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Siddharthnagar News: सेहत से खेल रहे मिलावटखोर...मसाले में भी कर रहे मिलावट
Wed, 15 Oct 2025 11:36 PM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
Updated Wed, 15 Oct 2025 11:36 PM IST
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शहर के दुकान में रखा हुआ मशाला। संवाद
सिद्धार्थनगर। मिलावटखोर लोगों की सेहत से खेल रहे हैं। मिठाई ही नहीं मसाले में भी मिलावट कर रहे हैं। हल्दी पाउडर में चावल और केमिकल वाला रंग तो भूसी वाली धनिया पाउडर बेच रहे हैं। मिलावटी मसाला खाने से लीवर, किडनी, फेफड़ा सहित अन्य अंग पर प्रतिकूल असर पड़ सकता है।
मिलावट इस कदर बढ़ गई है कि खाद्य विभाग से लिए जा रहे नमूने भी हर माह फेल हो रहे हैं, जबकि मसाले की मात्रा बढ़ाने के लिए धंधेबाज काली मिर्च में पपीता ताे जीरा में सोया मिला रहे हैं। जो ग्राहकों को ठगने के साथ ही सेहत के लिए भी नुकसानदायक है। पिछले दिनों खाद्य विभाग से मसाले के लिए 11 सैंपल में छह की रिपोर्ट भी आई थी।
इसमें से दो मानक के अनुरूप पाई गई, जबकि एक सैंपल अनसेफ मिला है जो इस बात की पुष्टि कर रहा है कि मिलावट का खेल हो रहा है। ऐसे में मिलावटखोरों ने हर खाने पीने वाली वस्तुओं में लागत से अधिक मुनाफा कमाने का रास्ता खोज लिया है।
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मिलावटखोर इन मसालों में इतनी बारीकी से मिलावट करते हैं, कि उसकी पहचान आसान नहीं है। किराना का कारोबार करने वाले मोल्हू मधेसिया ने मसालों के बारे में बताया कि मसालों में सबसे ज्यादा उपयोग होने वाली हल्दी, मिर्च, धनिया, काली मिर्च, जीरा, दालचीनी आदि में अत्यधिक मिलावट की जा रही है।
मिर्च पाउडर में भी हानिकारक रंग की मिलावट होती है। बाजार में मिल रहे अरारोट में तो महक होती ही नहीं। उसमें महक हो इसके लिए हींग की खुशबू वाला रसायन मिला दिया जाता है। सूत्र बताते हैं कि सोया का डंठल और दक्षिण भारत से आने वाली एक घास को जीरा में मिलाने पर उसमें असली जीरा छांटना बेहद मुश्किल होता है। हल्दी का रंग गाढ़ा करने के लिए रासायनिक रंग और चावल का आटा मिलाया जाता है। धनिया पाउडर में लकड़ी की भूसी का अवशेष मिलाया जाता है।
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दालचीनी और जीरा में खेल
रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने के लिए घर-घर दालचीनी, शहद आदि का प्रयोग होता है। इसलिए बाजार में कुछ मसालों की मांग कई गुना बढ़ गई। इसी का फायदा अब धंधेबाज उठा रहे हैं। दाल चीनी का आयात वियतनाम से होता है, लेकिन लोगों की मांग को देखते हुए चीन की दालचीनी नेपाल के रास्ते पहुंच रही है। थोक में असली दालचीनी 600 रुपये किलोग्राम से अधिक में बिकती है, जबकि नकली दालचीनी 200 से 300 रुपये प्रति किलो आती है। असली दालचीनी का रंग हल्का भूरा होता है, इसे हाथ में लेने पर रंग नहीं छूटता। इसके अलावा जीरा में एक खास कीक्सिम की हूबहू दिखने वाली वस्तु मिलाई जाती है। साथ ही वजन पकड़ने के लिए बोरी में धूल और उपर से पानी का छींटा मार दिया जाता है। वहीं, काली मिर्च की बात करें तो पपीता का बीज तक मिला दिया जाता है। हालांकि इसे पकड़ पाना मुश्किल है। क्योंकि, 90 प्रतिशत असली और 10 प्रतिशत नकली आता है। 20 प्रतिशत मसाला चोरी छिपे नेपाल और 80 प्रतिशत गोरखपुर और अन्य बाजार से आता है।
