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जिला अस्पताल में छापा, 8 संदिग्ध पकड़े
ब्यूरो/अमर उजाला सिद्धार्थनगर
Updated Tue, 23 May 2017 10:33 PM IST
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अस्पताल
- फोटो : अमर उजाला
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सिद्धार्थनगर। जिला अस्पताल दलालों के चंगुल में है। डॉक्टरों के कक्ष के इर्द-गिर्द मंडराने वाले दलाल मरीजों को झांसा देकर फांस रहे हैं। कमीशन के फेर में उन्हें प्रश्रय दिया जा रहा है। मंगलवार को इसका पर्दाफाश तब हुआ, जब सदर पुलिस ने अस्पताल में औचक छापेमारी की। मौके से आठ संदिग्ध पकड़े गए। उनके पास से कई पर्चियां, सादे कागज पर लिखी दवाएं व अन्य सामान बरामद हुए। पुलिस उन्हें हिरासत में लेकर थाने ले आई। देर शाम तक उनसे पूछताछ होती रही। केस दर्ज करने के लिए पुलिस सीएमएस की तहरीर का इंतजार करती रही, लेकिन अस्पताल प्रशासन लिखित रूप से कुछ भी देने को तैयार नहीं था। लिहाजा देर शाम तक मामले में केस दर्ज नहीं हो पाया था।
जिला अस्पताल में दलालों की सक्रियता की शिकायत लगातार मिलती रही है। अस्पताल के आस-पास दुकान चलाने वाले कई लोग मेडिकल स्टोर से सांठ-गांठ के चलते मरीजों को चंगुल में फांसते हैं। डॉक्टर से मनमाफिक दवा लिखवाकर चुनिंदा मेडिकल स्टोर तक पहुंचाते हैं। इसके बदले उन्हें मोटा कमीशन भी प्राप्त होता है। कमीशन के इस खेल में अस्पताल के कई चिकित्सक व कर्मचारियों की भी मौन सहमति रहती है। दलालों के चलते आए दिन मरीजों से नोकझोंक व आपस में मारपीट के मामले भी सामने आते रहे हैं।
दो दिन पहले सीएमएस ने खुद पुलिस को पत्र लिखकर अस्पताल में दलालों की सक्रियता पर अंकुश लगाने को कहा था। मंगलवार को सदर पुलिस दोपहर में अचानक अस्पताल में धमक पड़ी। डॉक्टरों के कक्ष के इर्द-गिर्द घुमते कई संदिग्धों को पकड़ा। पूछताछ व तलाशी ली गई तो उनके पास से कई मरीजों की पर्चियां व सादे कागज पर लिखी दवाओं की पर्ची सहित अन्य कई सामग्री बरामद हुई। एक संदिग्ध के पास से मिली पर्ची पर तो बकायदा एक दुकान से दिसंबर माह में लिखी गई दवाओं और उनके कमीशन का हिसाब भी अंकित था। पुलिस सभी सामान जब्त करते हुए संदिग्धों को थाने ले आई। पूछताछ में उन्होंने खुद को मरीज बताया, मगर एक साथ कई पर्चियां होने का उनके पास कोई जवाब नहीं था। बताते हैं कि पकड़े गए कई चेहरे ऐसे हैं, जो पहले भी इस कार्य में हिरासत में लिए जा चुके हैं। बहरहाल, देर शाम तक पुलिस मामले की छानबीन करती रही।
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इस संबंध में सदर एसओ शिवाकांत मिश्र का कहना था कि आठ संदिग्धों को जिला अस्पताल परिसर से हिरासत में लिया गया है। उनकी भूमिका की पड़ताल की जा रही है। मामला अस्पताल परिसर का है, लिहाजा सीएमएस से पत्र मिलने का इंतजार है। अगर कोई तहरीर देती हैं तो छानबीन कर समुचित कार्रवाई की जाएगी। उधर, सीएमएस डॉ.रोचस्मति पांडेय ने माना कि अस्पताल में दलाल घूमते रहते हैं, जिसके चलते मरीजों को सरकारी योजनाओं का लाभ नहीं मिल पाता। दलालों पर कार्रवाई के लिए उन्होंने पुलिस को कहा था। हालांकि पकड़े गए संदिग्धों पर कार्रवाई के लिए लिखित पत्र देने के सवाल पर वह टाल गई। उनका कहना था कि फिलहाल कोई तहरीर नहीं दी गई है।
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जिला अस्पताल में दलालों की सक्रियता की शिकायत लगातार मिलती रही है। अस्पताल के आस-पास दुकान चलाने वाले कई लोग मेडिकल स्टोर से सांठ-गांठ के चलते मरीजों को चंगुल में फांसते हैं। डॉक्टर से मनमाफिक दवा लिखवाकर चुनिंदा मेडिकल स्टोर तक पहुंचाते हैं। इसके बदले उन्हें मोटा कमीशन भी प्राप्त होता है। कमीशन के इस खेल में अस्पताल के कई चिकित्सक व कर्मचारियों की भी मौन सहमति रहती है। दलालों के चलते आए दिन मरीजों से नोकझोंक व आपस में मारपीट के मामले भी सामने आते रहे हैं।
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दो दिन पहले सीएमएस ने खुद पुलिस को पत्र लिखकर अस्पताल में दलालों की सक्रियता पर अंकुश लगाने को कहा था। मंगलवार को सदर पुलिस दोपहर में अचानक अस्पताल में धमक पड़ी। डॉक्टरों के कक्ष के इर्द-गिर्द घुमते कई संदिग्धों को पकड़ा। पूछताछ व तलाशी ली गई तो उनके पास से कई मरीजों की पर्चियां व सादे कागज पर लिखी दवाओं की पर्ची सहित अन्य कई सामग्री बरामद हुई। एक संदिग्ध के पास से मिली पर्ची पर तो बकायदा एक दुकान से दिसंबर माह में लिखी गई दवाओं और उनके कमीशन का हिसाब भी अंकित था। पुलिस सभी सामान जब्त करते हुए संदिग्धों को थाने ले आई। पूछताछ में उन्होंने खुद को मरीज बताया, मगर एक साथ कई पर्चियां होने का उनके पास कोई जवाब नहीं था। बताते हैं कि पकड़े गए कई चेहरे ऐसे हैं, जो पहले भी इस कार्य में हिरासत में लिए जा चुके हैं। बहरहाल, देर शाम तक पुलिस मामले की छानबीन करती रही।
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इस संबंध में सदर एसओ शिवाकांत मिश्र का कहना था कि आठ संदिग्धों को जिला अस्पताल परिसर से हिरासत में लिया गया है। उनकी भूमिका की पड़ताल की जा रही है। मामला अस्पताल परिसर का है, लिहाजा सीएमएस से पत्र मिलने का इंतजार है। अगर कोई तहरीर देती हैं तो छानबीन कर समुचित कार्रवाई की जाएगी। उधर, सीएमएस डॉ.रोचस्मति पांडेय ने माना कि अस्पताल में दलाल घूमते रहते हैं, जिसके चलते मरीजों को सरकारी योजनाओं का लाभ नहीं मिल पाता। दलालों पर कार्रवाई के लिए उन्होंने पुलिस को कहा था। हालांकि पकड़े गए संदिग्धों पर कार्रवाई के लिए लिखित पत्र देने के सवाल पर वह टाल गई। उनका कहना था कि फिलहाल कोई तहरीर नहीं दी गई है।