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Siddharthnagar News: बाढ़ से बचाव की तैयारी, पढ़ाई के लिए चिह्नित किए सुरक्षित स्थान
Sat, 27 Jun 2026 12:59 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
Updated Sat, 27 Jun 2026 12:59 AM IST
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सिद्धार्थनगर। गर्मी की छुट्टियां खत्म होने के बाद परिषदीय स्कूल खुल गए हैं। मानसून की दस्तक होने के साथ ही बारिश के आसार ने बाढ़ में जलमग्न रहने वाले स्कूलों में पढ़ाई व्यवस्था को सुचारू रखने के लिए विभाग ने अभी से जद्दोजहद शुरू कर दी है।
बाढ़ से हर साल प्रभावित होने वाले जिले के 167 परिषदीय स्कूलों में शैक्षणिक व्यवस्था दुरुस्त रखने के लिए विभागीय कवायद शुरू हो गई है। वहीं, शिक्षा पाने के लिए जद्दोजहद करने वाले बच्चों के अभिभावक के माथे पर चिंता की लकीरें बढ़ गई हैं। उन्हें स्कूलों के जलमग्न होने पर बाढ़ में ऊंचे स्थानों पर पढ़ने जाने वाले पाल्यों के सुरक्षा की चिंता सताने लगी है।
मानसून की दस्तक के साथ ही बाढ़ प्रभावित इस जिले के जलमग्न होने वाले एवं पानी से चारों तरफ से घिरने वाले स्कूलों में शैक्षणिक और सुरक्षात्मक तैयारी शुरू हो गई है। बाढ़ में प्रभावित होने वाले जिले के इन 167 परिषदीय स्कूल या तो जलमग्न हो जाते हैं या पानी से चारों तरफ से घिर जाते हैं, जिससे यहां शैक्षणिक कार्य बंद कर दिए जाते हैं।
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उसका ब्लॉक के ग्राम हथिवड़ताल के तिवारीडीह टोले में स्थित कंपोजिट उच्च प्राथमिक विद्यालय बूढ़ी राप्ती नदी के बाढ़ के पानी से जलमग्न हो जाता है। बाढ़ के समय जलभराव से एक से डेढ़ माह तक इस विद्यालय में पढ़ाई नहीं होती है। प्रधानाध्यापक हरिशंकर सिंह बताते हैं कि स्कूल जलमग्न होने पर वह सुरक्षित स्थान पर बच्चों को पढ़ाते हैं। इस स्कूल में आसपास के तीन टोले तिवारीडीह, बंगलवा और यादव टोला के बच्चे पढ़ते हैं, जिन्हें बाढ़ के समय शिक्षक नाव से जाकर उनके टोले में ही सुरक्षित स्थान पर पढ़ाया जाता है।
बता दें कि यहां बाढ़ का पानी हटने के बाद भी स्कूल परिसर सूखने में कई दिन लग जाते है, तब जाकर शैक्षणिक कार्य शुरू हो पाता है। कुछ ऐसा ही हाल बढ़नी ब्लॉक के प्राथमिक विद्यालय टीकर का है। हर वर्ष आने वाले बाढ़ से खैरी शीतल प्रसाद ग्राम के टीकर टोले में निचली भूमि में बने प्राथमिक विद्यालय टीकर में पानी भर जाता है।
चिह्नित कर लिए गए हैं सुरक्षित स्थान : जिले के उसका, जोगिया, बांसी, शोहरतगढ़, डुमरियागंज, भनवापुर आदि ब्लॉकों के 167 परिषदीय प्राथमिक व उच्च प्राथमिक विद्यालय बाढ़ से प्रभावित रहते हैं। बाढ़ के दौरान इन स्कूलों में शैक्षणिक कार्य के लिए विभाग की ओर से सुरक्षित स्थानों को चिह्नित कर लिया गया है। उसका ब्लॉक के तिवारीडीह स्कूल में तैनात छह शिक्षकों को अलग-अलग तीनों टोले के बच्चों को पढ़ाने के लिए ड्यूटी लगाई जाती है, जो बाढ़ से प्रभावित इन गांवों में नाव से जाकर पढ़ाते हैं। बीएसए शैलेष कुमार ने बताया कि बच्चों की पढ़ाई के साथ ही उनकी सुरक्षा प्राथमिकता रहती है। बाढ़ प्रभावित गांवों के बच्चों को उनके ही गांव में शिक्षा उपलब्ध कराने के लिए सुरक्षित स्थान चिह्नित किए गए हैं।
