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Siddharthnagar News: पहले बाढ़ ने मारा, अब सूखे का सता रहा डर

Mon, 24 Jul 2023 11:02 PM IST
Gorakhpur Bureau गोरखपुर ब्यूरो
Updated Mon, 24 Jul 2023 11:02 PM IST
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First flood hit, now fear of drought
जिले में सामान्य से कम हुई 35 प्रतिशत बारिश, सूखे जैसे बने हालात, किसानों को सता रही चिंता
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संवाद न्यूज एजेंसी

सिद्धार्थनगर। पिछले साल आए बाढ़ से छह सौ से अधिक गांवों के 60 हजार हेक्टेयर क्षेत्रफल की धान की फसल नष्ट हो गई थी। वहीं इस वर्ष किसान सूखे की मार झेलते नजर आ रहे है। वर्तमान में लगभग 70 प्रतिशत किसान रोपाई करके फसल की सिंचाई के लिए परेशान हैं। वहीं 30 प्रतिशत किसान रोपाई के लिए बारिश के इंतजार में हैं। पिछले वर्ष की तुलना में जुलाई माह तक 35 प्रतिशत बारिश कम होने से खेत में रोपी गई फसल सूखने लगी है। हाल यह है कि पिछले वर्ष बाढ़ की मार से त्रस्त किसान जमापूंजी खर्च कर खेत में रोपी गई फसल की महंगे कीमत पर सिंचाई नहीं कर पाने से मन मसोस कर बारिश के इंतजार में आसमान की तरफ निहारते नजर आ रहे हैं।

नेपाल बाॅर्डर से सटे होने के कारण जनपद के गिनती प्रदेश के तराई क्षेत्र में की जाती है। यहां की 80 प्रतिशत आबादी खेती पर आश्रित है। उनके जीविका का मुख्य साधन खेती है। इसी पर पढ़ाई, लिखाई और दवाई सभी निर्भर है। जिले में किसान मुख्य रूप से दो फसल लगाते हैं। इसमें खरीफ के सीजन में धान और रवि के सीजन में गेहूं की खेती करते हैं। जिले में 1.50 लाख हेक्टेयर भूमि पर धान की खेती होती है। खेती के में संसाधन के नाम पर सिंचाई के लिए नहरें तो हैं, लेकिन समय पर बेपानी रहती है। गिने चुने क्षेत्र में ट्यूबवेल लगा हुआ है। किसानों को उसका भी लाभ कम मिलता है। जनपद नेपाल सीमा से सटा होने के कारण पहाड़ पर भारी बारिश के बाद जिले में हालात बिगड़ जाते हैं और नेपाल से आने वाले पानी से बाढ़ की स्थिति उत्पन्न हो जाती है। इसमें जिले के 80 प्रतिशत हिस्सा बाढ़ की चपेट में रहता है। जिससे फसल पूरी तरह चौपट हो जाती है। मौजूदा समय में सूखे का आसार दिखने लगा है, जो किसान धान की रोपाई कर चुके हैं। वह भी परेशान हैं और जो रोपाई नहीं किए हैं वह भी परेशान है। हर साल आने वाली इन आपदाओं से निपटने के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाया जाता है। जिससे किसान बर्बाद हो रहे हैं। फसल क्षति की भरपाई के लिए मुआवजा का नियम तो है, लेकिन वह भी जख्म पर मरहम जैसा मिलता है। समय पर सर्वे नहीं हुआ तो किसान उससे भी वंचित रह जाते हैं। जैसा की पूर्व में किसानों के साथ हो चुका है।
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नियम के जंजाल में नहीं मिल पाती है मुआवजा राशि
खेती करने वाला किसान फसल का बीमा तो करवा लेता है, लेकिन मुआवजा मिल जाए। इसकी कोई गारंटी नहीं है। कारण ओलावृष्टि, बेमौसम बारिश में अगर फसल की क्षति हुई तो किसानों को 72 घंटे में जानकारी देने के लिए कह दिया जाता है। इसमें अधिकांश किसानों को जानकारी ही नहीं हो पाता है। वह इस इंतजार में रहते हैं कि लेखपाल और बीमा कंपनी वाले सर्वे के लिए आएंगे, तब तक देर हो जाती है। वहीं किसान समय से अगर जानकारी भी दे देता है तो तीन सदस्यीय टीम गठित करने और मौके पर जाकर देखने में 72 घंटे से अधिक वक्त गुजर जाता है। इसमें फसल क्षति का सही आकलन नहीं हो पाता है और किसान योजना से वंचित हो जाते हैं। कहीं-कहीं तो जानते हुए भी क्षति का प्रतिशत कम कर दिया जाता है। जिससे लाभ नहीं मिल पाता है।
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बीमा करने वाले इतने किसानों को मिला था मुआवजा

