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मौन रहकर श्रद्धालुओं ने डुबकी लगाई
अमर उजाला ब्यूरो/सिद्धार्थनगर
Updated Mon, 08 Feb 2016 11:14 PM IST
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स्नान-दान के महापर्व मौनी अमावस्या पर सोमवार को हजारों श्रद्धालुओं ने आस्था की डुबकी लगाई। राप्ती, बूढ़ी राप्ती नदी में स्नान कर लोगों ने मोक्ष की कामना की। दान दिया और पूजन-अर्चन किया।
तटों पर पूरे दिन यह क्रम चलता रहा। कई स्थानों पर मेले भी आयोजित हुए। बड़ी संख्या में लोग संगम स्नान के लिए रविवार को ही इलाहाबाद रवाना हो गए।
माघ माह के कृष्ण पक्ष की अमावस्या को नदी, तालाब में स्नान-दान का विशेष महत्व है। मान्यता है कि इस दिन मौन रहकर स्नान-दान से पाप कर्म नष्ट होते हैं। पुण्य फल में वृद्धि के साथ मोक्ष की प्राप्ति होती है।
सोमवार की अलसुबह से ही नदी तटों पर स्नान के लिए श्रद्धालुओं की भीड़ जुटी रही। आस्था के सागर में डुबकी लगाकर महिलाओं-पुरुषों ने पुण्य की कामना की। नगर के जमुआर नाले में भी बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने स्नान किया। जोगिया में ककरही घाट पर भी बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं की भीड़ लगी रही।
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तटों पर पूरे दिन यह क्रम चलता रहा। कई स्थानों पर मेले भी आयोजित हुए। बड़ी संख्या में लोग संगम स्नान के लिए रविवार को ही इलाहाबाद रवाना हो गए।
माघ माह के कृष्ण पक्ष की अमावस्या को नदी, तालाब में स्नान-दान का विशेष महत्व है। मान्यता है कि इस दिन मौन रहकर स्नान-दान से पाप कर्म नष्ट होते हैं। पुण्य फल में वृद्धि के साथ मोक्ष की प्राप्ति होती है।
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सोमवार की अलसुबह से ही नदी तटों पर स्नान के लिए श्रद्धालुओं की भीड़ जुटी रही। आस्था के सागर में डुबकी लगाकर महिलाओं-पुरुषों ने पुण्य की कामना की। नगर के जमुआर नाले में भी बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने स्नान किया। जोगिया में ककरही घाट पर भी बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं की भीड़ लगी रही।
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