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भूख और बेकारी का फायदा उठा रहे मानव तस्कर

Sun, 28 Feb 2021 09:34 PM IST
Gorakhpur Bureau गोरखपुर ब्यूरो
Updated Sun, 28 Feb 2021 09:34 PM IST
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Human traffickers take advantage of hunger and unemployment
भूख-बेकारी का फायदा उठाते हैं मानव तस्कर
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लॉकडाउन के बाद पटरी से उतरी नेपालियों की जिंदगी
रोजगार का झांसा देकर मासूमों को फंसाते हैं तस्कर
लॉकडाउन के बाद मानव तस्करी के मामले बढ़े
संवाद न्यूज एजेंसी
सिद्धार्थनगर। भूख और बेकारी हर इंसान को बेबस कर देती है। मगर गलत लोग इसी का फायदा उठाकर अपराध कराते हैं। कुछ यही हाल इन दिनों नेपाल सीमा से सटे गांव के नेपाली बच्चों की है। इन दिनों तस्करों की इन पर नजर गड़ गई है। अच्छे रोजगार का झांसा देकर मानव तस्कर इन्हें बेचने का काम कर रहे हैं। बीते चार माह में अलीगढ़वा और ककरहवा सीमा पर 29 नाबालिग नेपाली बच्चों को पकड़ा गया है।
सीमा पर एसएसबी और पुलिस के साथ मिलकर काम करने वाली मानव सेवा संस्थान ने नेपाल पुलिस की मदद से उनके घर पहुंचाने काम कर चुकी है। सीमा पर बढ़ती मानव तस्करी का मामला काफी चिंताजनक है। भारत-नेपाल की 68 किलोमीटर सीमा पर पूरी तरह से खुली हुई है। नेपाल में रोजगार के बड़े साधन नहीं होने के कारण बड़ी संख्या में लोग कमाने के लिए दिल्ली, मुंबई, कानपुर, लखनऊ, गोरखपुर में होटल, घरों में काम करने लिए आते हैं। मगर बीते वर्ष कोरोना संक्रमण शुरू होने के बाद महानगरों को छोड़ना पड़ा। कमाई का कोई और साधन नहीं रहने से हालात और बिगड़ गए। लॉकडाउन हटने के बाद एक बार फिर नेपाली नागरिक महानगरों की ओर रुख करने लगे। पिछले चार माह में नाबालिग बच्चे और बच्चियों की तस्करी बढ़ गई है। मानव तस्कर अच्छे रोजगार और अच्छे वेतन का लालच देकर ला रहे हैं। इसके बाद उन्हें दूसरे कामों में लगा रहे हैं। हालांकि सीमा पर काम करने वाली एजेंसियों भी सतर्क हैं, संदिग्ध दिखने के बाद वह पूछताछ भी करतीं हैं। इसके बाद लोग पकड़े भी जा रहे हैं। एसपी रामअभिलाष त्रिपाठी ने बताया कि एएचटीयू थाने की टीम काम कर रही है। बालश्रम और भिक्षाटन करते हुए कई बच्चों को मुक्त कराया। नेपाल सीमा पर टीम की विशेष नजर है। एसएसबी 43वीं वाहिनी के कार्यवाहक कमांडेंट अमित सिंह ने बताया कि मानव तस्करी को रोकने के लिए जवान सक्रिय हैं। तस्करों को पकड़ने के साथ ही बच्चों को सुरक्षित नेपाल पुलिस को सुपुर्द किया जा रहा है।
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29 नेपाली नाबालिग पकड़े गए
मानव सेवा संस्थान की रिपोर्ट के मुताबिक एक नवंबर से 27 मार्च के बीच 27 नेपाली नाबालिग मानव तस्करों के चंगुल से छुड़ाए गए। यह अलीगढ़वा और ककरहवा सीमा क्षेत्र के पकड़े गए। इसमें नौ लड़कियां हैं और 20 किशोर हैं। रोजगार के सिलसिले में सभी को मानव तस्कर ला रहे थे।
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गरीब परिवार को झांसे में लेते हैं तस्कर
रेस्क्यू कार्य से जुड़े जानकार के मुताबिक मानव तस्कर पहले घर को चिह्नित करते हैं। वह देखते हैं कि परिवार की आर्थिक स्थिति क्या है। इसके बाद परिवार से संपर्क साधते हैं। कुछ दिन उनके संपर्क में रह कर भरोसा जीतते हैं। इसके बाद भारत में अच्छा रोजगार दिलाने की बात करते हैं। तस्कर बच्चों को सीमा पर लाकर छोड़ देते हैं। यहां से दूसरा व्यक्ति दूसरे स्थान पर छोड़ता है। वहां तीसरा व्यक्ति महानगरों में ले जाता है।

नेपाली बच्चों की होटलों में अधिक मांग
जानकारों का मानना है कि नेपाली लोग काफी मेहनती अधिक होते हैं। कम रुपये में काम करने के लिए तैयार हो जाते हैं। इसलिए होटलों पर नेपाली बच्चों की मांग अधिक रहती है। कुछ स्थानों पर तस्करों की दुकानदार से सेटिंग भी होती है। वह दुकान पर लाकर रख देते हैं। इसके एवज में उन्हें प्रतिमाह की दर से कमीशन मिलता है। मगर इस खेल को कम ही लोग समझ पाते हैं।
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