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जलस्तर में उतार-चढ़ाव से नदियों के किनारे कटान तेज
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जलस्तर में उतार-चढ़ाव से नदियों के किनारे कटान तेज
सिद्घार्थनगर। राप्ती और बूढ़ी राप्ती समेत जिले की विभिन्न नदियों के जलस्तर में उतार-चढ़ाव से हो रही कटान से किनारे बसे गांव के लोग डरे हुए हैं। बृहस्पतिवार को बूढ़ी राप्ती का जलस्तर घट रहा था तो राप्ती का जलस्तर बढ़ने लगा।
बारिश के मौसम में जिले की नदियों के जलस्तर में बढ़ोतरी होने और फिर घटने के दौरान नदियों के किनारे कटान तेज हो जाती है। इससे कई गांवों के अस्तित्व पर खतरा मंडराने लगा है। कटान से भयभीत जोगिया क्षेत्र के फत्तेपुर, उसका के हथिवड़ताल निवासी रामसुभग, कमलेश और जयराम का कहना है कि नदियों के जलस्तर घटने और बढ़ने के दौरान कटान होने से कृषि योग्य भूमि एवं मकान नदी में विलीन हो जाते हैं।
एक तरफ बाढ़ और दूसरी तरफ कटान से ग्रामीणों की बहुत सांसत हो रही है। भनवापुर ब्लॉक क्षेत्र के परसोहिया सदानंद गांव के पास हो रही कटान से अब तक किसानों का 25 बीघा से अधिक भूमि नदी में विलीन हो चुकी है। अधिकारी समस्या के निदान में कोई रुचि नहीं ले रहे।
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सिद्घार्थनगर। राप्ती और बूढ़ी राप्ती समेत जिले की विभिन्न नदियों के जलस्तर में उतार-चढ़ाव से हो रही कटान से किनारे बसे गांव के लोग डरे हुए हैं। बृहस्पतिवार को बूढ़ी राप्ती का जलस्तर घट रहा था तो राप्ती का जलस्तर बढ़ने लगा।
बारिश के मौसम में जिले की नदियों के जलस्तर में बढ़ोतरी होने और फिर घटने के दौरान नदियों के किनारे कटान तेज हो जाती है। इससे कई गांवों के अस्तित्व पर खतरा मंडराने लगा है। कटान से भयभीत जोगिया क्षेत्र के फत्तेपुर, उसका के हथिवड़ताल निवासी रामसुभग, कमलेश और जयराम का कहना है कि नदियों के जलस्तर घटने और बढ़ने के दौरान कटान होने से कृषि योग्य भूमि एवं मकान नदी में विलीन हो जाते हैं।
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एक तरफ बाढ़ और दूसरी तरफ कटान से ग्रामीणों की बहुत सांसत हो रही है। भनवापुर ब्लॉक क्षेत्र के परसोहिया सदानंद गांव के पास हो रही कटान से अब तक किसानों का 25 बीघा से अधिक भूमि नदी में विलीन हो चुकी है। अधिकारी समस्या के निदान में कोई रुचि नहीं ले रहे।
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