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रामभक्त, सख्त प्रशासक कल्याण सिंह की याद में कछारवासी गमजदा
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वर्ष 2001 में जिला मुख्यालय स्थित अभिन्न सहयोगी कार्यकर्ता राधारमण त्रिपाठी के घर पर उनके परिवार क?
- फोटो : SIDDHARTHNAGAR
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रामभक्त, सख्त प्रशासक कल्याण सिंह की याद में कछारवासी गमजदा
सिद्धार्थनगर। पूर्व मुख्यमंत्री कल्याण सिंह का जिले से गहरा लगाव था। उनके निधन की जानकारी होने पर उनके साथ बिताए क्षणों को याद कर कछार के लोगों की आंखें भर गईं। मुख्यमंत्री रहते और उसके बाद भी यहां का कई बार दौरा करने वाले कल्याण सिंह को लोग सच्चे रामभक्त और सख्त प्रशासक के रूप में याद कर गमजदा हैं।
प्रदेश के दो बार सीएम और बाद में राज्यपाल रहे कल्याण का जिले के लोधी समाज के बड़े मतदाता वर्ग में गहरी पैठ थी। यहां तक कि उनके नाम पर ही भाजपा से जुड़े लोधी समाज के लोग अब भी पार्टी के समर्थक बने हुए हैं। कल्याण ने मुख्यमंत्री बनने से पहले लोगों को राममंदिर आंदोलन में शामिल होने के लिए आमंत्रित करने के लिए जनसभा की थी। यहां के लोगों से उनका गहरा लगाव ही था कि मुख्यमंत्री रहते और बाद में भी जिले में कई बार आए। कछार क्षेत्र के महुआ, ककरही, गोनहा सहित कई गांवों में लोग उनकी फोटो की पूजा करते रहे। करौंदा मसिना गांव निवासी विजय लोधी ने कहा कि उनका कल्याण सिंह से गहरा लगाव था। वह उनके अभिभावक की तरह थे। वह जब 1991 में मुख्यमंत्री बने थे, तब यहां पर आए थे। उनका भाषण सुनने के बाद हर कोई उनका मुरीद हो जाता था।
आखिरी बार जिले में वर्ष 2006 में किसान रैली में शामिल होने आए थे। बाले लोधी ने कहा कि कल्याण सिंह ने जो कर दिया, वह कोई नहीं करेगा। कुर्सी का मोह त्यागते उन्हें देर नहीं लगी। हुए वह सच्चे रामभक्त थे। उन्हें हमेशा याद किया जाएगा। कछार क्षेत्र की जनता उन्हें कभी भूल नहीं सकती। लालमन ने कहा कि कल्याण सिंह का नाम सुनने के बाद लोग उत्साहित हो जाते थे। करौंदा मसिना में उन्हें सुनने के लिए लोग 20 किलोमीटर दूरी तय करके पैदल चले आते थे। हमने एक सच्चे रामभक्त और नेता को खो दिया। बुजुर्ग पितांबर कहते हैं कि हमारे नेता की देन है कि लोग मंदिर बनता हुआ देख रहे। चिकन कहते हैं कि कल्याण सिंह ने हिंदू समाज को जगाने का काम किया। वह सच्चे नेता थे। उनके अंदर स्वार्थ नहीं था। उनके निधन से बहुत आहत हैं, हमने अपने नेता को खो दिया।
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कार्यकर्ताओं से रखते थे जुड़ाव
कल्याण सिंह कार्यकर्ताओं से गहरा जुड़ाव रखते थे। भाजपा से अलग होकर राष्ट्रीय क्रांति पार्टी बनाए तो भी जिले को महत्व दिया। वर्ष 2000 में उनकी पार्टी के जिलाध्यक्ष भगवान दास की हत्या हुई तो वह परसा शुकुरूल्लाह स्थित उनके घर पहुंच परिजनों को ढांढस बधाए। भाजपा नेता राधारमण त्रिपाठी का कहना है कि वह कार्यकर्ताओं के सुख-दुख में हर समय साथ खड़े रहने वाले नेता थे। उनके निधन से हम बहुत आहत हैं।
कई बार आए करौंदा मसिना
कछार के अधिकांश गांवों में लोधी समाज के बड़े मतदाता वर्ग होने के कारण कल्याण सिंह जोगिया क्षेत्र के करौंदा मसिना में कई बार जनसभा की थी। 1991 के बाद दूसरी बार वह 1997 में करौंदा मसिना में आए थे। वर्ष 2001 में उन्होंने अमर शहीद महारानी आवंतीबाई विद्यालय करौंदा मसिना का उद्घाटन किया था। इस विद्यालय में उनके जीवन, संघर्ष और आदर्शों को बताया जाता है, जिससे बच्चे उनके बारे में जान सकें।
