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धन के अभाव में अटका पड़ा 24 धार्मिक स्थलों का जीर्णोद्धार का कार्य
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धन की कमी से 24 धार्मिक स्थलों का जीर्णोद्धार अटका
पर्यटन विभाग ने तीन साल पहले दिया था प्रस्ताव, अब तक नहीं मिली रकम
जिला योजना के अनुमोदन के बाद भी शासन से नहीं हो रहा धन का आवंटन
संवाद न्यूज एजेंसी
सिद्धार्थनगर। पर्यटन विभाग के 24 धार्मिक स्थलों के जीर्णोद्धार की योजना धन आवंटन नहीं होने से तीन वर्ष से अधर में लटकी है। राज्य वित्त से इन धार्मिक स्थलों के उच्चीकरण एवं मरम्मत आदि कार्य के लिए जिला योजना के माध्यम से दो बार भेजे प्रस्ताव पर तीन वर्ष से कोई धन आवंटन नहीं हुआ।
जिले के प्रमुख धार्मिक स्थलों के जीर्णोद्धार कराने की कार्ययोजना पर्यटन विभाग ने वित्तीय वर्ष 2018-19 में जिला योजना के अनुमोदन से धन स्वीकृति के लिए शासन को भेजी थी। 25 धार्मिक स्थलों के जीर्णोद्धार के लिए एक करोड़ के प्रस्ताव पर शासन से राज्य वित्त से सिर्फ 1.77 लाख रुपये आवंटित हुए। इससे एक धार्मिक स्थल पर कुछ कार्य कराए जा सके। इसके बाद वित्तीय वर्ष 2019-20 में पर्यटन विभाग ने एक बार फिर से 25 धार्मिक स्थलों की मरम्मत एवं उच्चीकरण संबंधी 2.5 करोड़ रुपये लागत संबंधी प्रस्ताव भेजा गया। जिला योजना से अनुमोदित इस प्रस्ताव के सापेक्ष शासन से धन का आवंटन नहीं हुआ।
धार्मिक स्थलों की मरम्मत एवं उच्चीकरण कार्य संबंधी प्रस्ताव पर धन आवंटन नहीं होने से इनका जीर्णोद्धार नहीं कराया जा सका है। जैसे ही धन का आवंटन होगा कार्य शुरू करा दिया जाएगा।
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- अरविंद राय, जिला पर्यटन अधिकारी
इन धार्मिक स्थलों का होना है जीर्णोद्धार
पर्यटन विभाग ने शहर के प्रमुख धार्मिक स्थल श्री सिहेंश्वरी देवी मंदिर, स्टेशन रोड स्थित रामजानकी मंदिर, बर्डपुर के देवियापुर स्थित समय माता स्थान, डुमरियागंज के चौखड़ा स्थित शिव मंदिर, शोहरतगढ़ के भिरिंडा माता स्थल, मिठवल के कुरैसिया स्थित शिव मंदिर, उड़वलिया स्थित हनुमान मंदिर, इटवा के सेमरी स्थित शिव मंदिर, बभनी के मनोहरपुर स्थित श्रीरामजानकी मंदिर, बिस्कोहर स्थित शिवचरण पोखरा पर प्राचीन मंदिर स्थल, सेमरी स्थित शिव मंदिर, बांसी के बेलौहा स्थित शिवमंदिर, लोहर स्थित शिवमंदिर, शाहपुर के ठाकुरद्वारा मंदिर के जीर्णोद्धार की कार्ययोजना बनाई है।
18 स्थलों के जीर्णोद्धार का भेजा प्रस्ताव
पर्यटन विभाग ने इस वित्तीय वर्ष 2020-21 में भी धार्मिक एवं अन्य प्रमुख स्थलों के जीर्णोद्धार की कार्ययोजना बनाई है। इसमें डुमरियागंज के सिकहरा स्थित आमी नदी के उद्गम स्थल को पर्यटन स्थल के तौर पर विकसित करने और पर्यटन कार्यालय के उच्चीकरण का भी प्रस्ताव शामिल है। पर्यटन अधिकारी अरविंद राय ने बताया कि विभिन्न मंदिर के जीर्णोद्धार किए जाने से यहां आने वाले श्रद्धालुओं की तादाद बढ़ेगी और पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा।
प्रस्ताव में ही हुई कटौती
धार्मिक समेत 18 स्थलों पर जीर्णोद्धार के लिए पर्यटन विभाग ने पहले 1.80 करोड़ लागत का प्रस्ताव तैयार किया था। इस प्रस्ताव को जिला योजना में प्रस्तुत करने से पहले ही लागत में कटौती करते हुए एक करोड़ की कार्ययोजना कर दी गई। पर्यटन अधिकारी अरविंद राय ने बताया कि जिला योजना की बैठक में कार्ययोजना अनुमोदन के बाद शासन को भेजा जाएगा। शासन से कार्ययोजना की लागत के सापेक्ष राज्य वित्त से धन आवंटन किया जाता है। धन आवंटित होते ही कार्य शुरू करा दिया जाएगा।
