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जल संरक्षण का सपना दूर, तालाब व पोखरों पर कब्जा 17-03-00

Sun, 08 Dec 2019 10:15 PM IST
Gorakhpur Bureau गोरखपुर ब्यूरो
Updated Sun, 08 Dec 2019 10:15 PM IST
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encroachment on ponds
लोटन क्षेत्र के तालाब - फोटो : SIDDHARTHNAGAR
तेजी से पाटे जा रहे ताल और पोखरे
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घटता जा रहा रकबा, आबादी से सटे 70 प्रतिशत पोखरे विलुप्त होने के कगार पर
शासन की ओर से एंटी भू-माफिया के तहत नहीं हो पा रही है कार्रवाई
कागज में जिले में हैं 3368 तालाब और पोखरे
अमर उजाला ब्यूरो
सिद्धार्थनगर। जल संकट से निपटने और जल संरक्षण को बढ़ावा देने के लिए सरकार लोगों को जागरूक कर रही है। साथ ही तालाब और पोखरों को सुरक्षित करने की बात कर रही है। मगर जिले में जमीनी हकीकत इससे परे है। जिले में सरकारी अभिलेखों में 3368 तालाब व पोखरे दर्ज हैं। मगर यहां आबादी से सटे 70 प्रतिशत से अधिक तालाब और पोखरे कब्जे की गिरफ्त में हैं। आएदिन लोग तालाब और पोखरों को पाट रहे हैं, जिससे उनका अस्तित्व मिटता जा रहा है और रकबा सिमटा जा रहा है। मगर प्रशासनिक अमले की नजर नहीं कब्जेदारों तक नहीं पहुंच रही और न ही कब्जा करने वालों पर कार्रवाई हो रही है।
जल संरक्षण को बढ़ावा देने और जल संकट से निपटने के लिए दशकों पूर्व ग्रामीण व नगरीय क्षेत्रों में तालाब व पोखरे को खोदे गए थे, जिससे किसानों को खेत की सिंचाई करने के साथ-साथ भू-जलस्तर बना रहे। प्रशासन की ओर से तालाब व पोखरों को सरकारी दस्तावेज में भी दर्ज किया गया। साथ ही जल संरक्षण के लिए उनकी सिल्ट सफाई करने के साथ ही तालाबों के सुंदरीकरण करके उसे जल संचय योग्य बनाने के लिए हर वर्ष लाखों रुपये उनपर खर्च किए जा रहे हैं। कब्जे का हाल है यह जिले में आबादी से सटे 70 प्रतिशत से अधिक तालाब व पोखरे कब्जे की गिरफ्त में हैं। तालाबों पर भवन खड़े हो रहे हैं तो बाउंड्री की गिरफ्त में भी लिया जा रहा है। मगर जिम्मेदारों की नजर इन कब्जेदारों तक नहीं पहुंच रही है। अगर जल्द प्रशासन की ओर से इस पर कठोर कदम नहीं उठाया गया तो वह दिन दूर नहीं जब, खोजे तालाब और गड्ढे नजर नहीं आएंगे। इस संबंध में एडीएम सीताराम गुप्ता ने कहा कि सरकारी भूमि पर कब्जा करने वालों पर प्रशासन की ओर से लगातार कार्रवाई की जा रही है। जहां से भी शिकायत प्राप्त होती है। राजस्व की टीम मौके पर जाकर नाप करने के बाद खाली करवाती है। कब्जेदारों पर कार्रवाई तेज की जाएगी।
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हर गांव में तेजी से हो रहा कब्जा
इन दिनों जिले के लगभग अधिकांश गांवों में आबादी से सटे तालाब और पोखरों में पराली और मिट्टी गिराकर पाटी जा रही है। भू-माफिया उन्हें अपने कब्जे में करने के लिए विवाद करने से भी नहीं चूक रहे हैं।
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तहसील समाधान व थाना समाधान दिवस में राजस्व के मामले बढ़े
थाना व तहसील में आयोजित होने वाले समाधान दिवसों में अधिकांश मामले राजस्व के पहुंच रहे हैं। इसमें तालाब और पोखरों को पाटकर कब्जा करने की शिकायतें अधिक रहती हैं। इन दिवसों में भूमि से जुड़े मामलों की बाढ़ सी आ गई है।
एंटी भू-माफिया कार्रवाई की रफ्तार थमी
सूबे में योगी सरकार सत्ता में आने के भू-माफिया पर प्रभावी कार्रवाई करने के लिए एंटी भू-माफिया अभियान के तहत सरकारी भूमि, तालाब, ग्राम समाज और खाद गड्ढा, नवीन परती की जमीन पर हुए कब्जे को हटवाने की कवायद शुरू हुई। मगर समय के साथ रफ्तार थम गई। शुरू में जिले में भी कुछ बड़े चेहरों पर कार्रवाई की गई, लेकिन इसके बाद कार्रवाई की रफ्तार ठप हो गई।
सरकारी आंकड़े
सरकारी आंकड़ों पर नजर डालें तो जिले में 1199 ग्राम पंचायतें हैं। इन ग्राम पंचायतों में 3368 तालाब और पोखरे सरकारी अभिलेख में दर्ज हैं। मगर इनमें अधिकांश कब्जे हैं। वहीं, कुछ केवल सरकारी अभिलेख तक रह गए हैं। उनको पाटकर मकान बना लिया गया है।

लेखपालों की है रोकने की जिम्मेदारी
ग्रामीण व शहरी क्षेत्रों में बने तालाब और पोखरों की निगरानी की जिम्मेदारी हलके के लेखपाल के जिम्मे होती है। अगर कोई व्यक्ति कब्जा करता है तो उसे रोकने की जिम्मेदारी लेखपाल की है। मगर रोकने की बात तो दूर वह अपनी जान बचाने के लिए प्रशासन को सूचना तक नहीं दे रहे हैं।
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