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Siddharthnagar News: गलती होना स्वाभाविक, समय रहते प्रायश्चित जरूरी
Tue, 17 Dec 2024 11:27 PM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
Updated Tue, 17 Dec 2024 11:27 PM IST
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डुमरियागंज नगर के खीरा मंडी चौराहे पर श्रीमद्भागवत कथा व्यास गद्दी पर बैठे कथा वाचक पंडित उत्तम
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संवाद न्यूज़ एजेंसी
शाहपुर। डुमरियागंज नगर के खीरा मंडी चौराहे पर आयोजित श्रीमद्भागवत कथा के दूसरे दिन सोमवार को अयोध्या धाम से आए कथावाचक पं. उत्तम कृष्ण शास्त्री ने कहा कि मनुष्य से गलती हो जाना बड़ी बात नहीं। लेकिन, समय रहते सुधार और प्रायश्चित जरूरी है। ऐसा नहीं हुआ तो गलती पाप की श्रेणी में आ जाती है।
कथा व्यास ने पांडवों पर श्रीकृष्ण की कृपा को बड़े ही सुंदर ढंग से दर्शाया। कहा कि परीक्षित कलियुग के प्रभाव के कारण ऋषि से शापित हो जाते हैं। उसी के पश्चाताप में वह शुकदेव जी के पास जाते हैं। भक्ति एक ऐसा उत्तम निवेश है, जो जीवन में परेशानियों का उत्तम समाधान देती है। साथ ही जीवन के बाद मोक्ष भी सुनिश्चित करती है।
कथा व्यास ने कहा कि द्वापर में धर्मराज युधिष्ठिर ने सूर्यदेव की उपासना कर अक्षयपात्र की प्राप्ति की। हमारे पूर्वजों ने सदैव पृथ्वी का पूजन व रक्षण किया। इसके बदले प्रकृति ने मानव की रक्षा की। भागवत सुनने वाले के अंदर जिज्ञासा और श्रद्धा होनी चाहिए। परमात्मा दिखाई नहीं देता है, वह हर किसी में बसता है। इस अवसर पर मुख्य यजमान शिव बालक गुप्ता, सुशीला, राधेश्याम गुप्ता, अंकित, तुलसी राम, इंद्रजीत गुप्ता, अमर जीत आदि उपस्थित रहे।
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शाहपुर। डुमरियागंज नगर के खीरा मंडी चौराहे पर आयोजित श्रीमद्भागवत कथा के दूसरे दिन सोमवार को अयोध्या धाम से आए कथावाचक पं. उत्तम कृष्ण शास्त्री ने कहा कि मनुष्य से गलती हो जाना बड़ी बात नहीं। लेकिन, समय रहते सुधार और प्रायश्चित जरूरी है। ऐसा नहीं हुआ तो गलती पाप की श्रेणी में आ जाती है।
कथा व्यास ने पांडवों पर श्रीकृष्ण की कृपा को बड़े ही सुंदर ढंग से दर्शाया। कहा कि परीक्षित कलियुग के प्रभाव के कारण ऋषि से शापित हो जाते हैं। उसी के पश्चाताप में वह शुकदेव जी के पास जाते हैं। भक्ति एक ऐसा उत्तम निवेश है, जो जीवन में परेशानियों का उत्तम समाधान देती है। साथ ही जीवन के बाद मोक्ष भी सुनिश्चित करती है।
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कथा व्यास ने कहा कि द्वापर में धर्मराज युधिष्ठिर ने सूर्यदेव की उपासना कर अक्षयपात्र की प्राप्ति की। हमारे पूर्वजों ने सदैव पृथ्वी का पूजन व रक्षण किया। इसके बदले प्रकृति ने मानव की रक्षा की। भागवत सुनने वाले के अंदर जिज्ञासा और श्रद्धा होनी चाहिए। परमात्मा दिखाई नहीं देता है, वह हर किसी में बसता है। इस अवसर पर मुख्य यजमान शिव बालक गुप्ता, सुशीला, राधेश्याम गुप्ता, अंकित, तुलसी राम, इंद्रजीत गुप्ता, अमर जीत आदि उपस्थित रहे।
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