बाढ़ से हर साल प्रभावित होने वाले जिले के 167 परिषदीय स्कूलों में शैक्षणिक व्यवस्था दुरुस्त रखने के लिए विभागीय कवायद शुरू हो गई है। वहीं, शिक्षा पाने के लिए जद्दोजहद करने वाले बच्चों के अभिभावक के माथे पर चिंता की लकीरें बढ़ गई हैं। उन्हें स्कूलों के जलमग्न होने पर बाढ़ में ऊंचे स्थानों पर पढ़ने जाने वाले पाल्यों के सुरक्षा की चिंता सताने लगी है।
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मानसून की दस्तक के साथ ही बाढ़ प्रभावित इस जिले के जलमग्न होने वाले एवं पानी से चारों तरफ से घिरने वाले स्कूलों में शैक्षणिक और सुरक्षात्मक तैयारी शुरू हो गई है। बाढ़ में प्रभावित होने वाले जिले के इन 167 परिषदीय स्कूल या तो जलमग्न हो जाते हैं या पानी से चारों तरफ से घिर जाते हैं, जिससे यहां शैक्षणिक कार्य बंद कर दिए जाते हैं।
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उसका ब्लॉक के ग्राम हथिवड़ताल के तिवारीडीह टोले में स्थित कंपोजिट उच्च प्राथमिक विद्यालय बूढ़ी राप्ती नदी के बाढ़ के पानी से जलमग्न हो जाता है। बाढ़ के समय जलभराव से एक से डेढ़ माह तक इस विद्यालय में पढ़ाई नहीं होती है। प्रधानाध्यापक हरिशंकर सिंह बताते हैं कि स्कूल जलमग्न होने पर वह सुरक्षित स्थान पर बच्चों को पढ़ाते हैं। इस स्कूल में आसपास के तीन टोले तिवारीडीह, बंगलवा और यादव टोला के बच्चे पढ़ते हैं, जिन्हें बाढ़ के समय शिक्षक नाव से जाकर उनके टोले में ही सुरक्षित स्थान पर पढ़ाया जाता है।
बता दें कि यहां बाढ़ का पानी हटने के बाद भी स्कूल परिसर सूखने में कई दिन लग जाते है, तब जाकर शैक्षणिक कार्य शुरू हो पाता है। कुछ ऐसा ही हाल बढ़नी ब्लॉक के प्राथमिक विद्यालय टीकर का है। हर वर्ष आने वाले बाढ़ से खैरी शीतल प्रसाद ग्राम के टीकर टोले में निचली भूमि में बने प्राथमिक विद्यालय टीकर में पानी भर जाता है।
चिह्नित कर लिए गए हैं सुरक्षित स्थान : जिले के उसका, जोगिया, बांसी, शोहरतगढ़, डुमरियागंज, भनवापुर आदि ब्लॉकों के 167 परिषदीय प्राथमिक व उच्च प्राथमिक विद्यालय बाढ़ से प्रभावित रहते हैं। बाढ़ के दौरान इन स्कूलों में शैक्षणिक कार्य के लिए विभाग की ओर से सुरक्षित स्थानों को चिह्नित कर लिया गया है। उसका ब्लॉक के तिवारीडीह स्कूल में तैनात छह शिक्षकों को अलग-अलग तीनों टोले के बच्चों को पढ़ाने के लिए ड्यूटी लगाई जाती है, जो बाढ़ से प्रभावित इन गांवों में नाव से जाकर पढ़ाते हैं। बीएसए शैलेष कुमार ने बताया कि बच्चों की पढ़ाई के साथ ही उनकी सुरक्षा प्राथमिकता रहती है। बाढ़ प्रभावित गांवों के बच्चों को उनके ही गांव में शिक्षा उपलब्ध कराने के लिए सुरक्षित स्थान चिह्नित किए गए हैं।