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पूरे है संसाधन, इलाज में नहीं करें लापरवाही: ब्रजेश पाठक
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कलेक्ट्रेट सभागार में विकास कार्यों एवं कानून व्यवस्था की समीक्षा करते उपमुख्यमंत्री ब्रजेश प?
- फोटो : SIDDHARTHNAGAR
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पूरे हैं संसाधन, इलाज में न करें लापरवाही : ब्रजेश पाठक
सिद्धार्थनगर। आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग को निशुल्क इलाज की सुविधा मुहैया कराना प्रदेश सरकार की प्राथमिकता है। संसाधनों की कमी नहीं है, इसलिए इसमें लापरवाही न बरतें। ये बातें उप मुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने कलेक्ट्रेट सभागार में आयोजित समीक्षा बैठक में कहीं।
समीक्षा बैठक में जब सीएमओ ने बताया कि जनपद में 168 डाक्टरों के पद सृजित है। उसमें 131 कार्यरत है। इस पर उपमुख्यमंत्री ने नाराजगी जताई। कहा कि आप के पास संसाधन पूरे हैं। 68 डाक्टर एनएचएम के कार्य कर रहे हैं। उन्हें इस सूची से बाहर क्यों रखा गया है? एनएचएम के तहत जो डाक्टर तैनात हैं, उनसे भी मरीजों का उपचार कराया जाए। जिला चिकित्सालय की व्यवस्था के लिए भी प्रदेश सरकार कार्य कर रही है।
मेडिकल कालेज के प्राचार्य डॉ. एके झा को निर्देश दिया कि मेडिकल की पढ़ाई कर रहे छात्रों के रहने एवं खाने की व्यवस्था स्वयं जाकर देखें। सांसद जगदंबिका पाल के डायलिसिस की व्यवस्था बढ़ाने की मांग पर उपमुख्यमंत्री ने प्राचार्य मेडिकल कालेज को निर्देश दिया कि तत्काल डायलिसिस बढ़ाने का प्रस्ताव बनाकर भेजें। आवश्यक दवाएं उपलब्धता नहीं होने पर केवल गरीबों के लिए लोकल परचेज का उपयोग किया जाए। जनपद में सामान्य उपचार के लिए मरीजों को स्थानीय सीएचसी एवं पीएचसी में भर्ती किया जाए, जिससे अनावश्यक रूप से जिला चिकित्सालय पर मरीजों की भीड़ न बढ़े और जनपद के सभी स्वास्थ्य केंद्रों पर उपलब्ध संसाधनों का बेहतर उपयोग भी हो सकें।
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इस दौरान विधायक श्यामधनी राही, जयप्रताप सिंह, विनय वर्मा, डीएम संजीव रंजन, एसपी अमित कुमार आनंद, मुख्य विकास अधिकारी जयेंद्र कुमार, प्रभारी मेडिकल कालेज डॉ. एके झा एवं मुख्य चिकित्साधिकारी डॉ. विनोद कुमार अग्रवाल मौजूद रहे।
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सिद्धार्थनगर। आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग को निशुल्क इलाज की सुविधा मुहैया कराना प्रदेश सरकार की प्राथमिकता है। संसाधनों की कमी नहीं है, इसलिए इसमें लापरवाही न बरतें। ये बातें उप मुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने कलेक्ट्रेट सभागार में आयोजित समीक्षा बैठक में कहीं।
समीक्षा बैठक में जब सीएमओ ने बताया कि जनपद में 168 डाक्टरों के पद सृजित है। उसमें 131 कार्यरत है। इस पर उपमुख्यमंत्री ने नाराजगी जताई। कहा कि आप के पास संसाधन पूरे हैं। 68 डाक्टर एनएचएम के कार्य कर रहे हैं। उन्हें इस सूची से बाहर क्यों रखा गया है? एनएचएम के तहत जो डाक्टर तैनात हैं, उनसे भी मरीजों का उपचार कराया जाए। जिला चिकित्सालय की व्यवस्था के लिए भी प्रदेश सरकार कार्य कर रही है।
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मेडिकल कालेज के प्राचार्य डॉ. एके झा को निर्देश दिया कि मेडिकल की पढ़ाई कर रहे छात्रों के रहने एवं खाने की व्यवस्था स्वयं जाकर देखें। सांसद जगदंबिका पाल के डायलिसिस की व्यवस्था बढ़ाने की मांग पर उपमुख्यमंत्री ने प्राचार्य मेडिकल कालेज को निर्देश दिया कि तत्काल डायलिसिस बढ़ाने का प्रस्ताव बनाकर भेजें। आवश्यक दवाएं उपलब्धता नहीं होने पर केवल गरीबों के लिए लोकल परचेज का उपयोग किया जाए। जनपद में सामान्य उपचार के लिए मरीजों को स्थानीय सीएचसी एवं पीएचसी में भर्ती किया जाए, जिससे अनावश्यक रूप से जिला चिकित्सालय पर मरीजों की भीड़ न बढ़े और जनपद के सभी स्वास्थ्य केंद्रों पर उपलब्ध संसाधनों का बेहतर उपयोग भी हो सकें।
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इस दौरान विधायक श्यामधनी राही, जयप्रताप सिंह, विनय वर्मा, डीएम संजीव रंजन, एसपी अमित कुमार आनंद, मुख्य विकास अधिकारी जयेंद्र कुमार, प्रभारी मेडिकल कालेज डॉ. एके झा एवं मुख्य चिकित्साधिकारी डॉ. विनोद कुमार अग्रवाल मौजूद रहे।