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हाथों में दो हजार, फिर भी खरीदार लाचार
ब्यूरो/अमर उजाला सिद्धार्थनगर
Updated Sun, 13 Nov 2016 10:26 PM IST
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शहर के एसबीआई की मुख्य शाखा पर लोगों की लगी भीड़।
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
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सिद्धार्थनगर। बड़ी मशक्कत और इंतजार के बाद रविवार को जिले के चुनिंदा बैंकों में नई करेंसी पहुंच गई। यहां से दो-दो हजार के नए नोटों का वितरण भी हुआ, मगर यह नए नोट भी लोगों के लिए सिर्फ छलावा ही साबित हो रहे हैं। बैंक से नोट लेकर बाजार पहुंचे लोगों को छुट्टा पैसे न होने के कारण सामान नहीं मिल पाए। घंटों कतार में खड़े होकर नई करेंसी पाने के बाद भी यह लोग खुद को ठगा ही महसूस कर रहे हैं।
कौलपुर ग्रांट के मोलहू को घंटे भर कतार में खड़े होने के बाद एसबीआई शाखा से दो-दो हजार दो नोट मिले। यह नोट लेकर बाजार में पहुंचा तो सारी खुशियां काफूर हो गई। बकौल, मोलहू किराना दुकानदार ने छुट्टा न होने की बात कह सामान देने से इनकार कर दिया।
खाद लेने गए तो वहां भी यही स्थिति थी। बताया कि खेती के लिए 10 हजार रुपये रखे थे। चार हजार रुपये बदलकर यह नोट मिले हैं। अब इससे भी सामान नहीं मिल रहा। समझ नहीं आ रहा क्या करें। कुछ ऐसी ही समस्या दतरंगवा के सुनील की थी।
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केनरा बैंक से दो हजार के नोट लेकर जब वह सामान लेने पहुंचा तो खाली हाथ लौट आया। दुकानदार का कहना था कि छुट्टा कहां से लाए। 300 के सामान के बदले 1700 लौटाने के लिए 100-50 के नोट उसके पास नहीं है। सिर्फ मोलहू और सुनील ही नहीं, दो-दो हजार के नोट पाने वाले ज्यादातर लोगों के सामने यह परेशानी रही। बाजार में छोटे नोट पहले ही नहीं थे। किल्लत के बाद बचे-खुचे नोट को लोग अपनी जरूरत के लिए संभाल कर रख रहे हैं। जानकारों का कहना है कि यह समस्या तब तक दूर नहीं होगी, जब तक 500 और उससे छोटे नोट बाजार में नहीं लाए जाएंगे।
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कौलपुर ग्रांट के मोलहू को घंटे भर कतार में खड़े होने के बाद एसबीआई शाखा से दो-दो हजार दो नोट मिले। यह नोट लेकर बाजार में पहुंचा तो सारी खुशियां काफूर हो गई। बकौल, मोलहू किराना दुकानदार ने छुट्टा न होने की बात कह सामान देने से इनकार कर दिया।
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खाद लेने गए तो वहां भी यही स्थिति थी। बताया कि खेती के लिए 10 हजार रुपये रखे थे। चार हजार रुपये बदलकर यह नोट मिले हैं। अब इससे भी सामान नहीं मिल रहा। समझ नहीं आ रहा क्या करें। कुछ ऐसी ही समस्या दतरंगवा के सुनील की थी।
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केनरा बैंक से दो हजार के नोट लेकर जब वह सामान लेने पहुंचा तो खाली हाथ लौट आया। दुकानदार का कहना था कि छुट्टा कहां से लाए। 300 के सामान के बदले 1700 लौटाने के लिए 100-50 के नोट उसके पास नहीं है। सिर्फ मोलहू और सुनील ही नहीं, दो-दो हजार के नोट पाने वाले ज्यादातर लोगों के सामने यह परेशानी रही। बाजार में छोटे नोट पहले ही नहीं थे। किल्लत के बाद बचे-खुचे नोट को लोग अपनी जरूरत के लिए संभाल कर रख रहे हैं। जानकारों का कहना है कि यह समस्या तब तक दूर नहीं होगी, जब तक 500 और उससे छोटे नोट बाजार में नहीं लाए जाएंगे।