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Siddharthnagar News: राजसी परंपरा से प्राचीन मंदिर में स्थापित हुईं माता देवी भवानी
Sat, 21 Oct 2023 11:29 PM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
Updated Sat, 21 Oct 2023 11:29 PM IST
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बांसी नगर के राप्ती नदी पुल पर माता भवानी की अगवानी करते विधायक जय प्रताप सिंह। संवाद
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फोटो-: बांसी राजघराने की सदियों पुरानी परंपरा का किया गया निर्वहन
संवाद न्यूज एजेंसी
बांसी। शारदीय नवरात्र की सप्तमी तिथि को शनिवार को सदियों पुरानी परंपरा का निर्वहन करते हुए बांसी राजघराने की तरफ से प्राचीन माली के घर से माता देवी भवानी को राजसी ठाट-बाट, लाव लश्कर के साथ बांसी राजमहल ले जाकर तथा उन्हें प्राचीन मंदिर में स्थापित किया गया। इसकी अगुवाई राज घराने के विधायक जय प्रताप सिंह व उनके पुत्रगण अधिराज प्रताप सिंह व कुंवर अभय प्रताप सिंह ने की। बांसी राजघराने की यह सदियों पुरानी परंपरा है। शारदीय नवरात्र के दिन बांसी नरेश राजसी ठाट-बाट के साथ आते हैं। माता देवी भवानी को माली के घर से ससम्मान राजमहल ले जाते हैं।
शनिवार को अंग्रेजों के दौरान के बांसी राज घराने ने इस सदियों पुरानी प्राचीन शाही परंपरा का निर्वहन परंपरागत तरीके से किया। हाथ में नंगी तलवार लिए विधायक जय प्रताप सिंह, कुंवर अधिराज प्रताप सिंह व कुंवर अभय प्रताप सिंह राप्ती पुल पर नंगे पांव खड़े होकर माता देवी भवानी का इंतजार कर रहे थे।
उधर, विशंभर माली के घर से माली के साथ राजसी सेना और लाव-लश्कर प्राचीन परंपराओं का निर्वहन करते हुए माली के घर से पुरानी कचहरी होते हुए राप्ती पुल पर देवी भवानी माता को लेकर पहुंची। लोगों ने माता की अगवानी की और माली के साथ नंगे पांव पैदल चलते हुए राजमहल गए। राजमहल पहुंचकर माताजी को प्राचीन देवी मंदिर में स्थापित किया गया। इस दौरान राजमहल में खुशी और उत्साह का माहौल रहा।
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इस दौरान राघवेंद्र प्रताप सिंह नन्हे, आनंद शंकर मणि, अभिषेक त्रिपाठी, निखिल प्रताप सिंह, संतोष उपस्थित रहे। वर्षों पुरानी इस परंपरा को देखने के लिए राप्ती नदी पुल पर नगर सहित आसपास के ग्रामीण अंचलों से लोगों की भीड़ उमड़ पड़ी।
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संवाद न्यूज एजेंसी
बांसी। शारदीय नवरात्र की सप्तमी तिथि को शनिवार को सदियों पुरानी परंपरा का निर्वहन करते हुए बांसी राजघराने की तरफ से प्राचीन माली के घर से माता देवी भवानी को राजसी ठाट-बाट, लाव लश्कर के साथ बांसी राजमहल ले जाकर तथा उन्हें प्राचीन मंदिर में स्थापित किया गया। इसकी अगुवाई राज घराने के विधायक जय प्रताप सिंह व उनके पुत्रगण अधिराज प्रताप सिंह व कुंवर अभय प्रताप सिंह ने की। बांसी राजघराने की यह सदियों पुरानी परंपरा है। शारदीय नवरात्र के दिन बांसी नरेश राजसी ठाट-बाट के साथ आते हैं। माता देवी भवानी को माली के घर से ससम्मान राजमहल ले जाते हैं।
शनिवार को अंग्रेजों के दौरान के बांसी राज घराने ने इस सदियों पुरानी प्राचीन शाही परंपरा का निर्वहन परंपरागत तरीके से किया। हाथ में नंगी तलवार लिए विधायक जय प्रताप सिंह, कुंवर अधिराज प्रताप सिंह व कुंवर अभय प्रताप सिंह राप्ती पुल पर नंगे पांव खड़े होकर माता देवी भवानी का इंतजार कर रहे थे।
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उधर, विशंभर माली के घर से माली के साथ राजसी सेना और लाव-लश्कर प्राचीन परंपराओं का निर्वहन करते हुए माली के घर से पुरानी कचहरी होते हुए राप्ती पुल पर देवी भवानी माता को लेकर पहुंची। लोगों ने माता की अगवानी की और माली के साथ नंगे पांव पैदल चलते हुए राजमहल गए। राजमहल पहुंचकर माताजी को प्राचीन देवी मंदिर में स्थापित किया गया। इस दौरान राजमहल में खुशी और उत्साह का माहौल रहा।
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इस दौरान राघवेंद्र प्रताप सिंह नन्हे, आनंद शंकर मणि, अभिषेक त्रिपाठी, निखिल प्रताप सिंह, संतोष उपस्थित रहे। वर्षों पुरानी इस परंपरा को देखने के लिए राप्ती नदी पुल पर नगर सहित आसपास के ग्रामीण अंचलों से लोगों की भीड़ उमड़ पड़ी।