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दोपहर तक न बीडीओ दफ्तर खुला न एडीओ
ब्यूरो/अमर उजाला सिद्धार्थनगर
Updated Mon, 17 Oct 2016 09:54 PM IST
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भनवापुर ब्लाक पर बंद पड़ा बीडीओ कक्ष।
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
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भनवापुर। डीएम, एसपी, सीडीओ समेत जिले के अन्य सरकारी कार्यालय भले ही सुबह 10 बजे खुलते हों, लेकिन भनवापुर में बीडीओ कार्यालय का ताला कब खुलेगा कोई भरोसा नहीं। बीडीओ ही नहीं यहां एडीओ, ग्राम विकास अधिकारी (वीडीओ) के कक्षों के भी खुलने का कोई समय नहीं है। सोमवार को स्थिति ऐसी ही थी। दोपहर साढ़े 12 बजे तक जिम्मेदारों का कोई अता-पता नहीं था। विभिन्न कार्यों के लिए उनसे मिलने दूर-दराज से आए ग्रामीण इंतजार में बैठे रहे, मगर साहब कब आएंगे, कोई बताने वाला भी नहीं था।
भनवापुर ब्लाक कार्यालय की यह स्थिति तब है, जब यह क्षेत्र वीआईपी श्रेणी में आता है। प्रदेश के विधानसभा अध्यक्ष का क्षेत्र यहां से चंद किमी दूर है। खुद इस ब्लाक के प्रमुख पद की कमान सपा जिलाध्यक्ष अजय चौधरी के भयोहू के हाथों में है।
बावजूद अफसर बेलगाम हैं। 122 ग्राम पंचायतों वाले इस ब्लाक में बीडीओ, एडीओ जैसे जिम्मेदारों से मिलना टेढ़ी खीर है। मनमानी और लापरवाही के चलते जनता हलकान है। सिर्फ सोमवार ही नहीं, अलबत्ता अक्सर यहां ऐसी ही स्थिति बनी रहती है। दोपहर तक कार्यालय नहीं खुलता। अफसरों का असर कर्मचारियों पर भी है। नतीजा दूर-दराज से आने वाले ग्राम प्रधान, बीडीसी और ग्रामीण घंटों तक यहां-वहां भटकते हैं फिर निराश लौट जाते हैं।
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इस संबंध में खंड विकास अधिकारी रामकिशोर का कहना था कि आज वह अवकाश पर थे। इसलिए दफ्तर नहीं आ पाए। ब्लाक में ग्राम विकास अधिकारियों की कमी है। 122 ग्राम पंचायतों में सिर्फ 6 ग्राम विकास अधिकारी हैं। इसकी कमी को दूर करने के लिए उच्चाधिकारियों को पत्र लिखा गया है। शीघ्र ही यह समस्या भी दूर होगी।
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भनवापुर ब्लाक कार्यालय की यह स्थिति तब है, जब यह क्षेत्र वीआईपी श्रेणी में आता है। प्रदेश के विधानसभा अध्यक्ष का क्षेत्र यहां से चंद किमी दूर है। खुद इस ब्लाक के प्रमुख पद की कमान सपा जिलाध्यक्ष अजय चौधरी के भयोहू के हाथों में है।
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बावजूद अफसर बेलगाम हैं। 122 ग्राम पंचायतों वाले इस ब्लाक में बीडीओ, एडीओ जैसे जिम्मेदारों से मिलना टेढ़ी खीर है। मनमानी और लापरवाही के चलते जनता हलकान है। सिर्फ सोमवार ही नहीं, अलबत्ता अक्सर यहां ऐसी ही स्थिति बनी रहती है। दोपहर तक कार्यालय नहीं खुलता। अफसरों का असर कर्मचारियों पर भी है। नतीजा दूर-दराज से आने वाले ग्राम प्रधान, बीडीसी और ग्रामीण घंटों तक यहां-वहां भटकते हैं फिर निराश लौट जाते हैं।
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इस संबंध में खंड विकास अधिकारी रामकिशोर का कहना था कि आज वह अवकाश पर थे। इसलिए दफ्तर नहीं आ पाए। ब्लाक में ग्राम विकास अधिकारियों की कमी है। 122 ग्राम पंचायतों में सिर्फ 6 ग्राम विकास अधिकारी हैं। इसकी कमी को दूर करने के लिए उच्चाधिकारियों को पत्र लिखा गया है। शीघ्र ही यह समस्या भी दूर होगी।