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मुफलिसी में गुजारा बचपन, अब जगा रहीं शिक्षा की अलख

Mon, 07 Mar 2022 10:07 PM IST
Gorakhpur Bureau गोरखपुर ब्यूरो
Updated Mon, 07 Mar 2022 10:07 PM IST
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Childhood spent in failure, now the light of education is awakening
मुफलिसी में गुजारा बचपन, अब जगा रहीं शिक्षा की अलख
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: भनवापुर ब्लाक के बामदेई गांव की उर्मिला की दास्तां बनी दूसरों के लिए मिसाल
भनवापुर (सिद्धार्थनगर)। कहते हैं कि मन में सच्ची लगन व कुछ कर गुजरने की चाहत हो तो इंसान के लिए कुछ असंभव नहीं है, ऐसा ही कुछ भनवापुर ब्लाक के बामदेई गांव निवासी उर्मिला ने कर दिखाया, जो दूसरों के लिए मिसाल बन गईं हैं। मुफलिसी में बीते बचपन से ही दृढ़ इच्छा शक्ति व संकल्प के बल पर उन्होंने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा और आज क्षेत्र में शिक्षण संस्था के माध्यम से शिक्षा की अलख जगा रही हैं।
भनवापुर ब्लाक क्षेत्र के दक्षिण पश्चिम राप्ती नदी के तट पर स्थित बामदेई गांव के ज्वाला प्रसाद मिश्र की तीन बेटियां और एक बेटा है। सबसे छोटी बेटी उर्मिला मिश्रा के मन में बचपन से ही परिवार व समाज के लिए कुछ अलग करने की चाहत थी। परिवार की आर्थिक स्थिति ठीक नहीं होने के बावजूद वह लक्ष्य के प्रति अडिग रहीं। प्राथमिक व माध्यमिक शिक्षा ग्रहण करने के बाद पिता ज्वाला प्रसाद को बेटी की शादी की चिंता सताने लगी। पिता को परेशान देख उर्मिला ने पिता से कहा दो बहनों की शादी आप पहले कर चुके हैं, अब हम दूसरे बेटे के रूप में परिवार के पालन पोषण में भागीदार रहेंगे और आजीवन विवाह नहीं करेंगे। उसके बाद उर्मिला ने मास्टर डिग्री हासिल करने के लिए घर से 16 किमी दूर डॉ. राम मनोहर लोहिया कन्या इंटर कालेज सिरसिया में शिक्षण कार्य शुरू किया। साइकिल से प्रतिदिन 16 किमी आना जाना उनके लिए कठिन कार्य था। उर्मिला बच्चों को ट्यूशन भी पढ़ाती रहीं। इसके बाद क्षेत्र के बच्चों के अभिभावकों के प्रेरणा व उनके सहयोग से उन्होंने बाल ब्रह्मचारिणी कुमारी उर्मिला देवी शिक्षा निकेतन के नाम से शिक्षण संस्था का संचालन शुरू किया और वर्तमान में क्षेत्र में शिक्षा की अलख जगा रही हैं।
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शिक्षा के साथ संस्कार बेहद जरूरी
किसी व्यक्ति में संस्कार के लिए शिक्षा से अधिक संस्कारित परिवार की भूमिका महत्वपूर्ण होती है। ये बातें 52 वर्षीय बाल ब्रह्मचारिणी उर्मिला देवी ने कहा। उन्होंने कहा कि जिनकी संतानें सुधर गईं, उनके माता पिता का जीवन सुधर गया, जिनकी संतानें बिगड़ गईं, उनके माता पिता का जीवन बिगड़ गया। संस्कार के कारण ही मेरे परिवार में पिता ज्वाला प्रसाद मिश्र, एक भाई, दो भतीजे सहित परिवार के करीब आठ सदस्यों को एक सूत्र में बांध कर रखा।
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