{"_id":"6277fcc34de8bf1fb07d6bab","slug":"administration-asking-for-chaff-in-donation-for-destitute-animals-siddharthnagar-news-gkp436160463","type":"story","status":"publish","title_hn":"बेसहारा पशुओं के लिए दान में भूसा मांग रहा प्रशासन","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
बेसहारा पशुओं के लिए दान में भूसा मांग रहा प्रशासन
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
बेसहारा पशुओं के लिए दान में भूसा मांग रहा प्रशासन
सिद्धार्थनगर। बेसहारा पशुओं के भरण-पोषण के लिए जिला प्रशासन ने किसानों, जनप्रतिनिधियों, समाजसेवियों और व्यापारियों से भूसा दान करने की अपील की है। डीएम संजीव रंजन ने निराश्रित पशुओं के लिए स्थापित गोशालाओं के पूरे वर्ष तक संचालन के लिए भंडारण पर जोर देते हुए लोगों से भूसा दान करने के लिए कहा है। उन्होंने बताया कि जो भी सबसे अधिक भूसा दान करेगा, उसे प्रशस्तिपत्र देकर सम्मानित किया जाएगा।
जिले में बेसहारा पशुओं के लिए 53 गोशालाएं संचालित हैं, जिनमें 13 हजार से अधिक निराश्रित पशुओं का भरण-पोषण किए जाने की व्यवस्था की गई है। इन गोशालाओं का ग्राम पंचायत स्तर पर अन्य विभागों के समन्वय से संचालन किया जाता है। गोशाला के संचालन में कभी-कभी पशुओं के चारे की व्यवस्था में कमी हो जाती है। इसी को देखते हुए इस वर्ष गेहूं फसल की कटाई के साथ ही गोशाला में भूसा भंडारण की व्यवस्था सुनिश्चित करने की प्रशासन तैयारी कर रहा है, जिससे पूरे वर्ष तक निराश्रित पशुओं के लिए चारे का संकट न उत्पन्न हो।
डीएम संजीव रंजन ने संबंधित खंड विकास अधिकारी, एसडीएम, मुख्य पशु चिकित्साधिकारी, सीडीओ अथवा स्वयं डीएम से संपर्क कर ग्रामवासियों, जनप्रतिनिधियों, व्यापारियों व समाजसेवियों से भूसा दान करने की अपील की है।
विज्ञापन
दो न्याय पंचायत पर होना था एक गोशाला का संचालन
शासन स्तर पर प्रत्येक न्याय पंचायत में एक गोशाला के संचालन का निर्देश था। उसके क्रम में जिले के 14 ब्लॉकों की 145 न्याय पंचायतों में से प्रत्येक दो के बीच में एक गोशाला का संचालन करने का प्रयास किया गया। इसके तहत दो वर्ष पूर्व विभिन्न स्थानों पर 73 गोशाला स्थापित किए गए, लेकिन इसमें 69 गोशालाओं का संचालन शुरू हो सका। इसके छह माह के अंदर ही कुछ गोशालाएं बंद हो गईं। वर्तमान में शहरी एवं ग्रामीण क्षेत्रों को मिलाकर 53 स्थानों पर गोशाला का संचालन हो रहा है।
प्रतिवर्ष खर्च होता है दो करोड़ का भूसा
जिले में प्रत्येक वर्ष गोशालाओं के संचालन में निराश्रित पशुओं के लिए दो करोड़ रुपये से अधिक रकम भूसे पर खर्च होती है। भूसे की खरीद और गोशाला संचालन के लिए जिम्मेदार ग्राम पंचायतों के माध्यम से इसका भुगतान किया जाता है। राम प्रसाद, दीनानाथ व शंभू आदि किसानों का कहना है कि शासन की तरफ से संचालित गोशालाओं में पशुओं का बेहतर रख-रखाव होना चाहिए, ताकि छुट्टा पशुओं के बाहर रहने सेे किसानों की फसल का नुकसान न हो।
विज्ञापन
सिद्धार्थनगर। बेसहारा पशुओं के भरण-पोषण के लिए जिला प्रशासन ने किसानों, जनप्रतिनिधियों, समाजसेवियों और व्यापारियों से भूसा दान करने की अपील की है। डीएम संजीव रंजन ने निराश्रित पशुओं के लिए स्थापित गोशालाओं के पूरे वर्ष तक संचालन के लिए भंडारण पर जोर देते हुए लोगों से भूसा दान करने के लिए कहा है। उन्होंने बताया कि जो भी सबसे अधिक भूसा दान करेगा, उसे प्रशस्तिपत्र देकर सम्मानित किया जाएगा।
जिले में बेसहारा पशुओं के लिए 53 गोशालाएं संचालित हैं, जिनमें 13 हजार से अधिक निराश्रित पशुओं का भरण-पोषण किए जाने की व्यवस्था की गई है। इन गोशालाओं का ग्राम पंचायत स्तर पर अन्य विभागों के समन्वय से संचालन किया जाता है। गोशाला के संचालन में कभी-कभी पशुओं के चारे की व्यवस्था में कमी हो जाती है। इसी को देखते हुए इस वर्ष गेहूं फसल की कटाई के साथ ही गोशाला में भूसा भंडारण की व्यवस्था सुनिश्चित करने की प्रशासन तैयारी कर रहा है, जिससे पूरे वर्ष तक निराश्रित पशुओं के लिए चारे का संकट न उत्पन्न हो।
विज्ञापन
डीएम संजीव रंजन ने संबंधित खंड विकास अधिकारी, एसडीएम, मुख्य पशु चिकित्साधिकारी, सीडीओ अथवा स्वयं डीएम से संपर्क कर ग्रामवासियों, जनप्रतिनिधियों, व्यापारियों व समाजसेवियों से भूसा दान करने की अपील की है।
विज्ञापन
दो न्याय पंचायत पर होना था एक गोशाला का संचालन
शासन स्तर पर प्रत्येक न्याय पंचायत में एक गोशाला के संचालन का निर्देश था। उसके क्रम में जिले के 14 ब्लॉकों की 145 न्याय पंचायतों में से प्रत्येक दो के बीच में एक गोशाला का संचालन करने का प्रयास किया गया। इसके तहत दो वर्ष पूर्व विभिन्न स्थानों पर 73 गोशाला स्थापित किए गए, लेकिन इसमें 69 गोशालाओं का संचालन शुरू हो सका। इसके छह माह के अंदर ही कुछ गोशालाएं बंद हो गईं। वर्तमान में शहरी एवं ग्रामीण क्षेत्रों को मिलाकर 53 स्थानों पर गोशाला का संचालन हो रहा है।
प्रतिवर्ष खर्च होता है दो करोड़ का भूसा
जिले में प्रत्येक वर्ष गोशालाओं के संचालन में निराश्रित पशुओं के लिए दो करोड़ रुपये से अधिक रकम भूसे पर खर्च होती है। भूसे की खरीद और गोशाला संचालन के लिए जिम्मेदार ग्राम पंचायतों के माध्यम से इसका भुगतान किया जाता है। राम प्रसाद, दीनानाथ व शंभू आदि किसानों का कहना है कि शासन की तरफ से संचालित गोशालाओं में पशुओं का बेहतर रख-रखाव होना चाहिए, ताकि छुट्टा पशुओं के बाहर रहने सेे किसानों की फसल का नुकसान न हो।