राजधानी दिल्ली-एनसीआर सहित देश के कई राज्य इन दिनों एच1एन1 यानी स्वाइन फ्लू का प्रकोप झेल रहे हैं। इन्फ्लुएंजा-ए वायरस का ही एक प्रकार माना जाने वाला ये संक्रमण इस बार लोगों के लिए मुश्किलें बढ़ाता देखा जा रहा है। पिछले 15-20 दिनों में दिल्ली के अस्पतालों में तेज बुखार, सर्दी-जुकाम और सांस की समस्याओं के साथ मरीजों की संख्या बढ़ती देखी गई है।
स्वाइन फ्लू: दिल-फेफड़ों के साथ एच1एन1 से आंखों को भी खतरा, नजर में ये बदलाव दिखें तो तुरंत जाएं डॉक्टर के पास
एच1एन1 का असर केवल सांस की नली और फेफड़ों तक सीमित नहीं रहता, कुछ लोगों में आंखों में लालिमा, पानी, जलन, सूखापन और रोशनी से परेशानी हो सकती है। अचानक नजर कम होना, तेज दर्द या धुंधला दिखना गंभीर संकेत हो सकते हैं। ऐसे लक्षणों में तुरंत नेत्र विशेषज्ञ से सलाह लें।
स्वाइन फ्लू का आंखों पर असर
अमर उजाला में प्रकाशित रिपोर्ट में हमने बताया था कि ये वायरस फेफड़ों और हार्ट पर भी अटैक कर सकता है। देश के कई राज्यों में एच1एन1 के मामलों में बढ़ोतरी के बीच विशेषज्ञों ने बताया है कि यह फ्लू सिर्फ सांस की नली और फेफड़ों को ही प्रभावित नहीं करता, बल्कि कुछ लोगों में आंखों से जुड़ी परेशानियां भी हो सकती हैं।
- स्वाइन फ्लू वैसे तो, इन्फ्लुएंजा ए वायरस का ही एक प्रकार है। इससे आमतौर पर बुखार, खांसी, गले में खराश, शरीर में दर्द, थकान और सांस से जुड़े दूसरे लक्षण होते हैं।
- यह संक्रमित व्यक्ति के खांसने, छींकने या बात करने पर निकलने वाली ड्रॉपलेट्स से फैलता है। इसका असर शरीर के दूसरे हिस्सों पर हो सकता है।
फ्लू के दौरान कुछ लोगों को आंखों से पानी आने, लालिमा, जलन-चुभन, रोशनी से परेशानी या ड्राइनेस की दिक्कत महसूस हो सकती है। आमतौर पर फ्लू ठीक होने के साथ ये समस्याएं भी कम हो जाती हैं। लेकिन अगर नजर में अचानक बदलाव आए तो इसे सामान्य लक्षण समझकर नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।
क्या कहते हैं विशेषज्ञ?
अमर उजाला से बातचीत में इंटेंसिव केयर के डॉक्टर विक्रमजीत सिंह कहते हैं, ज्यादातर मामलों में स्वाइन फ्लू के कारण होने वाली दिक्कतें हल्के स्तर की होती हैं। कई मामलों में आंखों से जुड़ी समस्या भी हल्की ही रहती है और उचित देखभाल से ठीक हो जाती है। इनमें सबसे आम समस्या वायरल कंजंक्टिवाइटिस हो सकती है जिसे आम भाषा में आंख आना कहा जाता है।
डॉक्टर कहते हैं, बहुत कम मामलों में इससे आंख के अंदर की सूजन यानी यूवाइटिस, आंख की रोशनी से जुड़ी परत रेटिना में सूजन या आंख से दिमाग तक संदेश पहुंचाने वाली ऑप्टिक नर्व पर असर जैसी गंभीर समस्याएं भी सामने आ सकती हैं। वैसे तो ये दुर्लभ हैं, लेकिन नजर को प्रभावित कर सकती हैं।
अगर फ्लू के दौरान लगातार धुंधला दिखाई दे, आंख में तेज दर्द हो, रोशनी से बहुत ज्यादा परेशानी हो या अचानक नजर कमजोर हो जाए तो इसे सामान्य आंख आने की समस्या नहीं मानना चाहिए। ऐसी स्थिति में आंखों की जांच जरूरी है। आंखों के अन्य लक्षणों पर भी लगातार ध्यान देते रहना चाहिए।
- धुंधला दिखना या डबल विजन की समस्या
- आंखों के सामने चमकती रोशनी दिखाई देना
- आंखों के सामने तैरते हुए धब्बे या छोटे-छोटे काले बिंदु अचानक बढ़ जाना
- पास की चीजें देखने में परेशानी
आंखों को एच1एन1 के असर से कैसे बचाएं?
अमर उजाला में प्रकाशित रिपोर्ट में हमने बताया था कि इन्फ्लुएंजा से बचाव के लिए हर साल फ्लू की वैक्सीन लगवाना सबसे असरदार तरीका माना जाता है। इसके अलावा संक्रमण के दिनों में कुछ और सावधानियां बरतते रहना सभी लोगों के लिए जरूरी है।
- हाथों को नियमित रूप से अच्छी तरह धोएं।
- खांसते या छींकते समय मुंह और नाक ढकें।
- बीमार लोगों के बहुत करीब जाने से बचें।
- खुद बीमार हों तो घर पर रहें।
- बिना हाथ धोए आंखों को छूने या रगड़ने से बचें।
- अगर कंजंक्टिवाइटिस हो गया है तो तौलिया, तकिया या आंखों की देखभाल से जुड़ी निजी चीजें दूसरों के साथ साझा न करें।
डॉ. सिंह कहते हैं, वैसे तो एच1एन1 के कारण आंखों में गंभीर समस्याएं होना बहुत दुर्लभ हैं। अगर केवल आंखों में हल्की लालिमा, पानी आना या जलन है तो आमतौर पर घबराने की जरूरत नहीं होती। कभी भी एंटीबायोटिक या आई ड्रॉप खुद से न लें। बिना विशेषज्ञ की सलाह के इन दवाओं का इस्तेमाल बीमारी की सही पहचान में देरी कर सकता है और आपके लक्षणों को और भी प्रभावित करने वाली हो सकती है।
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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस के आधार पर तैयार किया गया है।
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