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मतपेटी से मतपत्र अधिक निकलने पर हंगामा
अमर उजाला ब्यूरो/सिद्धार्थनगर
Updated Sun, 13 Dec 2015 11:20 PM IST
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प्रत्याशियों की किस्मत का फैसला करने के लिए रविवार को मतपेटी खुली तो कर्मचारियों के लापरवाही की कलई भी खुल गई।मतदान के दिन जितने वोट पडना दर्शाए गए थे, बॉक्स से उससे भी अधिक मतपत्र बाहर निकले।
इसे लेकर हंगामा हुआ और कुछ देर के लिए मतगणना भी प्रभावित हुई। मामला भनवापुर ब्लाक का है। विकासखंड के देवरिया चमन गांव की मतपेटी में रिकार्ड में दर्ज संख्या से 15 मतपत्र अधिक मिले। पड़ताल हुई तो पता चला सभी मतपत्र एक खास निशान के हैं, इन पर कोई क्रमांक अंकित नहीं था।
तत्काल इस गड़बड़ी को पकड़कर सूचना उच्चाधिकारियों को दी गई। स्टेटिक मजिस्ट्रेट परियोजना निदेशक प्रदीप पांडेय ने मौके पर पहुंचकर वस्तुस्थिति को जाना। बिना क्रमांक वाले सभी मतपत्र को कैंसल कर दिया गया। नतीजा यह हुआ कि संजू पांडेय 16 मतों से विजई घोषित हो गई, जबकि इससे पहले वह हार रही थीं। ऐसा ही मामला अंडुआ सनिचरा गांव का भी था।
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यहां मतपेटी से नौ मतपत्र अधिक मिले। इन पर भी क्रमांक नहीं था। इन्हें कैंसल कर सुखमता देवी को विजेता घोषित किया गया। विवादों के कारण इन ग्राम पंचायतों के गणना काउंटर पर तनाव की स्थिति बनी रही। परियोजना निदेशक प्रदीप पांडेय के मुताबिक मतदान कर्मचारियों के रिकार्ड बनाने में चूक के कारण ऐसी स्थिति बनी होगी। सभी पक्षों की सहमति से इसे दूर कर काउंटिंग की प्रक्रिया पूरी कराई गई।
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इसे लेकर हंगामा हुआ और कुछ देर के लिए मतगणना भी प्रभावित हुई। मामला भनवापुर ब्लाक का है। विकासखंड के देवरिया चमन गांव की मतपेटी में रिकार्ड में दर्ज संख्या से 15 मतपत्र अधिक मिले। पड़ताल हुई तो पता चला सभी मतपत्र एक खास निशान के हैं, इन पर कोई क्रमांक अंकित नहीं था।
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तत्काल इस गड़बड़ी को पकड़कर सूचना उच्चाधिकारियों को दी गई। स्टेटिक मजिस्ट्रेट परियोजना निदेशक प्रदीप पांडेय ने मौके पर पहुंचकर वस्तुस्थिति को जाना। बिना क्रमांक वाले सभी मतपत्र को कैंसल कर दिया गया। नतीजा यह हुआ कि संजू पांडेय 16 मतों से विजई घोषित हो गई, जबकि इससे पहले वह हार रही थीं। ऐसा ही मामला अंडुआ सनिचरा गांव का भी था।
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यहां मतपेटी से नौ मतपत्र अधिक मिले। इन पर भी क्रमांक नहीं था। इन्हें कैंसल कर सुखमता देवी को विजेता घोषित किया गया। विवादों के कारण इन ग्राम पंचायतों के गणना काउंटर पर तनाव की स्थिति बनी रही। परियोजना निदेशक प्रदीप पांडेय के मुताबिक मतदान कर्मचारियों के रिकार्ड बनाने में चूक के कारण ऐसी स्थिति बनी होगी। सभी पक्षों की सहमति से इसे दूर कर काउंटिंग की प्रक्रिया पूरी कराई गई।