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ब्लड बैंक से कंपोनेंट यूनिट को जोड़ने के लिए तोड़ी गई दीवार
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लि अस्पताल में ब्लड बैंक से ब्लड कंपोनेंट यूनिट के भवन को जोड़ने के लिए तोड़ी गई दीवार, बड़ा किया ग
- फोटो : SIDDHARTHNAGAR
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ब्लड बैंक से कंपोनेंट यूनिट को जोड़ने के लिए तोड़ी गई दीवार
- एक माह में ब्लड कंपोनेंट यूनिट का कार्य पूरा करने का निर्देश
संवाद न्यूज एजेंसी
सिद्धार्थनगर। माधव प्रसाद त्रिपाठी मेडिकल कॉलेज से संबद्ध ब्लड कंपोनेंट यूनिट शुरू करने की कवायद तेज हो गई है। ब्लड बैंक और उस भवन से सटकर बनाए गए ब्लड कंपोनेंट यूनिट को आपस में जोड़ने के लिए दीवार तोड़ दी गई है। संभावना है कि एक माह में कंपोनेंट यूनिट का कार्य शुरू हो जाएगा।
उत्तर प्रदेश मेडिकल सप्लाई कार्पोरेशन की ओर ब्लड कंपोनेंट यूनिट के लिए 30 मशीनों एवं उपकरणों की सूची में तीन सामान भेज दिए गए हैं, जबकि अन्य सामानों की आपूर्ति होनी है। 14 जून को वीडियो कांफ्रेंसिंग के माध्यम से हुई बैठक में स्वास्थ्य विभाग के अपर मुख्य सचिव अमित मोहन प्रसाद ने एक माह में ब्लड कंपोनेंट यूनिट का कार्य पूरा करने का निर्देश दिया था। उसके बाद कार्य में तेजी आई है। डॉक्टरों के अनुसार ब्लड कंपोनेंट यूनिट के अंदर का तापमान 20 से 22 डिग्री सेल्सियस से अधिक नहीं होना चाहिए।
प्लेटलेट्स, प्लाज्मा, आरबीसी, डब्ल्यूबीसी को किया जाएगा अलग
ब्लड कंपोनेंट यूनिट शुरू होने के बाद एक यूनिट ब्लड से प्लेटलेट्स, प्लाज्मा, आरबीसी, डब्ल्यूबीसी आदि को अलग किया जा सकेगा। ब्लड बैंक की डॉ. एकता द्विवेदी ने बताया कि होल ब्लड की अपेक्षा कंपोनेंट ब्लड बेहतर होता है। इसमें मरीज के शरीर में रक्त के जिस तत्व की आवश्यकता होती है, उस तत्व को ही चढ़ाया जाता है, जबकि मरीज को रक्त की जिस तत्व की आवश्यकता नहीं है, उसे चढ़ाने की आवश्यकता नहीं पड़ेगी तो उसके शरीर में अधिक रक्त चढ़ाने पर भी कोई दुष्प्रभाव नहीं होगा। ब्लड से प्लेटलेट्स, प्लाज्मा, आरबीसी, डब्ल्यूबीसी को अलग-अगल किया जाता है। जिससे थैलेसीमिया, एनीमिया, डेंगू एवं अन्य संक्रमण, हादसे में अधिक रक्तस्राव से बेहोशी की हालत वाले मरीजों के इलाज में सुविधा होगी।
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ब्लड कंपोनेंट यूनिट को शुरू करने के लिए कार्य शुरू किया गया है। नई और पुरानी बिल्डिंग के बीच की दीवार तोड़ दी गई है, जल्द ही साफ-सफाई का कार्य हो जाएगा। - डॉ. नीना वर्मा, सीएमएस, जिला अस्पताल
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- एक माह में ब्लड कंपोनेंट यूनिट का कार्य पूरा करने का निर्देश
संवाद न्यूज एजेंसी
सिद्धार्थनगर। माधव प्रसाद त्रिपाठी मेडिकल कॉलेज से संबद्ध ब्लड कंपोनेंट यूनिट शुरू करने की कवायद तेज हो गई है। ब्लड बैंक और उस भवन से सटकर बनाए गए ब्लड कंपोनेंट यूनिट को आपस में जोड़ने के लिए दीवार तोड़ दी गई है। संभावना है कि एक माह में कंपोनेंट यूनिट का कार्य शुरू हो जाएगा।
उत्तर प्रदेश मेडिकल सप्लाई कार्पोरेशन की ओर ब्लड कंपोनेंट यूनिट के लिए 30 मशीनों एवं उपकरणों की सूची में तीन सामान भेज दिए गए हैं, जबकि अन्य सामानों की आपूर्ति होनी है। 14 जून को वीडियो कांफ्रेंसिंग के माध्यम से हुई बैठक में स्वास्थ्य विभाग के अपर मुख्य सचिव अमित मोहन प्रसाद ने एक माह में ब्लड कंपोनेंट यूनिट का कार्य पूरा करने का निर्देश दिया था। उसके बाद कार्य में तेजी आई है। डॉक्टरों के अनुसार ब्लड कंपोनेंट यूनिट के अंदर का तापमान 20 से 22 डिग्री सेल्सियस से अधिक नहीं होना चाहिए।
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प्लेटलेट्स, प्लाज्मा, आरबीसी, डब्ल्यूबीसी को किया जाएगा अलग
ब्लड कंपोनेंट यूनिट शुरू होने के बाद एक यूनिट ब्लड से प्लेटलेट्स, प्लाज्मा, आरबीसी, डब्ल्यूबीसी आदि को अलग किया जा सकेगा। ब्लड बैंक की डॉ. एकता द्विवेदी ने बताया कि होल ब्लड की अपेक्षा कंपोनेंट ब्लड बेहतर होता है। इसमें मरीज के शरीर में रक्त के जिस तत्व की आवश्यकता होती है, उस तत्व को ही चढ़ाया जाता है, जबकि मरीज को रक्त की जिस तत्व की आवश्यकता नहीं है, उसे चढ़ाने की आवश्यकता नहीं पड़ेगी तो उसके शरीर में अधिक रक्त चढ़ाने पर भी कोई दुष्प्रभाव नहीं होगा। ब्लड से प्लेटलेट्स, प्लाज्मा, आरबीसी, डब्ल्यूबीसी को अलग-अगल किया जाता है। जिससे थैलेसीमिया, एनीमिया, डेंगू एवं अन्य संक्रमण, हादसे में अधिक रक्तस्राव से बेहोशी की हालत वाले मरीजों के इलाज में सुविधा होगी।
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ब्लड कंपोनेंट यूनिट को शुरू करने के लिए कार्य शुरू किया गया है। नई और पुरानी बिल्डिंग के बीच की दीवार तोड़ दी गई है, जल्द ही साफ-सफाई का कार्य हो जाएगा। - डॉ. नीना वर्मा, सीएमएस, जिला अस्पताल