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गुरु का सदैव सम्मान करना चाहिए
Siddhartha nagar
Updated Wed, 21 Nov 2012 12:00 PM IST
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सिद्धार्थनगर। असिधवा में चल रहे श्रीमद्भागवत कथा के सातवें दिन आचार्य संतोष ने कहा कि रुक्मिणी और कृष्ण को मिलाने में सद्गुरु की बड़ी कृपा थी। इस लिए सदैव गुरु का सम्मान करना चाहिए। उन्होंने कहा कि पूूरा संसार जानता है कि भारत में गुरुओं को हमेशा से ही महापुरुषों ने सम्मान दिया है। उसी की देन है कि आज भी गुरु परंपरा हम लोगों के यहां चलती है।
उन्होंने भगवान कृष्ण और सुदामा की मित्रता का वर्णन करते हुए कहा कि आज के समय में लोग अपने मित्रों पर कम विश्वास करते हैं। ऐसे मित्रों को कृष्ण और सुदामा की मित्रता से सीख लेनी चाहिए। उन्होंने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण ने हमेशा सत्य का साथ दिया। सत्य का साथ देने के समय भगवान कृष्ण को झूठ भी बोलना पड़ा। कथा के दौरान सुदामा चरित्र की मनमोहक झांकी निकाली गई। पूर्व नगर पालिका अध्यक्ष बांसी अज्जू श्रीवास्तव, दिलीप श्रीवास्तव, शांतिश्वर नाथ त्रिपाठी, प्रेम बाबा, अवध नरेश लाल श्रीवास्तव, चंद्र नरायन लाल श्रीवास्तव, चंद्रिका प्रसाद, जगदीश वर्मा, रामज्ञा, राजन श्रीवास्तव आदि लोग कथा के दौरान मौजूद रहे।
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उन्होंने भगवान कृष्ण और सुदामा की मित्रता का वर्णन करते हुए कहा कि आज के समय में लोग अपने मित्रों पर कम विश्वास करते हैं। ऐसे मित्रों को कृष्ण और सुदामा की मित्रता से सीख लेनी चाहिए। उन्होंने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण ने हमेशा सत्य का साथ दिया। सत्य का साथ देने के समय भगवान कृष्ण को झूठ भी बोलना पड़ा। कथा के दौरान सुदामा चरित्र की मनमोहक झांकी निकाली गई। पूर्व नगर पालिका अध्यक्ष बांसी अज्जू श्रीवास्तव, दिलीप श्रीवास्तव, शांतिश्वर नाथ त्रिपाठी, प्रेम बाबा, अवध नरेश लाल श्रीवास्तव, चंद्र नरायन लाल श्रीवास्तव, चंद्रिका प्रसाद, जगदीश वर्मा, रामज्ञा, राजन श्रीवास्तव आदि लोग कथा के दौरान मौजूद रहे।
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