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‘मंडी के महाजाल’ में बिखर गए किसान के सपने
ब्यूरो/अमर उजाला सिद्धार्थनगर
Updated Thu, 09 Nov 2017 10:54 PM IST
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लोहिया कला भवन में नाटक का शुभारंभ करते सांसद, डीएम और एसपी।
- फोटो : अमर उजाला
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सिद्धार्थनगर। लोहिया कला भवन में चल रहे सात दिवसीय नवोन्मेष नाट्य उत्सव का समापन गुरुवार को हुआ। जिले के कलाकारों ने रणविजय सिंह सत्यकेतू की रचना ‘मंडी का महाजाल’ का सजीव मंचन किया। भारतीय अर्थ व्यवस्था की रीढ़ कृषि पर आधारित कहानी का नाट्य रुपांतरण शैलेश कुमार श्रीवास्तव ने किया है।
मंडी का महाजाल में दर्शाया गया है कि खेत में किसान केवल फसल ही नहीं उगाता, अनाज के साथ उसके व परिवार के सपने व भविष्य भी उगते हैं, मगर जब किसान को फसल का उचित व वास्तविक मूल्य नहीं मिलता है तो धीरे-धीरे सपने टूटने लगते हैं। नाटक के केंद्रीय पात्र अवधपाल व अंसारगियां की कमोवेश यहीं स्थिति होती है। दोनों ने बड़े जतन से खेती किया। अच्छी पैदावार की आस में किस्त पर ट्रैक्टर भी ले आए। फसल अच्छी भी हुई। पुत्री महुआ का रिश्ता भी तय कर दिया। पुत्र रम्मन ने माता-पिता को सलाह दिया कि फसल को बिचौलिए के बजाय सीधे मंडी में बेचा जाए।
इस फैसले के साथ वह मंडी पहुंचते हैं, लेकिन वहां की अव्यवस्था में फंसकर रह जाते हैं। दलालों व बिचौलियों से भरी मंडी की अव्यवस्थाओं में पड़कर उनका अनाज बरसात में भींग जाता है। इस सदमे से अवधपाल आत्महत्या कर लेता है और अंसार अपना होश खो बैठता है। नाटक में जुमर मुस्ताक, कुंवर तेजभान सिंह, अंजली सिंह, योगेश्वर चतुर्वेदी, दिलीप सिंह, मो.आशिफ खान, मिथिलेश यादव, हरमेंद्र सरताज ने अहम भूमिका निभाई। समापन अवसर पर कार्यक्रम में विशेष योगदान देने वालों को सम्मानित किया गया है। इस मौके पर सांसद जगदंबिका पाल, डीएम कुणाल सिल्कू, एसपी डॉ.धर्मवीर सिंह आदि मौजूद रहे। संचालन नवोन्मेष के विजित सिंह ने किया।
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मंडी का महाजाल में दर्शाया गया है कि खेत में किसान केवल फसल ही नहीं उगाता, अनाज के साथ उसके व परिवार के सपने व भविष्य भी उगते हैं, मगर जब किसान को फसल का उचित व वास्तविक मूल्य नहीं मिलता है तो धीरे-धीरे सपने टूटने लगते हैं। नाटक के केंद्रीय पात्र अवधपाल व अंसारगियां की कमोवेश यहीं स्थिति होती है। दोनों ने बड़े जतन से खेती किया। अच्छी पैदावार की आस में किस्त पर ट्रैक्टर भी ले आए। फसल अच्छी भी हुई। पुत्री महुआ का रिश्ता भी तय कर दिया। पुत्र रम्मन ने माता-पिता को सलाह दिया कि फसल को बिचौलिए के बजाय सीधे मंडी में बेचा जाए।
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इस फैसले के साथ वह मंडी पहुंचते हैं, लेकिन वहां की अव्यवस्था में फंसकर रह जाते हैं। दलालों व बिचौलियों से भरी मंडी की अव्यवस्थाओं में पड़कर उनका अनाज बरसात में भींग जाता है। इस सदमे से अवधपाल आत्महत्या कर लेता है और अंसार अपना होश खो बैठता है। नाटक में जुमर मुस्ताक, कुंवर तेजभान सिंह, अंजली सिंह, योगेश्वर चतुर्वेदी, दिलीप सिंह, मो.आशिफ खान, मिथिलेश यादव, हरमेंद्र सरताज ने अहम भूमिका निभाई। समापन अवसर पर कार्यक्रम में विशेष योगदान देने वालों को सम्मानित किया गया है। इस मौके पर सांसद जगदंबिका पाल, डीएम कुणाल सिल्कू, एसपी डॉ.धर्मवीर सिंह आदि मौजूद रहे। संचालन नवोन्मेष के विजित सिंह ने किया।
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