मंदिर के पूर्वी हिस्से में भूमि का उच्चीकरण होना जरूरी है, यहां बारिश के मौसम में जलभराव हो जाता है। जिससे यहां धार्मिक एवं मांगलिक कार्यक्रमों के आयोजन में परेशानी होती है। साथ ही बाउंड्रीवाल नहीं होने के कारण छुट्टा पशु मंदिर परिसर में विचरण करते हैं। बाउंड्रीवाल निर्माण होने से मंदिर परिसर सुरक्षित हो जाएगा।
- आचार्य दिव्यांशु महराज, श्री सिहेंश्वरी मंदिर
शाहपुर (डुमरियागंज) में राप्ती नदी के किनारे स्थित ठाकुरद्वारा मंदिर के पास सीढ़ी निर्माण एवं अधूरी बाउंड्रीवाल को पूरा कराना जरूरी है। नदी की कटान से बचाने के लिए मंदिर की सुरक्षा के लिए यहां तरफ ठोकर लगाना जरूरी है। भूमि उच्चीकरण समेत मंदिर के जीर्णोद्धार किए जाने से यहां प्रतिदिन और वार्षिक मेले में आने वाले श्रद्धालुओं की तादाद बढ़ जाएगी।
- कोदई दास, मंहत, ठाकुरद्वारा मंदिर
समय माता स्थान की जमीन नीची होने के कारण श्रद्धालुओं को बारिश के मौसम में परेशानी का सामना करना पड़ता है। यहां बाउंड्रीवॉल का अभाव है, जिससे रात में अराजकतत्व भी आते-जाते हैं। बाउंड्रीवॉल का निर्माण होने से मंदिर परिसर सुरक्षित हो जाएगा। इस स्थान का जीर्णोद्धार होने और पर्यटकीय सुविधाओं का विकास होने से यहां आने वाले श्रद्धालुओं को राहत मिलेगी।
- शिवजी मिश्र, देवियापुर समय माता स्थान
भवन के प्रथम तल पर स्थित होने के कारण यहां मंदिर में चौड़ी सीढ़ी के निर्माण कराने की जरूरत है, साथ ही बाहर से आने वाले श्रद्धालुओं के लिए आवासीय, शुद्ध पेयजल समेत अन्य सुविधाओं के विकास होने से श्रद्धालुओं को परेशानी नहीं होगी। शहर के प्राचीन मंदिर में शामिल इस मंदिर का विकास किया जाना बेहद जरूरी है।
- रामचंद्र दास, महंत, स्टेशन रोड स्थित रामजानकी मंदिर
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पर्यटन विभाग ने तीन साल पहले दिया था प्रस्ताव, अब तक नहीं मिली रकम
जिला योजना के अनुमोदन के बाद भी शासन से नहीं हो रहा धन का आवंटन
संवाद न्यूज एजेंसी
सिद्धार्थनगर। पर्यटन विभाग के 24 धार्मिक स्थलों के जीर्णोद्धार की योजना धन आवंटन नहीं होने से तीन वर्ष से अधर में लटकी है। राज्य वित्त से इन धार्मिक स्थलों के उच्चीकरण एवं मरम्मत आदि कार्य के लिए जिला योजना के माध्यम से दो बार भेजे प्रस्ताव पर तीन वर्ष से कोई धन आवंटन नहीं हुआ।
जिले के प्रमुख धार्मिक स्थलों के जीर्णोद्धार कराने की कार्ययोजना पर्यटन विभाग ने वित्तीय वर्ष 2018-19 में जिला योजना के अनुमोदन से धन स्वीकृति के लिए शासन को भेजी थी। 25 धार्मिक स्थलों के जीर्णोद्धार के लिए एक करोड़ के प्रस्ताव पर शासन से राज्य वित्त से सिर्फ 1.77 लाख रुपये आवंटित हुए। इससे एक धार्मिक स्थल पर कुछ कार्य कराए जा सके। इसके बाद वित्तीय वर्ष 2019-20 में पर्यटन विभाग ने एक बार फिर से 25 धार्मिक स्थलों की मरम्मत एवं उच्चीकरण संबंधी 2.5 करोड़ रुपये लागत संबंधी प्रस्ताव भेजा गया। जिला योजना से अनुमोदित इस प्रस्ताव के सापेक्ष शासन से धन का आवंटन नहीं हुआ।
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धार्मिक स्थलों की मरम्मत एवं उच्चीकरण कार्य संबंधी प्रस्ताव पर धन आवंटन नहीं होने से इनका जीर्णोद्धार नहीं कराया जा सका है। जैसे ही धन का आवंटन होगा कार्य शुरू करा दिया जाएगा।
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- अरविंद राय, जिला पर्यटन अधिकारी
इन धार्मिक स्थलों का होना है जीर्णोद्धार