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सिद्धार्थनगर। पूर्व मुख्यमंत्री कल्याण सिंह का जिले से गहरा लगाव था। उनके निधन की जानकारी होने पर उनके साथ बिताए क्षणों को याद कर कछार के लोगों की आंखें भर गईं। मुख्यमंत्री रहते और उसके बाद भी यहां का कई बार दौरा करने वाले कल्याण सिंह को लोग सच्चे रामभक्त और सख्त प्रशासक के रूप में याद कर गमजदा हैं।
प्रदेश के दो बार सीएम और बाद में राज्यपाल रहे कल्याण का जिले के लोधी समाज के बड़े मतदाता वर्ग में गहरी पैठ थी। यहां तक कि उनके नाम पर ही भाजपा से जुड़े लोधी समाज के लोग अब भी पार्टी के समर्थक बने हुए हैं। कल्याण ने मुख्यमंत्री बनने से पहले लोगों को राममंदिर आंदोलन में शामिल होने के लिए आमंत्रित करने के लिए जनसभा की थी। यहां के लोगों से उनका गहरा लगाव ही था कि मुख्यमंत्री रहते और बाद में भी जिले में कई बार आए। कछार क्षेत्र के महुआ, ककरही, गोनहा सहित कई गांवों में लोग उनकी फोटो की पूजा करते रहे। करौंदा मसिना गांव निवासी विजय लोधी ने कहा कि उनका कल्याण सिंह से गहरा लगाव था। वह उनके अभिभावक की तरह थे। वह जब 1991 में मुख्यमंत्री बने थे, तब यहां पर आए थे। उनका भाषण सुनने के बाद हर कोई उनका मुरीद हो जाता था।
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आखिरी बार जिले में वर्ष 2006 में किसान रैली में शामिल होने आए थे। बाले लोधी ने कहा कि कल्याण सिंह ने जो कर दिया, वह कोई नहीं करेगा। कुर्सी का मोह त्यागते उन्हें देर नहीं लगी। हुए वह सच्चे रामभक्त थे। उन्हें हमेशा याद किया जाएगा। कछार क्षेत्र की जनता उन्हें कभी भूल नहीं सकती। लालमन ने कहा कि कल्याण सिंह का नाम सुनने के बाद लोग उत्साहित हो जाते थे। करौंदा मसिना में उन्हें सुनने के लिए लोग 20 किलोमीटर दूरी तय करके पैदल चले आते थे। हमने एक सच्चे रामभक्त और नेता को खो दिया। बुजुर्ग पितांबर कहते हैं कि हमारे नेता की देन है कि लोग मंदिर बनता हुआ देख रहे। चिकन कहते हैं कि कल्याण सिंह ने हिंदू समाज को जगाने का काम किया। वह सच्चे नेता थे। उनके अंदर स्वार्थ नहीं था। उनके निधन से बहुत आहत हैं, हमने अपने नेता को खो दिया।
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कार्यकर्ताओं से रखते थे जुड़ाव
कल्याण सिंह कार्यकर्ताओं से गहरा जुड़ाव रखते थे। भाजपा से अलग होकर राष्ट्रीय क्रांति पार्टी बनाए तो भी जिले को महत्व दिया। वर्ष 2000 में उनकी पार्टी के जिलाध्यक्ष भगवान दास की हत्या हुई तो वह परसा शुकुरूल्लाह स्थित उनके घर पहुंच परिजनों को ढांढस बधाए। भाजपा नेता राधारमण त्रिपाठी का कहना है कि वह कार्यकर्ताओं के सुख-दुख में हर समय साथ खड़े रहने वाले नेता थे। उनके निधन से हम बहुत आहत हैं।
कई बार आए करौंदा मसिना
कछार के अधिकांश गांवों में लोधी समाज के बड़े मतदाता वर्ग होने के कारण कल्याण सिंह जोगिया क्षेत्र के करौंदा मसिना में कई बार जनसभा की थी। 1991 के बाद दूसरी बार वह 1997 में करौंदा मसिना में आए थे। वर्ष 2001 में उन्होंने अमर शहीद महारानी आवंतीबाई विद्यालय करौंदा मसिना का उद्घाटन किया था। इस विद्यालय में उनके जीवन, संघर्ष और आदर्शों को बताया जाता है, जिससे बच्चे उनके बारे में जान सकें।