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किसी ने परिवार खोया तो कोई संक्रमण को मात देकर ड्यूटी में जुटा
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कोरोना की दूसरी लहर खतरनाक फिर हौसले से पस्त करने में जुटे स्वास्थ्यकर्मी
दुल्हन उतरी कोरोना की जंग में, सास को खोकर भी कर रही ड्यूटी
कोई छोटा बच्चा तो कोई बुजुर्ग परिवार को छोड़कर कर रहा ड्यूटी
श्याम सुंदर तिवारी
संवाद न्यूज एजेंसी
सिद्धार्थनगर। कोरोना की दूसरी लहर काफी खतरनाक है। अधिकांश लोग ऐसे हैं, जिन्होंने अपनों को खोया है। चाहे वे परिवार के हो या रिश्तेदार या फिर करीबी। मुश्किलों के इस दौर में ऐसे कोरोना योद्धा हैं, जो परिवार के सदस्य को खोकर और खुद संक्रमित होने के बाद ठीक होकर दूसरों की जान बचाने जुटे हैं, जबकि उनका हर दिन दम तोड़ने वाले मरीजों से सामना हो रहा है। वे उनका इलाज कर रहे हैं और फिर शाम को परिवार में जाते हैं। हम बात कर रहे हैं उन स्वास्थ्य कर्मियों की, जिन लोगों ने परिवार, छोटे बच्चे और बूढ़े माता-पिता को छोड़कर महामारी से लड़ रहे हैं। उनका कहना है कि हमारे हौसले बुलंद हैं। महामारी हारेगी और हम फिर जीतेंगे। ड्यूटी करना हमारा फर्ज है, क्योंकि हम भागने वालों में से नहीं हैं। हौसले से कोरोना को मात देंगे।
शादी के 14वें दिन शुरू कर दी ड्यूटी
कम्युनिटी हेल्थ ऑफिसर बढ़नी पीएचसी शारदा रावत कहती हैं, जहां कोरोना संक्रमित मिलते हैं। उनके बीच हमें जाना होता है। उनकी हालत देखते हैं कि सामान्य है या फिर खराब है। अगर खराब रहता है तो अस्पताल भेजवाता हैं। आसपास के लोगों का सैंपल भी कराते हैं। डर तो लगता है, लेकिन अगर हम आगे नहीं आएंगे तो कौन करेगा। 27 अप्रैल को शादी थी। 11 मई से फिर ड्यूटी पर आ गई। हमारी टीम कोरोना को हराएगी।
हौसले के आगे हरेगा कोरोना
बलरामपुर जिले की रहने वाली अजय लक्ष्मी द्विवेदी जिला अस्पताल में स्टॉफ नर्स हैं। उनका पूरा परिवार बलरामपुर में रहता है। वह जिला अस्पताल में रहकर ड्यूटी करती हैं। उन्होंने बताया कि इमरजेंसी में कई प्रकार के मरीज आ रहे हैं। इसमें कोरोना संक्रमित भी आते हैं। डर तो कहीं न कहीं हर किसी को लगता है, लेकिन अगर हम आगे नहीं रहेंगे तो कोरोना पर जीत कैसे मिलेगी। मम्मी-पापा से बात होती है, लेकिन जा नहीं पाई, उन्हें नियमित फोन पर ही बचाव की सलाह देती हूं।
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कोरोना से सास की मौत, ड्यूटी जारी
जिला अस्पताल में तैनात खेसरहा क्षेत्र की निवासी स्टॉफ नर्स किरन पांडेय कोरोना से सास को खो चुकी हैं। जबकि ससुर भी संक्रमित हुए थे, जो अब ठीक हैं। वह कहती हैं कि 20 अप्रैल को कोरोना संक्रमण से सास का निधन हो गया था। इसके बाद से वह प्रतिदिन घर से ड्यूटी आती हैं। उनके पास एक दो वर्ष की बेटी है, जिसे छोड़कर आती हैं। जाने के बाद खुद को सैनिटाइज करने के बाद ही वह परिवार के करीब जाती हैं। उन्होंने कहा कि संक्रमण से परिवार का सदस्य चला गया। डर बना रहता है, लेकिन ड्यूटी भी तो जरूरी है।
