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Siddharthnagar News: महकमे से दो कदम आगे अवैध अस्पताल संचालक जिंदगी का कर रहे सौदा

Mon, 16 Jun 2025 11:43 PM IST
Gorakhpur Bureau गोरखपुर ब्यूरो
Updated Mon, 16 Jun 2025 11:43 PM IST
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Illegal hospital operators are making a deal for life, two steps ahead of the department
-एक सप्ताह में पांच अस्पतालों पर सवाल, कहीं मौत पर शोर तो कहीं गर्भपात करने की लगा रहे बोली
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-प्रसूता और नवजात की मौत पर हुई जांच तो दस्तावेज अधूरा होने पर सील किया गया अस्पताल

-गर्भपात पर दो अस्पताल सामने आए, जांच के लिए बैठी कमेटी, एक पर ऑपरेशन करके आंख की रोशनी गायब करने का आरोप

-जांच में खुलेगी पोल, कागजात और डिग्री धारक हैं या नियम विरुद्ध कर रहे इलाज

संवाद न्यूज एजेंसी
सिद्धार्थनगर। बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं मुहैया कराने का दावा करके मरीजों का आर्थिक शोषण करने के साथ ही उनकी जिंदगी से खेला जा रहा है। मौत के शोर और शिकायत के बाद मामला पकड़ में आता है। जांच होती है तो पता चलता है कि अस्पताल पंजीकरण विहीन है। वहीं, जहां ऑपरेशन की अनुमति तक नहीं ऑपरेशन किए जा रहे हैं।
स्वास्थ्य विभाग जितना नियम बना रहा है और जांच करके शिकंजा कस रहा है। अवैध अस्पताल संचालक उसका तोड़ ढूंढकर जिंदगी का सौदा कर रहे हैं। स्वास्थ्य विभाग से जुड़े लोगों का कहना है कि बिना गठजोड़ के जो मेडिकल स्टोर नहीं चला सकता है उसके अस्पताल और जांच केंद्र चलाने की बात दूर है। जनपद में एक सप्ताह में पांच अस्पतालों पर सवाल उठे हैं। इसमें बांसी में प्रसूता और नवजात की जान चली गई। एक वृद्ध महिला की आंख की रोशनी चली गई। वहीं दो मामलों में गर्भपात कराने और रुपये की बोली लगाने का मामला सामने आ चुका है। सिस्टम में घुसकर स्वास्थ्य पेशे को बीमार बनाने वाले धंधेबाजों पर क्या कार्रवाई होगी। वैध हैं या अवैध, इसका खुलासा जल्द सामने आएगा। क्योंकि सभी मामलों में सीएमओ की ओर से जांच कमेटी बनाई गई। उसकी रिपोर्ट पर कार्रवाई तय होगी।
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गर्भपात का खेल : एक केस कमीशन छह हजार
13 जून को एक वीडियो सामने आया, जिसके अनुसार बढ़नी के पचपेड़वा रोड पर स्थित एक क्लिनिक की करतूतों को उजागर करने एक व्यक्ति ने संचालक से कहा कि मैं नेपाल के सेमरा गांव का निवासी हूं, एक गर्भपात करवाना है। उसके बाद संचालक ने कहा कि ठीक है, मरीज को ले आइए, यह क्लिनिक नाम के लिए है, यहां 22 बेड का अस्पताल है, यहां हर सुविधा आपको मिलेगी। कोई भी ऑपरेशन लेकर आते हैं, तो आपको कमीशन 6000 मिलेगा। मैं खुद इटवा सीएचसी में मेडिकल अफसर हूं। किसी प्रकार की कोई दिक्कत नहीं होगी। इस मामले में जांच टीम गठित की गई है। उसकी रिपोर्ट तय करेगी कि अस्पताल वैध है या अवैध, फिर कार्रवाई तय होगी। जबकि, गर्भपात बड़ा अपराध माना गया है, अगर ऐसा चल रहा है ताे व्यवस्था पर सवाल है।
