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नहीं खुला जन औषधि केंद्र, महंगे दामों पर दवा खरीदना मजबूरी
Wed, 26 Dec 2018 10:39 PM IST
राकेश पांडेय
siddharthnagar
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Published by: राकेश पांडेय
Updated Wed, 26 Dec 2018 10:39 PM IST
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सिद्धार्थनगर। मरीजों को सस्ती दवा उपलब्ध कराने के उद्देश्य से प्रधानमंत्री ने एक जुलाई 2015 में प्रधानमंत्री जन औषधि योजना की शुरूआत की थी। इसके तहत जन औषधि केेंद्र स्थापित कर लोगों को काफी सस्ती दर पर जेनरिक दवाइयां उपलब्ध कराई जानी थी। इन औषधि केंद्रों को देश के प्रत्येक जिले में खोला जाना था। बावजूद इसके अभी तक जिला अस्पताल में जन औषधि केेंद्र स्थापित नहीं हो सका। केंद्र न खुलने से मरीजों को बाहर से दवाइयां महंगे दाम पर लेनी पड़ रही हैं।
दरअसल, बड़ी संख्या में गरीब लोग सरकारी अस्पतालों में पहुंचकर डॉक्टर से स्वास्थ्य परीक्षण तो करा लेता हैं। इन अस्पतालों में कुछ दवाइयां मिल जाती हैं। न मिलने की स्थिति बाहर से दवाइयां खरीदना मजबूरी है। कई बार दवा न खरीद पाने की स्थिति में मरीज की मौत भी हो जाती है। इसी को देखते हुए प्रधानमंत्री जन औषधि योजना की शुरूआत की गई थी। औषधि केंद्र न खुलने से जिले की 27 लाख की आबादी पीएम की महत्वपूर्ण योजना से वंचित हैं। यह हाल तब है जब जिला प्रदेश के पिछड़े जनपदों में शुमार है। सीएमओ डॉ. आरके मिश्र ने बताया कि प्राइवेट फर्म को इसकी जिम्मेदारी शासन की ओर से दी गई थी। लेकिन अब तक फर्म ने काम नहीं शुरू किया। इसकी वजह से जिला अस्पताल में जन औषधि केंद्र नहीं खुल सका। इसे लेकर शासन को पत्र लिखा गया है। उम्मीद है कि जल्द ही जन औषधि केंद्र जिला अस्पताल में खुल जाएगा।
जिला अस्पताल में एक हजार मरीज आते है प्रतिदिन
जिला अस्पताल की ओपीडी में प्रतिदिन 800 से 1000 मरीज स्वास्थ्य परीक्षण के लिए आते हैं। इसके साथ ही प्रतिदिन औसतन 80 मरीज इमरजेंसी में आते हैं। चिकित्सकों द्वारा जांच परीक्षण के बाद अस्पताल में उपलब्ध न होने पर कई दवाइयां बाहर से मरीजों को खरीदनी पड़ती हैं। अगर औषधि केंद्र होता तो इन मरीजों को बाहर से दवा भी नहीं लेनी पड़ती।
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घोषणा तक सीमित रह गई योजना
जन औषधि केंद्र के मुद्दे पर इटवा कस्बा निवासी अनिल कसौधन, कमरूजमा ने कहा कि जन औषधि केंद्र स्थापित किए जाने की घोषणा हुई थी तो लगा कि अब गरीब भी बीमारी होने पर इलाज करा सकेंगे और दवा खरीद पाएंगे। लेकिन यह योजना जिले में अभी तक शुरू नहीं हो पाई है। जबकि प्रदेश के अन्य जिलों में केंद्र चल रहा है। यह जिम्मेदारों की उदासीनता है कि जिसकी वजह से जनता को लाभ नहीं मिल पा रहा है।
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दरअसल, बड़ी संख्या में गरीब लोग सरकारी अस्पतालों में पहुंचकर डॉक्टर से स्वास्थ्य परीक्षण तो करा लेता हैं। इन अस्पतालों में कुछ दवाइयां मिल जाती हैं। न मिलने की स्थिति बाहर से दवाइयां खरीदना मजबूरी है। कई बार दवा न खरीद पाने की स्थिति में मरीज की मौत भी हो जाती है। इसी को देखते हुए प्रधानमंत्री जन औषधि योजना की शुरूआत की गई थी। औषधि केंद्र न खुलने से जिले की 27 लाख की आबादी पीएम की महत्वपूर्ण योजना से वंचित हैं। यह हाल तब है जब जिला प्रदेश के पिछड़े जनपदों में शुमार है। सीएमओ डॉ. आरके मिश्र ने बताया कि प्राइवेट फर्म को इसकी जिम्मेदारी शासन की ओर से दी गई थी। लेकिन अब तक फर्म ने काम नहीं शुरू किया। इसकी वजह से जिला अस्पताल में जन औषधि केंद्र नहीं खुल सका। इसे लेकर शासन को पत्र लिखा गया है। उम्मीद है कि जल्द ही जन औषधि केंद्र जिला अस्पताल में खुल जाएगा।
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जिला अस्पताल में एक हजार मरीज आते है प्रतिदिन
जिला अस्पताल की ओपीडी में प्रतिदिन 800 से 1000 मरीज स्वास्थ्य परीक्षण के लिए आते हैं। इसके साथ ही प्रतिदिन औसतन 80 मरीज इमरजेंसी में आते हैं। चिकित्सकों द्वारा जांच परीक्षण के बाद अस्पताल में उपलब्ध न होने पर कई दवाइयां बाहर से मरीजों को खरीदनी पड़ती हैं। अगर औषधि केंद्र होता तो इन मरीजों को बाहर से दवा भी नहीं लेनी पड़ती।
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घोषणा तक सीमित रह गई योजना
जन औषधि केंद्र के मुद्दे पर इटवा कस्बा निवासी अनिल कसौधन, कमरूजमा ने कहा कि जन औषधि केंद्र स्थापित किए जाने की घोषणा हुई थी तो लगा कि अब गरीब भी बीमारी होने पर इलाज करा सकेंगे और दवा खरीद पाएंगे। लेकिन यह योजना जिले में अभी तक शुरू नहीं हो पाई है। जबकि प्रदेश के अन्य जिलों में केंद्र चल रहा है। यह जिम्मेदारों की उदासीनता है कि जिसकी वजह से जनता को लाभ नहीं मिल पा रहा है।