पर्यटन विभाग ने शहर के प्रमुख धार्मिक स्थल श्री सिहेंश्वरी देवी मंदिर, स्टेशन रोड स्थित रामजानकी मंदिर, बर्डपुर के देवियापुर स्थित समय माता स्थान, डुमरियागंज के चौखड़ा स्थित शिव मंदिर, शोहरतगढ़ के भिरिंडा माता स्थल, मिठवल के कुरैसिया स्थित शिव मंदिर, उड़वलिया स्थित हनुमान मंदिर, इटवा के सेमरी स्थित शिव मंदिर, बभनी के मनोहरपुर स्थित श्रीरामजानकी मंदिर, बिस्कोहर स्थित शिवचरण पोखरा पर प्राचीन मंदिर स्थल, सेमरी स्थित शिव मंदिर, बांसी के बेलौहा स्थित शिवमंदिर, लोहर स्थित शिवमंदिर, शाहपुर के ठाकुरद्वारा मंदिर के जीर्णोद्धार की कार्ययोजना बनाई है।
18 स्थलों के जीर्णोद्धार का भेजा प्रस्ताव
पर्यटन विभाग ने इस वित्तीय वर्ष 2020-21 में भी धार्मिक एवं अन्य प्रमुख स्थलों के जीर्णोद्धार की कार्ययोजना बनाई है। इसमें डुमरियागंज के सिकहरा स्थित आमी नदी के उद्गम स्थल को पर्यटन स्थल के तौर पर विकसित करने और पर्यटन कार्यालय के उच्चीकरण का भी प्रस्ताव शामिल है। पर्यटन अधिकारी अरविंद राय ने बताया कि विभिन्न मंदिर के जीर्णोद्धार किए जाने से यहां आने वाले श्रद्धालुओं की तादाद बढ़ेगी और पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा।
प्रस्ताव में ही हुई कटौती
धार्मिक समेत 18 स्थलों पर जीर्णोद्धार के लिए पर्यटन विभाग ने पहले 1.80 करोड़ लागत का प्रस्ताव तैयार किया था। इस प्रस्ताव को जिला योजना में प्रस्तुत करने से पहले ही लागत में कटौती करते हुए एक करोड़ की कार्ययोजना कर दी गई। पर्यटन अधिकारी अरविंद राय ने बताया कि जिला योजना की बैठक में कार्ययोजना अनुमोदन के बाद शासन को भेजा जाएगा। शासन से कार्ययोजना की लागत के सापेक्ष राज्य वित्त से धन आवंटन किया जाता है। धन आवंटित होते ही कार्य शुरू करा दिया जाएगा।
मंदिर के पूर्वी हिस्से में भूमि का उच्चीकरण होना जरूरी है, यहां बारिश के मौसम में जलभराव हो जाता है। जिससे यहां धार्मिक एवं मांगलिक कार्यक्रमों के आयोजन में परेशानी होती है। साथ ही बाउंड्रीवाल नहीं होने के कारण छुट्टा पशु मंदिर परिसर में विचरण करते हैं। बाउंड्रीवाल निर्माण होने से मंदिर परिसर सुरक्षित हो जाएगा।
- आचार्य दिव्यांशु महराज, श्री सिहेंश्वरी मंदिर
शाहपुर (डुमरियागंज) में राप्ती नदी के किनारे स्थित ठाकुरद्वारा मंदिर के पास सीढ़ी निर्माण एवं अधूरी बाउंड्रीवाल को पूरा कराना जरूरी है। नदी की कटान से बचाने के लिए मंदिर की सुरक्षा के लिए यहां तरफ ठोकर लगाना जरूरी है। भूमि उच्चीकरण समेत मंदिर के जीर्णोद्धार किए जाने से यहां प्रतिदिन और वार्षिक मेले में आने वाले श्रद्धालुओं की तादाद बढ़ जाएगी।
- कोदई दास, मंहत, ठाकुरद्वारा मंदिर
समय माता स्थान की जमीन नीची होने के कारण श्रद्धालुओं को बारिश के मौसम में परेशानी का सामना करना पड़ता है। यहां बाउंड्रीवॉल का अभाव है, जिससे रात में अराजकतत्व भी आते-जाते हैं। बाउंड्रीवॉल का निर्माण होने से मंदिर परिसर सुरक्षित हो जाएगा। इस स्थान का जीर्णोद्धार होने और पर्यटकीय सुविधाओं का विकास होने से यहां आने वाले श्रद्धालुओं को राहत मिलेगी।
- शिवजी मिश्र, देवियापुर समय माता स्थान
भवन के प्रथम तल पर स्थित होने के कारण यहां मंदिर में चौड़ी सीढ़ी के निर्माण कराने की जरूरत है, साथ ही बाहर से आने वाले श्रद्धालुओं के लिए आवासीय, शुद्ध पेयजल समेत अन्य सुविधाओं के विकास होने से श्रद्धालुओं को परेशानी नहीं होगी। शहर के प्राचीन मंदिर में शामिल इस मंदिर का विकास किया जाना बेहद जरूरी है।
- रामचंद्र दास, महंत, स्टेशन रोड स्थित रामजानकी मंदिर