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मंदिर में स्कूल, खुले में चल रहीं कक्षाएं
अमर उजाला ब्यूरो/सिद्धार्थनगर
Updated Thu, 14 Jan 2016 11:49 PM IST
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अच्छे माहौल में बच्चे पढ़ सकें, इस मकसद से स्कूल भवन बनाने के लिए शासन ने पैसा दिया। खाते में आई 6.40 लाख की धनराशि गुरुजी डकार गए और बच्चों को भगवान की शरण में छोड़ दिया। मंदिर में स्कूल चल रहा है। खुले आसमान के नीचे कक्षाएं लग रही हैं।
मामला भनवापुर ब्लाक का है। छह माह से स्कूल ऐसे ही चल रहा है, विभाग अब जागा है। खंड शिक्षा अधिकारी की दलील है कि वह अनुनय-विनय और मिन्नतें कर थक चुके हैं, मगर पैसा उतार चुके भवन प्रभारी सुन ही नहीं रहे।
मनकौरा गांव में प्राथमिक विद्यालय द्वितीय के भवन निर्माण की मंजूरी वर्ष 2012-13 में मिली थी। वर्ष 2014 में इसके लिए 6.40 लाख रुपये विभाग ने अवमुक्त कर दिए।
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निर्माण की जिम्मेदारी मिठवल ब्लाक में तैनात शिक्षक विनोद पांडेय को सौंपी गई। यह भवन नए सत्र से पहले बनकर तैयार कर लिया जाना था। गुरुजी ने पैसा तो उतार लिया, मगर बिल्डिंग नहीं बनवाया।
भवन के नाम पर अब तक सिर्फ नींव पड़ी है, जबकि पैसा लगभग पूरा उतारा जा चुका है। जुलाई माह से ही यह स्कूल संचालित है। करीब चार दर्जन बच्चे यहां शिक्षा ले रहे हैं।
भवन न होने से कक्षाएं पास के ही दुर्गा मंदिर परिसर में खुले आसमान के नीचे लग रही है। एक तरफ मंदिर में घंट-घड़ियाल और मंत्रोच्चार गूंजता है तो दूसरी तरफ बच्चे ककहरा रटते है।
हैरानी की बात यह है कि पैसा देने के बाद भी भवन न बनाने वाले गुरुजी पर कार्रवाई करने में विभाग बेबस साबित हो रहा है। अफसरों का कहना है कि वह मिन्नतें कर रहे हैं।
अनुनय-विनय कर चुके हैं, मगर भवन प्रभानी उनकी नहीं सुन रहे। अब तो फोन भी नहीं उठाते। इस संबंध में भनवापुर के खंड शिक्ष्ाा अधिकारी हृदयशंकर लाल श्रीवास्तव ने बताया कि भवन प्रभारी को कई बार निर्माण पूरा कराने के लिए कहा गया, मगर सुन नहीं रहे।
अब तो फोन भी नहीं उठाते। दूसरे ब्लाक में तैनाती के कारण कार्रवाई भी नहीं कर सकते। इस मामले में उच्चाधिकारियों को अवगत करा दिया गया है। उन्हीं के स्तर पर कार्रवाई हो सकती है। बच्चों की पढ़ाई प्रभावित न हो, इसलिए स्थानीय व्यवस्था से कक्षाएं चलवाई जा रही हैं।
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मामला भनवापुर ब्लाक का है। छह माह से स्कूल ऐसे ही चल रहा है, विभाग अब जागा है। खंड शिक्षा अधिकारी की दलील है कि वह अनुनय-विनय और मिन्नतें कर थक चुके हैं, मगर पैसा उतार चुके भवन प्रभारी सुन ही नहीं रहे।
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मनकौरा गांव में प्राथमिक विद्यालय द्वितीय के भवन निर्माण की मंजूरी वर्ष 2012-13 में मिली थी। वर्ष 2014 में इसके लिए 6.40 लाख रुपये विभाग ने अवमुक्त कर दिए।
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निर्माण की जिम्मेदारी मिठवल ब्लाक में तैनात शिक्षक विनोद पांडेय को सौंपी गई। यह भवन नए सत्र से पहले बनकर तैयार कर लिया जाना था। गुरुजी ने पैसा तो उतार लिया, मगर बिल्डिंग नहीं बनवाया।
भवन के नाम पर अब तक सिर्फ नींव पड़ी है, जबकि पैसा लगभग पूरा उतारा जा चुका है। जुलाई माह से ही यह स्कूल संचालित है। करीब चार दर्जन बच्चे यहां शिक्षा ले रहे हैं।
भवन न होने से कक्षाएं पास के ही दुर्गा मंदिर परिसर में खुले आसमान के नीचे लग रही है। एक तरफ मंदिर में घंट-घड़ियाल और मंत्रोच्चार गूंजता है तो दूसरी तरफ बच्चे ककहरा रटते है।
हैरानी की बात यह है कि पैसा देने के बाद भी भवन न बनाने वाले गुरुजी पर कार्रवाई करने में विभाग बेबस साबित हो रहा है। अफसरों का कहना है कि वह मिन्नतें कर रहे हैं।
अनुनय-विनय कर चुके हैं, मगर भवन प्रभानी उनकी नहीं सुन रहे। अब तो फोन भी नहीं उठाते। इस संबंध में भनवापुर के खंड शिक्ष्ाा अधिकारी हृदयशंकर लाल श्रीवास्तव ने बताया कि भवन प्रभारी को कई बार निर्माण पूरा कराने के लिए कहा गया, मगर सुन नहीं रहे।
अब तो फोन भी नहीं उठाते। दूसरे ब्लाक में तैनाती के कारण कार्रवाई भी नहीं कर सकते। इस मामले में उच्चाधिकारियों को अवगत करा दिया गया है। उन्हीं के स्तर पर कार्रवाई हो सकती है। बच्चों की पढ़ाई प्रभावित न हो, इसलिए स्थानीय व्यवस्था से कक्षाएं चलवाई जा रही हैं।