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धुआं जो आपका सांस लेना मुश्किल कर देगा
खाद्य सामग्री में मिलावट तो सभी को पता है। लेकिन पूजा की सामग्री में मिलावट से अनजान होंगे। मौजूदा समय में न सिर्फ व्रत की खाद्य सामग्री में मिलावटी सामान बाजार में उतारा गया है। बड़ी मात्रा में खराब क्वालिटी की अगरबत्ती और धूप बत्ती भी बेची जा रही है, जिसके धुएं से सुगंध के बजाय दुर्गंध फैल रही है और उसके धुएं से दम घुटने के साथ ही आंख में जलन की भी शिकायत के मामले भी बढ़े हैं। ऐसे में अगर पूजा सामग्री से आपको भी ऐसी समस्या हो रही है तो समझ लें कि वह लोकल और मिलावटी है। वहीं, स्वास्थ्य विशेषज्ञ इसे गंभीर समस्या बता रहे हैं। उनका कहना है कि कार्सिनोजेनिक है, जिससे कैंसर तक हो सकता है।
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घी और मूंगफली के तेल में मिलावट
शहर के कारोबारी हरिराम यादव ने बताया कि घी में सबसे अधिक मिलावटी की जाती है। इसमें बड़ी दुकानों और पैकिंग की बात अलग है। गांव घर में जो घी दे रहे हैं, उसमें डालडा मिलाया जाता है। डालडा के साथ उसे गर्म कर दिया जाता है, क्योंकि दोनों हल्का पीला होता है, इसलिए वह मिल जाता है। घी को पहचानने की जरूरत है। असली घी में सेंट होता है और जमता नहीं है जबकि डालडा मिला घी ठंड स्थान पर जम जाता है।
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मिलावटखोरी रोकने के लिए जांच की जा रही है। लगातार सैंपल लेने के साथ ही सामान जब्त करने की कार्रवाई की जा रही है। मिलावट की पुष्टि होने पर केस दर्ज कराने के साथ जुर्माना लगवाया जा रहा है।
-आरएल यादव, सहायक आयुक्त खाद्य सुरक्षा विभाग
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मिलावट इस कदर बढ़ गई है कि खाद्य विभाग से लिए जा रहे नमूने भी हर माह फेल हो रहे हैं, जबकि मसाले की मात्रा बढ़ाने के लिए धंधेबाज काली मिर्च में पपीता ताे जीरा में सोया मिला रहे हैं। जो ग्राहकों को ठगने के साथ ही सेहत के लिए भी नुकसानदायक है। पिछले दिनों खाद्य विभाग से मसाले के लिए 11 सैंपल में छह की रिपोर्ट भी आई थी।
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इसमें से दो मानक के अनुरूप पाई गई, जबकि एक सैंपल अनसेफ मिला है जो इस बात की पुष्टि कर रहा है कि मिलावट का खेल हो रहा है। ऐसे में मिलावटखोरों ने हर खाने पीने वाली वस्तुओं में लागत से अधिक मुनाफा कमाने का रास्ता खोज लिया है।
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मिलावटखोर इन मसालों में इतनी बारीकी से मिलावट करते हैं, कि उसकी पहचान आसान नहीं है। किराना का कारोबार करने वाले मोल्हू मधेसिया ने मसालों के बारे में बताया कि मसालों में सबसे ज्यादा उपयोग होने वाली हल्दी, मिर्च, धनिया, काली मिर्च, जीरा, दालचीनी आदि में अत्यधिक मिलावट की जा रही है।
