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पैदल चलकर ठाणे से गांव पहुंचे सात लोग
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पैदल चलकर ठाणे से गांव पहुंचे सात लोग
जान बचाने के लिए महाराष्ट्र से निकल पड़े गांव
प्रधान को सूचना देकर गांव में हुए क्वारंटीन
अमर उजाला ब्यूरो
परसा। लॉकडाउन में भुखमरी का शिकार होने पर मुंबई से 12 अप्रैल को पैदल ही घर के लिए चल पड़े बढ़नी क्षेत्र के सात युवक सोमवार को अपने गांव पहुंचे। नौ दिन के सफर में इन लोगों ने ट्रक, बैलगाड़ी, ट्रैक्टर जो भी साधन मिला मिन्नत चिरौरी कर उनसे सफर किया लेकिन करीब 400 किलोमीटर का सफर पैदल भी तय करना पड़ा। ग्राम प्रधान के सहयोग से फिलहाल इन सातों लोगों को क्वारंटीन हाउस में रखा गया है।
लंबे सफर के बाद गांव पहुंचे इन लोगों ने बताया कि वह ठाणे (महाराष्ट्र) में दैनिक मजदूूरी का काम करते हैं। कोरोना के कई केस मिलने के कारण इस शहर को हॉटस्पॉट घोषित कर दिया गया, इससे उन लोगों की मुश्किलें बहुत बढ़ गईं। जीवन बचा रहे इसके लिए उस शहर को छोड़ने का फैसला लिया गया। एक युवक ने बताया कि 12 अप्रैल की रात जब सातों लोग ठाणे से निकले तो उन लोगों के पास खाने पीने के नाम पर कुछ बिस्किट, नमकीन और थोड़ा सा सत्तू, लावा ही था। सातों के पास कम रुपये थे। रास्ते में पुलिस न पकड़ ले इसलिए पहाड़ी रास्तों में सड़क किनारे जंगलों में चलते रहे। एक ट्रक ने लिफ्ट दी उससे राजस्थान के किसी शहर पहुंचे। यहां से फिर पैदल सफर किया। बीच में बैलगाड़ी, ट्रैक्टर-ट्रॉली, कंबाइन, जो भी मिला मदद मांगकर सवारी करते हुए बढ़ते रहे। शनिवार को यह लोग गोंडा के इथियाटोक पहुंचे। वहां पुलिस ने रोका और चिकित्सकों ने स्वास्थ्य परीक्षण किया। कई दिन बाद सबने भरपेट खाना खाया जो पुलिसकर्मियों ने दिया था। खाना खाने के बाद फिर सभी पैदल बढ़नी की ओर रवाना हो गए। सोमवार को तुलसियापुर चौराहे पहुंचे। यहां से उन्होंने अपने ग्राम प्रधान अबू बकर को सूचित किया। ग्राम प्रधान ने इसकी सूचना शोहरतगढ़ पुलिस और प्रशासन को दी। सभी की मेडिकल जांच के बाद उन्हें तुलसियापुर चौराहा स्थित क्वारंटीन हाउस में 14 दिन के लिए रखा गया।
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जान बचाने के लिए महाराष्ट्र से निकल पड़े गांव
प्रधान को सूचना देकर गांव में हुए क्वारंटीन
अमर उजाला ब्यूरो
परसा। लॉकडाउन में भुखमरी का शिकार होने पर मुंबई से 12 अप्रैल को पैदल ही घर के लिए चल पड़े बढ़नी क्षेत्र के सात युवक सोमवार को अपने गांव पहुंचे। नौ दिन के सफर में इन लोगों ने ट्रक, बैलगाड़ी, ट्रैक्टर जो भी साधन मिला मिन्नत चिरौरी कर उनसे सफर किया लेकिन करीब 400 किलोमीटर का सफर पैदल भी तय करना पड़ा। ग्राम प्रधान के सहयोग से फिलहाल इन सातों लोगों को क्वारंटीन हाउस में रखा गया है।
लंबे सफर के बाद गांव पहुंचे इन लोगों ने बताया कि वह ठाणे (महाराष्ट्र) में दैनिक मजदूूरी का काम करते हैं। कोरोना के कई केस मिलने के कारण इस शहर को हॉटस्पॉट घोषित कर दिया गया, इससे उन लोगों की मुश्किलें बहुत बढ़ गईं। जीवन बचा रहे इसके लिए उस शहर को छोड़ने का फैसला लिया गया। एक युवक ने बताया कि 12 अप्रैल की रात जब सातों लोग ठाणे से निकले तो उन लोगों के पास खाने पीने के नाम पर कुछ बिस्किट, नमकीन और थोड़ा सा सत्तू, लावा ही था। सातों के पास कम रुपये थे। रास्ते में पुलिस न पकड़ ले इसलिए पहाड़ी रास्तों में सड़क किनारे जंगलों में चलते रहे। एक ट्रक ने लिफ्ट दी उससे राजस्थान के किसी शहर पहुंचे। यहां से फिर पैदल सफर किया। बीच में बैलगाड़ी, ट्रैक्टर-ट्रॉली, कंबाइन, जो भी मिला मदद मांगकर सवारी करते हुए बढ़ते रहे। शनिवार को यह लोग गोंडा के इथियाटोक पहुंचे। वहां पुलिस ने रोका और चिकित्सकों ने स्वास्थ्य परीक्षण किया। कई दिन बाद सबने भरपेट खाना खाया जो पुलिसकर्मियों ने दिया था। खाना खाने के बाद फिर सभी पैदल बढ़नी की ओर रवाना हो गए। सोमवार को तुलसियापुर चौराहे पहुंचे। यहां से उन्होंने अपने ग्राम प्रधान अबू बकर को सूचित किया। ग्राम प्रधान ने इसकी सूचना शोहरतगढ़ पुलिस और प्रशासन को दी। सभी की मेडिकल जांच के बाद उन्हें तुलसियापुर चौराहा स्थित क्वारंटीन हाउस में 14 दिन के लिए रखा गया।
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