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चयन परीक्षा में धांधली की जांच करेंगी सीडीओ
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चयन परीक्षा में धांधली की जांच करेंगी सीडीओ
अंग्रेजी माध्यम से संचालित होने वाले स्कूलों का मामला
शिकायत मिलने के बाद जिलाधिकारी ने उठाया कदम
अमर उजाला ब्यूरो
सिद्धार्थनगर। अंग्रेजी माध्यम से संचालित होने वाले स्कूलों में शिक्षकों की नवीन तैनाती के मामले में हुई शिकायत की जांच मुख्य विकास अधिकारी की अध्यक्षता में होगी। तीन सदस्यीय टीम मामले की जांच करेगी। डीएम के इस कदम से बेसिक शिक्षा विभाग में हड़कंप मच गया है। लापरवाही बरतने वाले जिम्मेदार बचाव की जुगत में जुट गए हैं।
डुमरियागंज में मंगलवार को संपन्न संपूर्ण समाधान दिवस में जिलाधिकारी को दिए गए शिकायती पत्र में नौशाद, सिराज अहमद, राम कुमार आदि ने आरोप लगाया था कि मई 2019 में लिखित और मौखिक परीक्षा में कई बिंदुओं पर अनियमितता बरते जाने के साथ ही चहेतों के लिए हर स्तर पर मदद की गई। कई विद्यालयों पर पहले से ही विज्ञान अध्यापक तैनात होने के बावजूद भी दो-दो विज्ञान शिक्षकों की तैनाती कर दी गई है। कई ऐसे शिक्षकों को अंग्रेजी माध्यम के विद्यालयों में तैनात किया गया है जिनका विषय भी अंग्रेजी नहीं है। इसकी शिकायत पीएमओ, सीएम कार्यालय के साथ ही शिक्षा विभाग के अधिकारियों को भेजा गया, पर अब तक कोई कार्रवाई नहीं हुई।
जिलाधिकारी दीपक मीणा ने प्रकरण को गंभीरता से लेते हुए जांच के लिए मुख्य विकास अधिकारी हर्षिता की अध्यक्षता में तीन सदस्यीय कमेटी बनाई है। कमेटी में डीडीओ राजेंद्र प्रसाद और परियोजना निदेशक संतकुमार शामिल हैं। बताया जाता है कि डीडीओ बीएसए कार्यालय में जांच करने भी पहुंचे थे। जांच के बाद यह पता चला है कि एक लिपिक ने मामले में बड़ा गड़बड़झाला किया है।
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इन बिंदुओं पर लगाया गंभीर आरोप
अंग्रेजी माध्यम से संचालित हो रहे स्कूलों में शिक्षकों की तैनाती के मामले में जिन गंभीर बिंदुओं को उठाया गया है, उनमें तैनाती के पूर्व मेरिट सार्वजनिक न करने, शोहरतगढ़ में नवीन जूनियर हाईस्कूल का चयन न करने, पूर्व में चयनित विद्यालयों में तैनात शिक्षकों को पुन: अन्यत्र विद्यालयों में तैनाती करने, परीक्षार्थियों के हाथ में परीक्षा संचालित करने, विकल्प पत्र के विपरीत कई तैनाती करने, पूरे प्रकरण में पटल लिपिक की भूमिका संदिग्ध होने जैसे बिंदु शामिल हैं।
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अंग्रेजी माध्यम से संचालित होने वाले स्कूलों का मामला
शिकायत मिलने के बाद जिलाधिकारी ने उठाया कदम
अमर उजाला ब्यूरो
सिद्धार्थनगर। अंग्रेजी माध्यम से संचालित होने वाले स्कूलों में शिक्षकों की नवीन तैनाती के मामले में हुई शिकायत की जांच मुख्य विकास अधिकारी की अध्यक्षता में होगी। तीन सदस्यीय टीम मामले की जांच करेगी। डीएम के इस कदम से बेसिक शिक्षा विभाग में हड़कंप मच गया है। लापरवाही बरतने वाले जिम्मेदार बचाव की जुगत में जुट गए हैं।
डुमरियागंज में मंगलवार को संपन्न संपूर्ण समाधान दिवस में जिलाधिकारी को दिए गए शिकायती पत्र में नौशाद, सिराज अहमद, राम कुमार आदि ने आरोप लगाया था कि मई 2019 में लिखित और मौखिक परीक्षा में कई बिंदुओं पर अनियमितता बरते जाने के साथ ही चहेतों के लिए हर स्तर पर मदद की गई। कई विद्यालयों पर पहले से ही विज्ञान अध्यापक तैनात होने के बावजूद भी दो-दो विज्ञान शिक्षकों की तैनाती कर दी गई है। कई ऐसे शिक्षकों को अंग्रेजी माध्यम के विद्यालयों में तैनात किया गया है जिनका विषय भी अंग्रेजी नहीं है। इसकी शिकायत पीएमओ, सीएम कार्यालय के साथ ही शिक्षा विभाग के अधिकारियों को भेजा गया, पर अब तक कोई कार्रवाई नहीं हुई।
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जिलाधिकारी दीपक मीणा ने प्रकरण को गंभीरता से लेते हुए जांच के लिए मुख्य विकास अधिकारी हर्षिता की अध्यक्षता में तीन सदस्यीय कमेटी बनाई है। कमेटी में डीडीओ राजेंद्र प्रसाद और परियोजना निदेशक संतकुमार शामिल हैं। बताया जाता है कि डीडीओ बीएसए कार्यालय में जांच करने भी पहुंचे थे। जांच के बाद यह पता चला है कि एक लिपिक ने मामले में बड़ा गड़बड़झाला किया है।
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इन बिंदुओं पर लगाया गंभीर आरोप
अंग्रेजी माध्यम से संचालित हो रहे स्कूलों में शिक्षकों की तैनाती के मामले में जिन गंभीर बिंदुओं को उठाया गया है, उनमें तैनाती के पूर्व मेरिट सार्वजनिक न करने, शोहरतगढ़ में नवीन जूनियर हाईस्कूल का चयन न करने, पूर्व में चयनित विद्यालयों में तैनात शिक्षकों को पुन: अन्यत्र विद्यालयों में तैनाती करने, परीक्षार्थियों के हाथ में परीक्षा संचालित करने, विकल्प पत्र के विपरीत कई तैनाती करने, पूरे प्रकरण में पटल लिपिक की भूमिका संदिग्ध होने जैसे बिंदु शामिल हैं।