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ओडीएफ गांव को डीएम ने लिया गोद, फिर कराया ओडीएफ
siddharthnagar
Updated Tue, 21 Aug 2018 11:09 PM IST
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अगस्त 2016 में ओडीएफ घोषित करने का लगा बोर्ड।
- फोटो : अमर उजाला
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सिद्धार्थनगर। जिले में एक ऐसा गांव है, जो हर सरकार में ओडीएफ होता है। सरकार चाहे सपा की हो या फिर भाजपा की। इस गांव को ओडीएफ घोषित कर वाहवाही लूटी जाती है। इस कवायद में अधिकारी मुख्यमंत्री तक को गुमराह करने से नहीं चूकते। मामला उस्का विकास खंड के भिटिया गांव का है। पहले से ओडीएफ इस गांव को वाहवाही में डीएम ने गोद लिया और उसे फिर से ओडीएफ घोषित कराया। साथ ही मुख्यमंत्री का कार्यक्रम कराकर जनप्रतिनिधियों के खासमखास बन गए।
2016 में ही ओडीएफ हो चुका था भिटिया गांव
स्वच्छ भारत मिशन के तहत एक अगस्त 2016 को तत्कालीन डीएम नरेंद्र शंकर पांडेय की देखरेख में पूर्व विधायक विजय पासवान के प्रयास से भिटिया गांव को खुले में शौच से मुक्त (ओडीएफ) घोषित किया गया था। जब भाजपा की सरकार बनी तो डीएम कुणाल सिल्कू ने ओडीएफ हो चुके इस गांव को गोद ले लिया। इसके कुछ दिन बाद ही इस गांव को फिर से ओडीएफ गांव घोषित किया गया। गांव के प्रधान सतीश चौधरी ने बताया कि सपा सरकार में गांव में 174 शौचालय बने थे। भाजपा की सरकार आने के बाद से गांव में एक भी शौचालय नहीं बने हैं। गांव पहले ही ओडीएफ घोषित हो चुका था। उन्होंने बताया कि 30 शौैचालय की डिमांड भेजी गई है। भिटिया गांव की आबादी करीब दो हजार है। गांव के दो टोले भी है, एक संगवा व दूसरा वेलवा। संगवा में कोई आबादी नहीं है, जबकि वेलवा में पांच घर हैं। प्रधान ने बताया कि सरकार बनने के बाद बस शौचालयों की रंगाई-पुताई कराकर गांव को चमकाने की कोशिश की गई है।
मुख्यमंत्री को भी किया गुमराह
- मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इस साल दो अप्रैल को भिटिया गांव का दौरा किया था। प्रशासन की ओर से मुख्यमंत्री को गुमराह कर गांव का दौरा कराया गया था। पूर्व की सरकार में बने शौचालयों व स्कूलों की रंगाई-पुताई कराई गई थी, जिसे दिखाकर वाहवाही लूटी गई। सपा सरकार में भी इस गांव में मुख्यसचिव आ चुके है।
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ग्राम सचिवालय बदहाल
- प्रशासन की ओर से भिटिया गांव को मुख्यमंत्री के कार्यक्रम को देखते हुए चमका तो दिया गया, लेकिन गांव के पूरब बने ग्राम सचिवालय पर किसी की नजर नहीं गई। मुख्यमंत्री को भी वहां नहीं ले जाया गया।
- पूर्व की सरकार ने स्वच्छता मिशन पर ध्यान नहीं दिया। इस सरकार में तेजी से काम हुए हैं। भिटिया गांव सपा सरकार में ओडीएफ था, लेकिन मौजूदा सरकार ने भी गांव में काफी काम कराए गए हैं।
- कुणाल सिल्कू, डीएम
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2016 में ही ओडीएफ हो चुका था भिटिया गांव
स्वच्छ भारत मिशन के तहत एक अगस्त 2016 को तत्कालीन डीएम नरेंद्र शंकर पांडेय की देखरेख में पूर्व विधायक विजय पासवान के प्रयास से भिटिया गांव को खुले में शौच से मुक्त (ओडीएफ) घोषित किया गया था। जब भाजपा की सरकार बनी तो डीएम कुणाल सिल्कू ने ओडीएफ हो चुके इस गांव को गोद ले लिया। इसके कुछ दिन बाद ही इस गांव को फिर से ओडीएफ गांव घोषित किया गया। गांव के प्रधान सतीश चौधरी ने बताया कि सपा सरकार में गांव में 174 शौचालय बने थे। भाजपा की सरकार आने के बाद से गांव में एक भी शौचालय नहीं बने हैं। गांव पहले ही ओडीएफ घोषित हो चुका था। उन्होंने बताया कि 30 शौैचालय की डिमांड भेजी गई है। भिटिया गांव की आबादी करीब दो हजार है। गांव के दो टोले भी है, एक संगवा व दूसरा वेलवा। संगवा में कोई आबादी नहीं है, जबकि वेलवा में पांच घर हैं। प्रधान ने बताया कि सरकार बनने के बाद बस शौचालयों की रंगाई-पुताई कराकर गांव को चमकाने की कोशिश की गई है।
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मुख्यमंत्री को भी किया गुमराह
- मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इस साल दो अप्रैल को भिटिया गांव का दौरा किया था। प्रशासन की ओर से मुख्यमंत्री को गुमराह कर गांव का दौरा कराया गया था। पूर्व की सरकार में बने शौचालयों व स्कूलों की रंगाई-पुताई कराई गई थी, जिसे दिखाकर वाहवाही लूटी गई। सपा सरकार में भी इस गांव में मुख्यसचिव आ चुके है।
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ग्राम सचिवालय बदहाल
- प्रशासन की ओर से भिटिया गांव को मुख्यमंत्री के कार्यक्रम को देखते हुए चमका तो दिया गया, लेकिन गांव के पूरब बने ग्राम सचिवालय पर किसी की नजर नहीं गई। मुख्यमंत्री को भी वहां नहीं ले जाया गया।
- पूर्व की सरकार ने स्वच्छता मिशन पर ध्यान नहीं दिया। इस सरकार में तेजी से काम हुए हैं। भिटिया गांव सपा सरकार में ओडीएफ था, लेकिन मौजूदा सरकार ने भी गांव में काफी काम कराए गए हैं।
- कुणाल सिल्कू, डीएम