कोराना को हराकर ड्यूटी जारी
बस्ती जिले के निवासी राहुल पांडेय जिला अस्पताल में स्टॉफ नर्स के पद पर कार्यरत हैं। राहुल ने बताया कि वह इमरजेंसी और जनरल वार्ड दोनों जगह ड्यूटी करते हैं। ड्यूटी करते ही वह कोरोना संक्रमित हो गए। दवा चल रहा था। 11 मई को रिपोर्ट निगेटिव आई और फिर 13 मई से उन्होंने फिर ड्यूटी शुरू कर दी है। वह कहते हैं कि अगर स्वास्थ्यकर्मी डरेगा तो कोरोना को कैसे मात देंगे।
परिवार के लोगों का बना रहता है डर
बांसी कस्बा निवासी ज्योति त्रिपाठी जिला अस्पताल में स्टॉफ नर्स हैं। उन्होंने कहा कि कोरोना संक्रमण काल में लगातार ड्यूटी कर रही हैं। खुद की फिक्र नहीं रहती है, लेकिन परिवार का डर लगा रहता है। इसलिए घर जाने के बाद जब तक सैनिटाइज नहीं कर लेते हैं, अंदर नहीं जाते हैं। परिवार के लोगों से दूरी बनाकर ही रहते हैं। साथ ही कोरोना से बचाव के लिए जागरूक करते हैं।
हौसले से देंगेे कोरोना को मात
नगर से सटे भीमापार निवासी अजय कुमार यादव जिला अस्पताल में नर्सिंग ऑफिसर हैं। उनकी इमरजेंसी में हमेशा ड्यूटी रहती है। अजय ने बताया कि इस समय कौन मरीज संक्रमित है। यह बिना जाने और बिना डर के उसका इलाज कर रहे हैं। घर जाने के बाद परिवार के सदस्यों से दूरी बनाकर रहते हैं। क्योंकि घर में बुजुर्ग हैं, ऐसे में उन्हें दिक्कत न हो। इसलिए कोरोना गाइडलाइन का पालन करते हुए ड्यूटी करते हैं।
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दुल्हन उतरी कोरोना की जंग में, सास को खोकर भी कर रही ड्यूटी
कोई छोटा बच्चा तो कोई बुजुर्ग परिवार को छोड़कर कर रहा ड्यूटी
श्याम सुंदर तिवारी
संवाद न्यूज एजेंसी
सिद्धार्थनगर। कोरोना की दूसरी लहर काफी खतरनाक है। अधिकांश लोग ऐसे हैं, जिन्होंने अपनों को खोया है। चाहे वे परिवार के हो या रिश्तेदार या फिर करीबी। मुश्किलों के इस दौर में ऐसे कोरोना योद्धा हैं, जो परिवार के सदस्य को खोकर और खुद संक्रमित होने के बाद ठीक होकर दूसरों की जान बचाने जुटे हैं, जबकि उनका हर दिन दम तोड़ने वाले मरीजों से सामना हो रहा है। वे उनका इलाज कर रहे हैं और फिर शाम को परिवार में जाते हैं। हम बात कर रहे हैं उन स्वास्थ्य कर्मियों की, जिन लोगों ने परिवार, छोटे बच्चे और बूढ़े माता-पिता को छोड़कर महामारी से लड़ रहे हैं। उनका कहना है कि हमारे हौसले बुलंद हैं। महामारी हारेगी और हम फिर जीतेंगे। ड्यूटी करना हमारा फर्ज है, क्योंकि हम भागने वालों में से नहीं हैं। हौसले से कोरोना को मात देंगे।
शादी के 14वें दिन शुरू कर दी ड्यूटी
कम्युनिटी हेल्थ ऑफिसर बढ़नी पीएचसी शारदा रावत कहती हैं, जहां कोरोना संक्रमित मिलते हैं। उनके बीच हमें जाना होता है। उनकी हालत देखते हैं कि सामान्य है या फिर खराब है। अगर खराब रहता है तो अस्पताल भेजवाता हैं। आसपास के लोगों का सैंपल भी कराते हैं। डर तो लगता है, लेकिन अगर हम आगे नहीं आएंगे तो कौन करेगा। 27 अप्रैल को शादी थी। 11 मई से फिर ड्यूटी पर आ गई। हमारी टीम कोरोना को हराएगी।
