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Siddharthnagar News: भारतीय ज्ञान परंपरा विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास के लिए महत्वपूर्ण
Fri, 27 Feb 2026 03:00 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
Updated Fri, 27 Feb 2026 03:00 AM IST
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डायट बांसी में भारतीय ज्ञान प्रणाली के महत्व और आधुनिक शिक्षा में समावेशन विषय पर आयोजित हुआ सेमिनार
बांसी। जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान (डायट) बांसी में बृहस्पतिवार को भारतीय ज्ञान प्रणाली का महत्व और आधुनिक शिक्षा में समावेशन विषय पर सेमिनार का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य भारतीय ज्ञान परंपरा के मूल तत्वों को समझते हुए उन्हें आधुनिक शिक्षा प्रणाली में प्रभावी रूप से समाहित करने पर विचार-विमर्श करना था।
मुख्य वक्ता सीनियर असिस्टेंट प्रोफेसर डाॅ. हंसराज ने भारतीय ज्ञान प्रणाली की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि, नैतिक मूल्यों एवं समग्र शिक्षा की अवधारणा पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि भारतीय ज्ञान परंपरा विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है और इसे वर्तमान पाठ्यक्रम में समुचित स्थान दिया जाना चाहिए। असिस्टेंट प्रोफेसर डाॅ. अरविंद कुमार मौर्य ने आधुनिक शिक्षा में भारतीय ज्ञान प्रणाली के व्यावहारिक समावेशन के विभिन्न आयामों पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने उदाहरणों के माध्यम से बताया कि किस प्रकार स्थानीय ज्ञान, पर्यावरणीय चेतना और सांस्कृतिक विरासत को शिक्षण-अधिगम प्रक्रिया में शामिल किया जा सकता है।
कार्यक्रम का संचालन प्रवक्ता अनुराग कुमार श्रीवास्तव ने किया। कार्यक्रम को वरिष्ठ प्रवक्ता लालजी कुमार पांडेय, अभय कुमार मिश्र, सत्येंद्र बहादुर सिंह, मनोज द्विवेदी, मारुति नंदन श्रीवास्तव ने संबोधित किया। अंत में प्रश्नोत्तर सत्र आयोजित किया गया, जिसमें प्रतिभागियों ने अपने विचार एवं सुझाव प्रस्तुत किए। इस अवसर पर अंशुमन सिंह, राकेश पांडेय, उत्कर्ष श्रीवास्तव, अनंत दीप, तारिक मुस्तफा सहित काफी संख्या में शिक्षक मौजूद थे।
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बांसी। जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान (डायट) बांसी में बृहस्पतिवार को भारतीय ज्ञान प्रणाली का महत्व और आधुनिक शिक्षा में समावेशन विषय पर सेमिनार का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य भारतीय ज्ञान परंपरा के मूल तत्वों को समझते हुए उन्हें आधुनिक शिक्षा प्रणाली में प्रभावी रूप से समाहित करने पर विचार-विमर्श करना था।
मुख्य वक्ता सीनियर असिस्टेंट प्रोफेसर डाॅ. हंसराज ने भारतीय ज्ञान प्रणाली की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि, नैतिक मूल्यों एवं समग्र शिक्षा की अवधारणा पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि भारतीय ज्ञान परंपरा विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है और इसे वर्तमान पाठ्यक्रम में समुचित स्थान दिया जाना चाहिए। असिस्टेंट प्रोफेसर डाॅ. अरविंद कुमार मौर्य ने आधुनिक शिक्षा में भारतीय ज्ञान प्रणाली के व्यावहारिक समावेशन के विभिन्न आयामों पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने उदाहरणों के माध्यम से बताया कि किस प्रकार स्थानीय ज्ञान, पर्यावरणीय चेतना और सांस्कृतिक विरासत को शिक्षण-अधिगम प्रक्रिया में शामिल किया जा सकता है।
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कार्यक्रम का संचालन प्रवक्ता अनुराग कुमार श्रीवास्तव ने किया। कार्यक्रम को वरिष्ठ प्रवक्ता लालजी कुमार पांडेय, अभय कुमार मिश्र, सत्येंद्र बहादुर सिंह, मनोज द्विवेदी, मारुति नंदन श्रीवास्तव ने संबोधित किया। अंत में प्रश्नोत्तर सत्र आयोजित किया गया, जिसमें प्रतिभागियों ने अपने विचार एवं सुझाव प्रस्तुत किए। इस अवसर पर अंशुमन सिंह, राकेश पांडेय, उत्कर्ष श्रीवास्तव, अनंत दीप, तारिक मुस्तफा सहित काफी संख्या में शिक्षक मौजूद थे।
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