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जल्दी करो, भाई बस 24 घंटे बचे हैं
ब्यूरो/अमर उजाला सिद्धार्थनगर
Updated Sun, 07 May 2017 10:49 PM IST
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स्वास्थ्य मंत्री के आगमन को लेकर जिला अस्पताल में वाटर कूलर लगाया गया जिसे अभी तक चालू नही किया गया।
- फोटो : अमर उजाला
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सिद्धार्थनगर। सोमवार को जिले में आ रहे स्वास्थ्य मंत्री सिद्धार्थनाथ सिंह के दौरे की तैयारियों को लेकर शहर के अस्पतालों में गहमा-गहमी का माहौल देखने को मिला। मंत्री आएं तो, उन्हें सबकुछ चाक-चौबंद और चकाचक दिखे इसकी जुगत में अस्पताल प्रशासन और स्वास्थ्यकर्मी जुटे दिखे। मंत्री सोमवार को सुबह साढ़े 11 बजे जिला अस्पताल पहुंचेंगे। उनके निरीक्षण को लेकर रविवार को यहां युद्धस्तर पर तैयारियां हुईं।
जिला अस्पताल के पूरे परिसर को धुलने और सजाने में सुबह से ही स्वास्थ्य कर्मी जुट गए। अस्पताल की धुलाई के लिए मशीन भी मंगाई गई थी। ओपीडी से लेकर इमरजेंसी तक हर कोना चमकाया जा रहा था। वार्डों में खिड़कियों के टूटे शीशे को ढकने के लिए साफ-सुथरे हरे पर्दे लगा लगाए गए। इमरजेंसी के डॉक्टर कक्ष के बाहर प्लास्टिक का पारदर्शी पर्दा लटका दिया गया। सीएमएस डॉ. रोचस्मति पांडेय खुद खड़ा होकर अस्पताल के पिछले हिस्से में गंदगी के ढेर को हटवाने में जुटी रहीं। जगह-जगह गमले सजाए जा गए। आम दिनों में पॉलीथिन के बेड पर सोने वाले मरीजों को सफेद चादर दी गई थी।
डॉक्टर वार्डों में जाकर मरीजों का कुशलक्षेम पूछ रहे थे। हर तरह से उन्हें संतुष्ट करने का प्रयास होता रहा ताकि वह कहीं मंत्री जी के सामने आम दिनों में रहने वाले अस्पताल के असली हाल की पोल न खोल दें। सबसे मजेदार दृश्य अस्पताल में लगी लिफ्ट का रहा। पिछले साल 14 लाख रुपये खर्च कर लिफ्ट की मरम्मत हुई थी, बावजूद लिफ्ट चालू नहीं हो पाई थी। अब मंत्री के आगमन को देखते हुए लिफ्ट चालू करने की जुगत में कर्मचारी जुटे रहे। रैन बसेरा चमचमा रहा था तो दिव्यांगों के लिए बने शौचालय को भी चालू कर दिया गया था।
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जिला अस्पताल के पूरे परिसर को धुलने और सजाने में सुबह से ही स्वास्थ्य कर्मी जुट गए। अस्पताल की धुलाई के लिए मशीन भी मंगाई गई थी। ओपीडी से लेकर इमरजेंसी तक हर कोना चमकाया जा रहा था। वार्डों में खिड़कियों के टूटे शीशे को ढकने के लिए साफ-सुथरे हरे पर्दे लगा लगाए गए। इमरजेंसी के डॉक्टर कक्ष के बाहर प्लास्टिक का पारदर्शी पर्दा लटका दिया गया। सीएमएस डॉ. रोचस्मति पांडेय खुद खड़ा होकर अस्पताल के पिछले हिस्से में गंदगी के ढेर को हटवाने में जुटी रहीं। जगह-जगह गमले सजाए जा गए। आम दिनों में पॉलीथिन के बेड पर सोने वाले मरीजों को सफेद चादर दी गई थी।
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डॉक्टर वार्डों में जाकर मरीजों का कुशलक्षेम पूछ रहे थे। हर तरह से उन्हें संतुष्ट करने का प्रयास होता रहा ताकि वह कहीं मंत्री जी के सामने आम दिनों में रहने वाले अस्पताल के असली हाल की पोल न खोल दें। सबसे मजेदार दृश्य अस्पताल में लगी लिफ्ट का रहा। पिछले साल 14 लाख रुपये खर्च कर लिफ्ट की मरम्मत हुई थी, बावजूद लिफ्ट चालू नहीं हो पाई थी। अब मंत्री के आगमन को देखते हुए लिफ्ट चालू करने की जुगत में कर्मचारी जुटे रहे। रैन बसेरा चमचमा रहा था तो दिव्यांगों के लिए बने शौचालय को भी चालू कर दिया गया था।
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