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74 हजार परिवारों को मिलेगा इज्जतघर

Sat, 10 Aug 2019 10:12 PM IST
Gorakhpur Bureau गोरखपुर ब्यूरो
Updated Sat, 10 Aug 2019 10:12 PM IST
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74 thousand family will give toilet
फोटो-
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74 हजार और परिवारों को ‘इज्जत घर’ का तोहफा शीघ्र
शासन की ओर से पंचायती राज विभाग को मिली 76 करोड़ की धनराशि
जिला पहले से ही ओडीएफ घोषित, स्वच्छ भारत का सपना हो सकेगा साकार
अमर उजाला ब्यूरो
सिद्धार्थनगर। जिले के 74 हजार से अधिक परिवारों को ‘इज्जत घर’ का तोहफा जल्द ही मिलेगा। इसके लिए शासन की ओर से पंचायती राज विभाग को 76 करोड़ रुपये भेजा गया है। जारी इस राशि को विभाग प्रधानों के माध्यम से लाभार्थियों को चेक दो किस्तों में सौंपेगा। शासन की इस पहल के बाद जिले में स्वच्छ भारत का सपना साकार हो सकेगा।
केंद्र की मोदी सरकार स्वच्छता पर विशेष ध्यान दे रही है। इसके तहत हर घर को इज्जत घर और गरीबों को प्रधानमंत्री आवास जैसी सुविधाएं दी जा रही है। बहू, बेटियां और आम लोग खुले में शौच न जाए। इसके लिए सरकार ने इज्जत घर देने की योजना शुरू की। इसके तहत ग्रामीण क्षेत्र में निवास करने वाले लाभार्थियों को दो किस्तों में इज्जत घर के लिए 12 हजार रुपये की सहायता राशि सरकार की ओर दी जाती है। पंचायती राज विभाग और ग्राम प्रधान की निगरानी में शौचालय का निर्माण कराया जाता है। 27 लाख की आबादी वाले जिले को खुले में शौच से मुक्त घोषित कर दिया गया है। बावजूद इसके अधिकांश परिवारों के पास अभी भी शौचालय नहीं है।
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जिले में ऐसे परिवारों की संख्या मौजूदा समय में करीब 76 हजार है। इन छूटे हुए परिवारों के इज्जतघर निर्माण के लिए शासन की ओर से पंचायती राज विभाग को 76 करोड़ रुपये सौंपे गए हैं। डीपीआरओ एके सिंह ने बताया कि शौचालय निर्माण के लिए शासन से धन आ चुका है। धन की कोई कमी नहीं है। जल्द ही चिह्नित लाभार्थियों को धनराशि सौंपी जाएगी ताकि जल्द से जल्द इज्जत घर का निर्माण शुरू हो सके।
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वर्ष 2018 में ओडीएफ घोषित हो चुका है जिला
प्रशासन की ओर से वर्ष 2018 में गांधी जयंती के अवसर पर दो अक्तूबर को जिले को कागज में ओडीएफ घोषित किया जा चुका है। लेकिन हकीकत इससे परे है। आज भी जिले की अधिकांश आबादी के पास शौचालय नहीं है। महिलाएं, बच्चे सभी खुले में शौच के लिए बाहर जाते हैं।

जनगणना में छूट गए थे परिवार
2011 के जनगणना के बाद पंचायती राज विभाग ने बेस लाइन सर्वे के अनुसार एक लाख 78 हजार शौचालय बनवाए थे। इसके बाद भी हजारों परिवार छूट गए थे। शासन की ओर से छूटे परिवारों को चिह्नित करने का निर्देश दिया गया था। इसमें 75 हजार से अधिक परिवारों का नाम सामने आया था, जिनके लिए यह राशि शासन ने उपलब्ध कराई है।
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