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सजा दरबार, लगेगी भक्तों की कतार
ब्यूरो/अमर उजाला सिद्धार्थनगर
Updated Fri, 30 Sep 2016 11:01 PM IST
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दुर्गा पूजा
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सिद्धार्थनगर। शक्ति की आराधना का विशेष काल नवरात्र शनिवार से आरंभ हो रहा है। इसकी तैयारियों में श्रद्धालु पूरी तरह तल्लीन रहे। पूजन सामग्रियों की खरीदारी होती रही तो फलाहार भी खूब बिका। पूरे दिन बाजारों में श्रद्धालुओं की भीड़ बनी रही। उधर, मंदिरों में भी नवरात्र उत्सव को लेकर खास इंतजाम किया जाता रहा। साफ-सफाई से लेकर श्रद्धालुओं को अन्य सुविधाएं उपलब्ध कराने में मंदिर समिति के लोग जुटे रहे।
शारदीय नवरात्र में मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की आराधना होती है। हर स्वरूप अपने आप में खास है। विशेष काल में मां की पूजा-अर्चना कर कृपा पाने के लिए भक्त लालायित रहते हैं। इसका असर शुक्रवार को खूब दिखा। नगर के सिंहेश्वरी मंदिर, जोगिया के योगमाया मंदिर, पल्टा देवी मंदिर, घोसवा की समय माता मंदिर सहित अन्य देवी मंदिरों में तैयारियां जोरों पर रही। साफ-सफाई के साथ साज-सज्जा में लोग जुटे रहे। दतरंगवा निवासी ज्योतिषाचार्य आचार्य इंद्रासन मिश्र ने बताया कि कई वर्षों बाद अबकी 10 दिवसीय नवरात्र मिला है।
इसका प्रारंभ एक अक्टूबर से होगा। यह नवरात्र मंगलमय फल देने का सूचक है। उन्होंने बताया कि नवरात्र व्रत की पूर्णाहुति 10 अक्टूबर को नवमी तिथि पर शाम 6 बजे तक रहेगी। श्रद्धालु वैदिक मंत्रों के साथ चंदन, अक्षत, गुड़हल पुष्प, धूप, दीप के साथ कलश स्थापित कर दुर्गा सप्तशती व चालीसा का पाठ करें।
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शारदीय नवरात्र में मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की आराधना होती है। हर स्वरूप अपने आप में खास है। विशेष काल में मां की पूजा-अर्चना कर कृपा पाने के लिए भक्त लालायित रहते हैं। इसका असर शुक्रवार को खूब दिखा। नगर के सिंहेश्वरी मंदिर, जोगिया के योगमाया मंदिर, पल्टा देवी मंदिर, घोसवा की समय माता मंदिर सहित अन्य देवी मंदिरों में तैयारियां जोरों पर रही। साफ-सफाई के साथ साज-सज्जा में लोग जुटे रहे। दतरंगवा निवासी ज्योतिषाचार्य आचार्य इंद्रासन मिश्र ने बताया कि कई वर्षों बाद अबकी 10 दिवसीय नवरात्र मिला है।
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इसका प्रारंभ एक अक्टूबर से होगा। यह नवरात्र मंगलमय फल देने का सूचक है। उन्होंने बताया कि नवरात्र व्रत की पूर्णाहुति 10 अक्टूबर को नवमी तिथि पर शाम 6 बजे तक रहेगी। श्रद्धालु वैदिक मंत्रों के साथ चंदन, अक्षत, गुड़हल पुष्प, धूप, दीप के साथ कलश स्थापित कर दुर्गा सप्तशती व चालीसा का पाठ करें।
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