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जान से मारने की कीमत 30 हजार, बातचीत में लगा रहे बोली
बढ़नी पचपेड़वा रोड पर स्थित हॉस्पिटल पर एक व्यक्ति डमी मरीज की ओर से मरीज का खास बनकर जाता है। वहां के चिकित्सक व संचालक से कहा कि डाॅक्टर साहब एक गर्भपात करवाना है। चिकित्सक ने व्यक्ति से कहा कि बच्चा कितने दिन का है, उसने कहा कि बच्चा दो महीने से ज्यादा दिन का हो गया है। कितना पैसा लगेगा। चिकित्सक ने कहा कि अपना नंबर दीजिए, कुछ देर बाद फोन पर आपको पैसा बता दिया जाएगा। आधे घंटे बाद चिकित्सक ने एक नंबर दिया, कहा इनसे बात कर लीजिए, यहां आपको पूरी बात बता दी जाएगी। उसके बाद व्यक्ति ने दिए नंबर पर फोन किया। उधर से दूसरे चिकित्सक ने कहा कि 30 हजार गर्भपात के लगेंगे। इसी अस्पताल में एक मौत के बाद इसे सील कर दिया गया था। लेकिन, फिर कैसे संचालित होने लगा, यह बड़ा सवाल है। फिलहाल जांच के लिए कमेटी गठित कर दी गई। रिपोर्ट के आधार पर कार्रवाई होगी।
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इलाज किया, चली गई आंख की रोशनी
डुमरियागंज तहसील क्षेत्र के ग्राम बेतनार मुसतहकम निवासी नूरजहां ने डीएम को आरजीआरएस के जरिये शिकायती पत्र भेजकर डुमरियागंज स्थित भैरहवां आई हॉस्पिटल के चिकित्सक पर आंख के ऑपरेशन के दौरान लापरवाही बरतने का आरोप लगाते हुए कहा कि उसकी आंख की रोशनी चली गई है। आरोपी चिकित्सक पर कार्रवाई की जाए और उसका ऑपरेशन का खर्च 20 हजार रुपये लौटाए जाएं। मामले को गंभीरता से लेते हुए डीएम डाॅ. राजा गणपति आर. के निर्देश पर सीएमओ ने तीन सदस्यीय टीम गठित की है, जिससे डाॅ. एमएम त्रिपाठी, डाॅ. बीएन चतुर्वेदी तथा एसडीएम डॉ. संजीव दीक्षित को जांच कर रिपोर्ट सौंपने का निर्देश दिया गया है। अभी जांच टीम जांच नहीं करने पहुंची है।
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प्रसूता और नवजात की मौत, जांच में अस्पताल सील
बांसी कस्बे के आजादनगर वार्ड के शीतलगंज में स्थित लाइफ केयर हॉस्पिटल को लाइसेंस नवीनीकरण न होने और आवश्यक पत्रावली न दिखाने पर सील कर दिया गया है। इसमें नौ जून को करही शुक्ल गांव निवासी हरिश्चंद्र के जच्चा-बच्चा की हत्या किए जाने की शिकायत पर जांच करने पहुंचे एसडीएम शशांक शेखर राय व एडिशनल सीएमओ के साथ लाइफ केयर हॉस्पिटल पहुंची स्वास्थ्य विभाग की टीम ने अस्पताल की जांच की। जांच में अस्पताल का नवीनीकरण नहीं पाया गया। साथ ही अस्पताल संचालन के लिए आवश्यक पेपर मांगने पर अस्पताल संचालक नहीं दिखा पाए। एसडीएम शशांक शेखर राय ने बताया कि नवीनीकरण न होने के कारण नोटिस देकर अस्पताल की सील कर दिया गया है ।

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बोले जिम्मेदार
हर शिकायत की जांच की जा रही है। जांच रिपोर्ट के आधार पर कार्रवाई की जाएगी। कोई बख्शा नहीं जाएगा। टीम अपने स्तर से काम कर रही है। वहीं, बांसी की घटना में जांच में अस्पताल का नवीकरण न होने पर सील कर दिया गया है। जैसे- जैसे रिपोर्ट आएगी कार्रवाई की जाएगी।
-डॉ. रजत कुमार चौरसिया, सीएमओ
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