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ध्वज योग लाएगी मकर संक्रांति, देश भर में नव खुशियां
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ध्वज योग लाएगी मकर संक्रांति पर नई खुशियां
दोपहर दो बजे से शुरू होगा खिचड़ी का महापर्व
मुहूर्त के बाद करें खिचड़ी का सेवन, दान-पुण्य
संवाद न्यूज एजेंसी
सिद्धार्थनगर। 14 जनवरी को दिन में दो बजकर आठ मिनट पर भगवान भास्कर मकर राशि में प्रवेश कर जाएंगे। इसी के साथ खरमास समाप्त हो जाएगा। सूर्य भगवान उत्तरपथगामी हो जाएंगे। ये बातें जय मां वैष्णो देवी ज्योतिष तंत्र अनुसंधान एवं परामर्श केंद्र के ज्योतिषी तांत्रिक आचार्य योगेश पांडेय ने कहा। आचार्य योगेश पांडेय ने बताया कि इस दिन खिचड़ी खाने और खिलाने एवं दान करने का दिन है। दान करने से अक्षय फल की प्राप्ति होती है। ऊनी वस्त्र इत्यादि का दान किया जाएगा। महापर्व पूरे देशभर में श्रद्धा भक्ति से विभिन्न प्रकार से मनाया जाता है। हिंदू पुराणों में वर्णित कथाओं के अनुसार मकर संक्रांति के दिन भगवान सूर्य देव अपने बेटे भगवान शनि देव के पास जाते हैं। उस समय शनि देव मकर राशि पर रहते हैं। शनि मकर राशि के देवता हैं। इसलिए इस दिन मकरसंक्रांति के रूप में मनाया जाता है। इस दिन जब कोई पिता अपने पुत्र से मिलने जाता है तो उसकी सारी समस्या दूर हो जाती हैं। आचार्य योगेश ने बताया कि महाभारत में भी वर्णित किया है कि भीष्म पितामह को इच्छा मृत्यु का वरदान प्राप्त था। युद्ध में जब वह शरसैय्या पर लेटे थे तब वह अपने प्राण त्यागने के लिए सूर्य देव के उत्तरायण होने का इंतजार कर रहे थे, क्योंकि मान्यता है कि सूर्य के उत्तरायण होने पर प्राण त्यागने से मोक्ष की प्राप्ति होगी।
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दोपहर दो बजे से शुरू होगा खिचड़ी का महापर्व
मुहूर्त के बाद करें खिचड़ी का सेवन, दान-पुण्य
संवाद न्यूज एजेंसी
सिद्धार्थनगर। 14 जनवरी को दिन में दो बजकर आठ मिनट पर भगवान भास्कर मकर राशि में प्रवेश कर जाएंगे। इसी के साथ खरमास समाप्त हो जाएगा। सूर्य भगवान उत्तरपथगामी हो जाएंगे। ये बातें जय मां वैष्णो देवी ज्योतिष तंत्र अनुसंधान एवं परामर्श केंद्र के ज्योतिषी तांत्रिक आचार्य योगेश पांडेय ने कहा। आचार्य योगेश पांडेय ने बताया कि इस दिन खिचड़ी खाने और खिलाने एवं दान करने का दिन है। दान करने से अक्षय फल की प्राप्ति होती है। ऊनी वस्त्र इत्यादि का दान किया जाएगा। महापर्व पूरे देशभर में श्रद्धा भक्ति से विभिन्न प्रकार से मनाया जाता है। हिंदू पुराणों में वर्णित कथाओं के अनुसार मकर संक्रांति के दिन भगवान सूर्य देव अपने बेटे भगवान शनि देव के पास जाते हैं। उस समय शनि देव मकर राशि पर रहते हैं। शनि मकर राशि के देवता हैं। इसलिए इस दिन मकरसंक्रांति के रूप में मनाया जाता है। इस दिन जब कोई पिता अपने पुत्र से मिलने जाता है तो उसकी सारी समस्या दूर हो जाती हैं। आचार्य योगेश ने बताया कि महाभारत में भी वर्णित किया है कि भीष्म पितामह को इच्छा मृत्यु का वरदान प्राप्त था। युद्ध में जब वह शरसैय्या पर लेटे थे तब वह अपने प्राण त्यागने के लिए सूर्य देव के उत्तरायण होने का इंतजार कर रहे थे, क्योंकि मान्यता है कि सूर्य के उत्तरायण होने पर प्राण त्यागने से मोक्ष की प्राप्ति होगी।