आंकड़ों के मुताबिक वर्ष 2022 में खरीफ सीजन में 38378 किसानों से 10 करोड़ रुपये फसल बीमा प्रीमियम में रूप में जमा करवाया गया था। 25 हजार हेक्टेयर रकबे पर बीमा हुआ था। बाढ़ और अन्य आपदा में 17063 किसानों को 36.39 करोड़ रुपये मुआवजा बीमा कंपनी की ओर दिया गया है। जबकि बड़ी संख्या में आज भी बाढ़ पीड़ित किसान मुआवजा के लिए परेशान हैं। वहीं, रबी फसल के सीजन में 37212 किसानों ने फसल बीमा करवाया था। लगभग नौ करोड़ रुपये बीमा प्रीमियन कंपनी ने जमा कराया था। इसमें गेहूं की फसल के नुकसान पर शिकायत करने पर 192 किसानों को मुआवजा देने की प्रक्रिया शुरू हुई है।

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नीति बनाने में झोल

कृषि विभाग से जुड़े लोगों के मुताबिक अगर धान की फसल सौ प्रतिशत नुकसान

हो जाए तो उस पर लगभग 64 हजार रुपये प्रति हेक्टेयर मुआवजा राशि तय की गई

है। उससे कम नुकसान होने पर धनराशि कम हो जाती है। जो मुआवजा राशि दी

जाती है, वह जख्म भरने जैसा है। जो किसानों के लिए बहुत ही कम है।

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नुकसान 1.60 लाख रुपये का, मुआवजा मात्रा 60 हजार

एक हेक्टेयर धान की फसल लगाने में किसानों का 40 हजार रुपये खर्च होता है।

एक हेक्टेयर पर खर्च होने वाली राशि।

सामग्री मात्रा धनराशि

जुताई तीन बार 1100
एक बीघा रोपाई 1400
यूरिया तीन बोरी 900
डीएपी तीन बोरी 4200
दवा परवार की दो फाइल 1200
सिंचाई तीन बार 11000
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बाढ़ मेें नष्ट हुई फसल, मुआवजा अब तक नहीं मिला

बैंक से केसीसी बना हुआ है। हर वर्ष फसल का बीमा भी होता है। लेकिन बीते वर्ष आई बाढ़ में फसल का नुकसान हो गया। अभी तक बीमा कंपनी की ओर से ओर

से मुआवजा नहीं मिला।

महेंद्र कुमार श्रीवास्तव, किसान एहतमाली
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बीते वर्ष अक्तबूर माह में आई बाढ़ में कई दिनों तक पानी भरा हुआ था, इसमें धान की फसल पूरी तरह से नष्ट हो गई थी। सर्वे भी हुआ, लेकिन आज तक मुआवजा नहीं मिला।


राजीव कुमार, किसान बुढि़या टायर डुमरियागंज
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बोले जिम्मेदार

किसानों का फसल बीमा होता है तो उसका उन्हें लाभ मिलता है। फसल का नुकसान होने पर बीमा कंपनी, राजस्व और कृषि विभाग की टीम सर्वे करती है। नुकसान के अनुसार मुआवजा राशि किसानों मिलता है। बीते वर्ष आई बाढ़ से प्रभावित किसानों को मुआवजा राशि मिला है।

मुहम्मद मुज्जमिल, जिला कृषि अधिकारी
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