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विवेकानंद के व्यक्तित्व को अपनाने का आह्वान
ब्यूरो/अमर उजाला सिद्धार्थनगर
Updated Fri, 20 Jan 2017 11:06 PM IST
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शोहरतगढ़ में हुई गोष्ठी को संबोधित करते एबीवीपी के कार्यकर्ता।
- फोटो : अमर उजाला
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शोहरतगढ़। अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद की ओर से चल रहे युवा सप्ताह का शुक्रवार को समापन हुआ। इस अवसर सेठ रामकुमार खेतान बालिका इंटर कॉलेज में प्रधानाचार्य अंजू मिश्रा की अध्यक्षता में संगोष्ठी आयोजित हुई। इसमें स्वामी विवेकानंद के व्यक्तित्व-कृतित्व पर चर्चा की गई।
संगोष्ठी में परिषद के प्रदेश सहमंत्री शिवशक्ति शर्मा ने कहा कि भारत के पुनरोत्थान में स्वामीजी के योगदान को नहीं भुलाया जा सकता। उन्होंने कहा कि विवेकानंद ने अपने ज्ञान की बदौलत भारत की पहचान विश्व पटल पर लाने का कार्य किया। राष्ट्र व मानवता के नैतिक और अध्यात्मिक उत्थान के लिए अपना जीवन समर्पित कर दिया। युवा वर्ग व छात्र-छात्राएं उनके जीवन दर्शन का अध्ययन कर बदलते समाज को सही दिशा की ओर ले जाने में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। प्रधानाचार्य अंजू मिश्रा ने कहा कि समाज में महिलाएं पुरुषों के साथ विभिन्न कार्यों में भागीदारी निभाकर देश व समाज का उत्थान कर सकती हैं।
घर की चारदीवारी में कैद रह कर महिलाएं समाज के महत्वपूर्ण कार्यों में अपना योगदान नहीं निभा सकती। उन्हें बाहर निकलना होगा। इस दौरान सत्यप्रकाश शुक्ल, शकीला परवीन, कल्पना श्रीवास्तव, विनय सिंह, बालमुकुंद, बृजपति, सीमा शुक्ला, गीतांजलि सिंह, मेघश्याम गुप्ता, रीना मद्धेशिया, साफिया बानो, निरुपमा, चंदा अग्रहरी, अपर्णा पांडेय, शीला, पुष्पा, आसरानी, शशि, प्रियंका, किरन, नीलू, दिव्या, ज्योति, राजेश, ममता, गुडिया, सुनील, रामशंकर, उमा कसौधन, मोना अग्रहरी, अनीता चौधरी, नीलम चौधरी, दीपमाला चौहान, सीमा गुप्ता आदि मौजूद रही।
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संगोष्ठी में परिषद के प्रदेश सहमंत्री शिवशक्ति शर्मा ने कहा कि भारत के पुनरोत्थान में स्वामीजी के योगदान को नहीं भुलाया जा सकता। उन्होंने कहा कि विवेकानंद ने अपने ज्ञान की बदौलत भारत की पहचान विश्व पटल पर लाने का कार्य किया। राष्ट्र व मानवता के नैतिक और अध्यात्मिक उत्थान के लिए अपना जीवन समर्पित कर दिया। युवा वर्ग व छात्र-छात्राएं उनके जीवन दर्शन का अध्ययन कर बदलते समाज को सही दिशा की ओर ले जाने में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। प्रधानाचार्य अंजू मिश्रा ने कहा कि समाज में महिलाएं पुरुषों के साथ विभिन्न कार्यों में भागीदारी निभाकर देश व समाज का उत्थान कर सकती हैं।
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घर की चारदीवारी में कैद रह कर महिलाएं समाज के महत्वपूर्ण कार्यों में अपना योगदान नहीं निभा सकती। उन्हें बाहर निकलना होगा। इस दौरान सत्यप्रकाश शुक्ल, शकीला परवीन, कल्पना श्रीवास्तव, विनय सिंह, बालमुकुंद, बृजपति, सीमा शुक्ला, गीतांजलि सिंह, मेघश्याम गुप्ता, रीना मद्धेशिया, साफिया बानो, निरुपमा, चंदा अग्रहरी, अपर्णा पांडेय, शीला, पुष्पा, आसरानी, शशि, प्रियंका, किरन, नीलू, दिव्या, ज्योति, राजेश, ममता, गुडिया, सुनील, रामशंकर, उमा कसौधन, मोना अग्रहरी, अनीता चौधरी, नीलम चौधरी, दीपमाला चौहान, सीमा गुप्ता आदि मौजूद रही।
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