दावे का माधव प्रसाद त्रिपाठी मेडिकल कॉलेज में स्वास्थ्यकर्मी ही हवा निकाल रहे। मेडिकल कॉलेज में दलालों के पैर फैलाने की तो दूर की बात, अब अस्पताल में इलाज करने वाले स्वास्थ्य कर्मियों से सावधान रहना होगा। क्योंकि वह खुद कमीशन के चक्कर में अस्पताल में दवा होने के बाद भी बाहर भेज रहे हैं।
दलालों की हावी होने की बात कही जाती थी। लेकिन सिस्टम में बैठे लोग मरीजों का आर्थिक शोषण कर रहे हैं, जो शुक्रवार को पुख्ता हो गया। एक नहीं तीन मरीजों को बाहर दवा लेने भेजे जाने की शिकायत सामने आई। इस पर सीएमएस ने न सिर्फ फटकार लगाई बल्कि किसी मरीजों को स्टाफ की ओर से किसी प्रकार की लेनदेन या फिर परेशान करने की तत्काल शिकायत दर्ज कराने को कहा है।
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माधव प्रसाद त्रिपाठी मेडिकल कॉलेज में इमरजेंसी से लेकर ओपीडी तक कहीं न कहीं दलाल भटकते रहते हैं और मरीज को फंसाकर ले जाते हैं। पूर्व में दलालों के नेटवर्क और साठगांठ उजागर हो चुका है। शुक्रवार को ऐसा मामला सामने आया है, जिसमें अस्पताल के ही स्वास्थ्यकर्मी पर बाहर की दवा लिखने का आरोप लगा। सीएमएस के यहां तीन मरीजों ने शिकायत की। सभी इमरजेंसी से जुड़ी शिकायत थी। सीएमएस ने ऐसे मामले में किसी भी वक्त शिकायत करने के लिए कहा है, लेकिन इसपर विराम लग पाएगा। यह बड़ा सवाल है।
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मरीज पहचान नहीं पाता है कि बाहरी है या स्वास्थ्यकर्मी

मेडिकल कॉलेज में आउट सोर्सिंग और स्थायी दोनों का ड्रेस कोड है। आई कार्ड भी बना हुआ है, जिसमें नाम और पद अंकित है। लेकिन इस आदेश का कोई पालन नहीं कर रहा है। बिना ड्रेस और आईडी कार्ड के ड्यूटी करने वालों की लंबी फौज इमरजेंसी में देखी जा सकती है। इसमें मरीज भी हर किसी को स्वास्थ्यकर्मी समझ बैठता है। क्योंकि मरीज क्या जाने कि कौन बाहरी है और कौन स्वास्थ्यकर्मी।

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कागज का टुकड़ा ऐसा कि पकड़ नहीं पाएंगे

मेडिकल कॉलेज से बाहर की दवा लिखने में ऐसे कागज का टुकड़ा प्रयोग किया जा रहा है, जिसे पकड़ पाना और उस पर लिखा हुआ प्रमाणित कर पाना मुश्किल है। लिखने वाला जिसके पास भेजेगा केवल वही समझ पाए। टुकड़ा इतना छोटा करके लिखा जा रहा है कि उसे चुटकी में मसलकर फेंक दिया जाए।

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बाहर के चलते निलंबित हो गए स्वास्थ्यकर्मी

मेडिकल कॉलेज में रुपये के लेनदेन की शिकायत लगातार होती रही। अधिक दबाव और जांच में पुष्टि होने के बाद अस्पताल के स्टाफ पर कार्रवाई होती रही। कुछ माह पहले एक बाहरी आकर इंजेक्शन लगाने के एक वजह में 500 रुपये ले लिया। इसका वीडियो वायरल हुआ और ड्यूटी वाले स्थाई स्वास्थ्यकर्मी को निलंबित कर दिया गया। जबकि, यह सबको पता था कि इसमें उस स्वास्थ्यकर्मी का कोई दोष नहीं था। यह स्थिति मेडिकल कॉलेज की है।

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तत्काल करें शिकायत

अगर इलाज कराने के लिए आ रहे हैं और कोई बाहर की दवा लिखा रहा है। तो उसका नाम और पद जरूर पूछें, अगर बातने में आनाकानी करता है तो डॉक्टर या फिर सीएमएस से तत्काल शिकायत करें। जागरूकता से दलालों से बच सकेंगे।


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अगर कोई बाहर की दवा लिखता है तो तत्काल, उससे पूछे की क्यों लिख रहे हैं। अगर ड्रेस में नहीं है तो उसका पद और नाम क्या है। अगर नहीं बताता है तो सही से पहचान करके शिकायत दर्ज कराएं। सीएमएस कार्यालय में या नंबर पर शिकायत कर सकते हैं। इसके बाद संबंधित पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
-डॉ. एके झा, सीएमएस माधव प्रसाद त्रिपाठी मेडिकल कॉलेज
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