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छठः महंगाई से औपचारिकता बरत रहे श्रद्धालु
अमर उजाला ब्यूरो/ सिद्धार्थनगर
Updated Mon, 16 Nov 2015 11:17 PM IST
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लोकआस्था के महापर्व छठ पर सूखे और महंगाई का भरपूर असर देखा जा रहा है। क्रय शक्ति घटने और सामान के रेट बढ़ने से पूजा की दौरी आधी खाली रह गई है। खरीदारी को पहुंचे लोग औपचारिकता निभाते नजर आए।
उनकी कोशिश यही थी कि निर्धारित बजट में ही पूरी सामग्री हो जाए, भले ही मात्रा कम क्यों न करनी पड़ी। महंगाई के असर से दुकानदारों में भी निराशा नजर आई।
जिले की 70 फीसदी आबादी खेती पर ही निर्भर है। समय पर वर्षा न होने से इस बार धान की फसल बुरी तरह प्रभावित हुई है। इससे पहले गेहूं की फसल पर भी मौसम की करारी मार पड़ी थी। लिहाजा खेतिहर वर्ग के लिए जीवन-यापन मुश्किल भरा हो गया है। दूसरी ओर महंगाई का ग्राफ लगातार तेजी से बढ़ रहा है।
पिछले वर्ष की अपेक्षा सभी सामानों के दाम में वृद्धि हुई है। ऐसे में लोग पर्व मनाने के नाम पर औपचारिकता निभाने में ज्यादा रुझान दिखा रहे हैं।
पूजन सामग्री खरीदने आई कस्बे की सुमन देवी, शकुंतला ने बताया कि महंगाई का भारी असर है। रोजमर्रा की वस्तुएं खरीदने में ही जेब खाली हो जा रही है। ऐसे में त्योहार मनाना मुश्किल होता जा रहा है। संतोष का कहना था कि पूजन सामान में कटौती करनी पड़ी है। कोशिश यही है कि मात्रा भले कम हो जाए, मगर कोई सामग्री न छूटे।
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दुश्वारियों के बीच होगी छठ पूजाः शोहरतगढ़।
नगर पंचायत में स्थित शिवबाबा घाट को सुंदर बनाने के कार्य की रफ्तार सुस्त होने के कारण छठ व्रतधारियों को पूजा अर्चना करने में इस वर्ष कठिनाई का सामना करना पड़ेगा। नगर पंचायत प्रशासन ने अगस्त माह में ही घाट के सुंदरीकरण कार्य का ठेका कराया था।
चार माह के भीतर घाट पर आधा कार्य भी नहीं हुआ है। घाट में पानी न होने के कारण व्रतधारियों को इस बार छठ पर्व दूसरे घाट पर जाकर मनाना पड़ेगा। कस्बे के लोगों ने समस्या का कारण ठेकेदार और नगर पंचायत प्रशासन की लापरवाही बताई।
कस्बे के नंदू गौड़ ने बताया कि हर बार हम लोग शिवबाबा घाट पर ही छठ पर्व मनाते थे, लेकिन इस बार घाट पर सुंदरीकरण का कार्य के चलते हम लोगों को दूसरे गांव के घाट पर जाकर पर्व मनाना पड़ेगा।
दो करोड़ की लागत से घाट के सुंदरीकरण का कार्य की रफ्तार इतनी सुस्त होने के कारण हम लोगों को समस्या झेलनी पड़ रही है। कस्बे के ही सतीश मित्तल, नवीन मित्तल, शिवप्रसाद वर्मा, कृष्ण कुमार अग्रवाल ने कहा कि नगर पंचायत प्रशासन अगर कार्य को लेकर पहले से संजीदा रहता तो हम लोगों को आज ये समस्या नहीं उठानी पड़ती।
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उनकी कोशिश यही थी कि निर्धारित बजट में ही पूरी सामग्री हो जाए, भले ही मात्रा कम क्यों न करनी पड़ी। महंगाई के असर से दुकानदारों में भी निराशा नजर आई।
जिले की 70 फीसदी आबादी खेती पर ही निर्भर है। समय पर वर्षा न होने से इस बार धान की फसल बुरी तरह प्रभावित हुई है। इससे पहले गेहूं की फसल पर भी मौसम की करारी मार पड़ी थी। लिहाजा खेतिहर वर्ग के लिए जीवन-यापन मुश्किल भरा हो गया है। दूसरी ओर महंगाई का ग्राफ लगातार तेजी से बढ़ रहा है।
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पिछले वर्ष की अपेक्षा सभी सामानों के दाम में वृद्धि हुई है। ऐसे में लोग पर्व मनाने के नाम पर औपचारिकता निभाने में ज्यादा रुझान दिखा रहे हैं।
पूजन सामग्री खरीदने आई कस्बे की सुमन देवी, शकुंतला ने बताया कि महंगाई का भारी असर है। रोजमर्रा की वस्तुएं खरीदने में ही जेब खाली हो जा रही है। ऐसे में त्योहार मनाना मुश्किल होता जा रहा है। संतोष का कहना था कि पूजन सामान में कटौती करनी पड़ी है। कोशिश यही है कि मात्रा भले कम हो जाए, मगर कोई सामग्री न छूटे।
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दुश्वारियों के बीच होगी छठ पूजाः शोहरतगढ़।
नगर पंचायत में स्थित शिवबाबा घाट को सुंदर बनाने के कार्य की रफ्तार सुस्त होने के कारण छठ व्रतधारियों को पूजा अर्चना करने में इस वर्ष कठिनाई का सामना करना पड़ेगा। नगर पंचायत प्रशासन ने अगस्त माह में ही घाट के सुंदरीकरण कार्य का ठेका कराया था।
चार माह के भीतर घाट पर आधा कार्य भी नहीं हुआ है। घाट में पानी न होने के कारण व्रतधारियों को इस बार छठ पर्व दूसरे घाट पर जाकर मनाना पड़ेगा। कस्बे के लोगों ने समस्या का कारण ठेकेदार और नगर पंचायत प्रशासन की लापरवाही बताई।
कस्बे के नंदू गौड़ ने बताया कि हर बार हम लोग शिवबाबा घाट पर ही छठ पर्व मनाते थे, लेकिन इस बार घाट पर सुंदरीकरण का कार्य के चलते हम लोगों को दूसरे गांव के घाट पर जाकर पर्व मनाना पड़ेगा।
दो करोड़ की लागत से घाट के सुंदरीकरण का कार्य की रफ्तार इतनी सुस्त होने के कारण हम लोगों को समस्या झेलनी पड़ रही है। कस्बे के ही सतीश मित्तल, नवीन मित्तल, शिवप्रसाद वर्मा, कृष्ण कुमार अग्रवाल ने कहा कि नगर पंचायत प्रशासन अगर कार्य को लेकर पहले से संजीदा रहता तो हम लोगों को आज ये समस्या नहीं उठानी पड़ती।