मिर्च पाउडर में भी हानिकारक रंग की मिलावट होती है। बाजार में मिल रहे अरारोट में तो महक होती ही नहीं। उसमें महक हो इसके लिए हींग की खुशबू वाला रसायन मिला दिया जाता है। सूत्र बताते हैं कि सोया का डंठल और दक्षिण भारत से आने वाली एक घास को जीरा में मिलाने पर उसमें असली जीरा छांटना बेहद मुश्किल होता है। हल्दी का रंग गाढ़ा करने के लिए रासायनिक रंग और चावल का आटा मिलाया जाता है। धनिया पाउडर में लकड़ी की भूसी का अवशेष मिलाया जाता है।
दालचीनी और जीरा में खेल
रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने के लिए घर-घर दालचीनी, शहद आदि का प्रयोग होता है। इसलिए बाजार में कुछ मसालों की मांग कई गुना बढ़ गई। इसी का फायदा अब धंधेबाज उठा रहे हैं। दाल चीनी का आयात वियतनाम से होता है, लेकिन लोगों की मांग को देखते हुए चीन की दालचीनी नेपाल के रास्ते पहुंच रही है। थोक में असली दालचीनी 600 रुपये किलोग्राम से अधिक में बिकती है, जबकि नकली दालचीनी 200 से 300 रुपये प्रति किलो आती है। असली दालचीनी का रंग हल्का भूरा होता है, इसे हाथ में लेने पर रंग नहीं छूटता। इसके अलावा जीरा में एक खास कीक्सिम की हूबहू दिखने वाली वस्तु मिलाई जाती है। साथ ही वजन पकड़ने के लिए बोरी में धूल और उपर से पानी का छींटा मार दिया जाता है। वहीं, काली मिर्च की बात करें तो पपीता का बीज तक मिला दिया जाता है। हालांकि इसे पकड़ पाना मुश्किल है। क्योंकि, 90 प्रतिशत असली और 10 प्रतिशत नकली आता है। 20 प्रतिशत मसाला चोरी छिपे नेपाल और 80 प्रतिशत गोरखपुर और अन्य बाजार से आता है।
धुआं जो आपका सांस लेना मुश्किल कर देगा
खाद्य सामग्री में मिलावट तो सभी को पता है। लेकिन पूजा की सामग्री में मिलावट से अनजान होंगे। मौजूदा समय में न सिर्फ व्रत की खाद्य सामग्री में मिलावटी सामान बाजार में उतारा गया है। बड़ी मात्रा में खराब क्वालिटी की अगरबत्ती और धूप बत्ती भी बेची जा रही है, जिसके धुएं से सुगंध के बजाय दुर्गंध फैल रही है और उसके धुएं से दम घुटने के साथ ही आंख में जलन की भी शिकायत के मामले भी बढ़े हैं। ऐसे में अगर पूजा सामग्री से आपको भी ऐसी समस्या हो रही है तो समझ लें कि वह लोकल और मिलावटी है। वहीं, स्वास्थ्य विशेषज्ञ इसे गंभीर समस्या बता रहे हैं। उनका कहना है कि कार्सिनोजेनिक है, जिससे कैंसर तक हो सकता है।
घी और मूंगफली के तेल में मिलावट
शहर के कारोबारी हरिराम यादव ने बताया कि घी में सबसे अधिक मिलावटी की जाती है। इसमें बड़ी दुकानों और पैकिंग की बात अलग है। गांव घर में जो घी दे रहे हैं, उसमें डालडा मिलाया जाता है। डालडा के साथ उसे गर्म कर दिया जाता है, क्योंकि दोनों हल्का पीला होता है, इसलिए वह मिल जाता है। घी को पहचानने की जरूरत है। असली घी में सेंट होता है और जमता नहीं है जबकि डालडा मिला घी ठंड स्थान पर जम जाता है।
मिलावटखोरी रोकने के लिए जांच की जा रही है। लगातार सैंपल लेने के साथ ही सामान जब्त करने की कार्रवाई की जा रही है। मिलावट की पुष्टि होने पर केस दर्ज कराने के साथ जुर्माना लगवाया जा रहा है।
-आरएल यादव, सहायक आयुक्त खाद्य सुरक्षा विभाग