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हौसले के आगे हरेगा कोरोना
बलरामपुर जिले की रहने वाली अजय लक्ष्मी द्विवेदी जिला अस्पताल में स्टॉफ नर्स हैं। उनका पूरा परिवार बलरामपुर में रहता है। वह जिला अस्पताल में रहकर ड्यूटी करती हैं। उन्होंने बताया कि इमरजेंसी में कई प्रकार के मरीज आ रहे हैं। इसमें कोरोना संक्रमित भी आते हैं। डर तो कहीं न कहीं हर किसी को लगता है, लेकिन अगर हम आगे नहीं रहेंगे तो कोरोना पर जीत कैसे मिलेगी। मम्मी-पापा से बात होती है, लेकिन जा नहीं पाई, उन्हें नियमित फोन पर ही बचाव की सलाह देती हूं।
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कोरोना से सास की मौत, ड्यूटी जारी
जिला अस्पताल में तैनात खेसरहा क्षेत्र की निवासी स्टॉफ नर्स किरन पांडेय कोरोना से सास को खो चुकी हैं। जबकि ससुर भी संक्रमित हुए थे, जो अब ठीक हैं। वह कहती हैं कि 20 अप्रैल को कोरोना संक्रमण से सास का निधन हो गया था। इसके बाद से वह प्रतिदिन घर से ड्यूटी आती हैं। उनके पास एक दो वर्ष की बेटी है, जिसे छोड़कर आती हैं। जाने के बाद खुद को सैनिटाइज करने के बाद ही वह परिवार के करीब जाती हैं। उन्होंने कहा कि संक्रमण से परिवार का सदस्य चला गया। डर बना रहता है, लेकिन ड्यूटी भी तो जरूरी है।
कोराना को हराकर ड्यूटी जारी
बस्ती जिले के निवासी राहुल पांडेय जिला अस्पताल में स्टॉफ नर्स के पद पर कार्यरत हैं। राहुल ने बताया कि वह इमरजेंसी और जनरल वार्ड दोनों जगह ड्यूटी करते हैं। ड्यूटी करते ही वह कोरोना संक्रमित हो गए। दवा चल रहा था। 11 मई को रिपोर्ट निगेटिव आई और फिर 13 मई से उन्होंने फिर ड्यूटी शुरू कर दी है। वह कहते हैं कि अगर स्वास्थ्यकर्मी डरेगा तो कोरोना को कैसे मात देंगे।
परिवार के लोगों का बना रहता है डर
बांसी कस्बा निवासी ज्योति त्रिपाठी जिला अस्पताल में स्टॉफ नर्स हैं। उन्होंने कहा कि कोरोना संक्रमण काल में लगातार ड्यूटी कर रही हैं। खुद की फिक्र नहीं रहती है, लेकिन परिवार का डर लगा रहता है। इसलिए घर जाने के बाद जब तक सैनिटाइज नहीं कर लेते हैं, अंदर नहीं जाते हैं। परिवार के लोगों से दूरी बनाकर ही रहते हैं। साथ ही कोरोना से बचाव के लिए जागरूक करते हैं।
हौसले से देंगेे कोरोना को मात
नगर से सटे भीमापार निवासी अजय कुमार यादव जिला अस्पताल में नर्सिंग ऑफिसर हैं। उनकी इमरजेंसी में हमेशा ड्यूटी रहती है। अजय ने बताया कि इस समय कौन मरीज संक्रमित है। यह बिना जाने और बिना डर के उसका इलाज कर रहे हैं। घर जाने के बाद परिवार के सदस्यों से दूरी बनाकर रहते हैं। क्योंकि घर में बुजुर्ग हैं, ऐसे में उन्हें दिक्कत न हो। इसलिए कोरोना गाइडलाइन का पालन करते हुए ड्यूटी करते हैं।