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पहले 560थे, अब 500 ही रह गए बच्चे
Updated Mon, 18 Sep 2017 10:43 PM IST
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सिद्धार्थनगर। उच्चशिक्षा की नींव के रूप में पहचान बना चुके नगर के बुद्ध विद्यापीठ महाविद्यालय की स्थिति दयनीय है। समय के साथ बहुत कुछ बदल गया, लेकिन महाविद्यालय की स्थिति अच्छी होने के बजाय और बुरी हो गई। कारण महाविद्यालय में शिक्षकों की घोर कमी हो गई। शिक्षक लगातार सेवानिवृत्त होते गए, लेकिन उनके स्थान पर दूसरे की तैनाती नहीं हुई। हालात यह बन गया कि 16 प्रवक्ता की जगह सिर्फ चार प्रवक्ता रह गए हैं। इसमें भी एक प्रवक्ता की तैनाती अभी हाल में ही हुई है। यहां हिंदी व अंग्रेजी जैसे महत्वपूर्ण विषय के प्रवक्ता का पद खाली है। पिछले वर्ष सेवानिवृत्त प्रवक्ता पढ़ा रहे थे। इस बार उन पर भी रोक लग गई है। इसकी वजह से इन विषयों की पढ़ाई राम भरोसे है।
अव्यवस्था का आलम यह है कि पेयजल की कोई व्यवस्था नहीं है। दो हैंडपंप लगे थे जो बहुत पहले खराब हो चुके हैं। शौचालय की स्थिति दयनीय है। खेल की कोई व्यवस्था नहीं है, विद्यालय ग्राउंड झाड़ से घिर गया है। छात्रों की संख्या में इस बार कमी आ गई है, जहां पिछले वर्ष 560 छात्र थे, वहीं इस बार इनकी संख्या घटकर 500 पर पहुंच गई है। लोगों की मानें तो इसके पीछे शिक्षकों कमी बताई जा रही है।
बोले छात्र: बिन शिक्षक कैसे करें पढ़ाई
बीए तृतीय वर्ष के छात्र सरफुद्दीन, सुनील यादव, घनश्याम यादव ने कहा कि यहां सुविधा के नाम पर कुछ भी नहीं है और असुविधाओं का अंबार है। शिक्षकों की घोर कमी है। कॉलेज में न तो हैंडपंप है और न ही शौचालय। जितनी भी अव्यवस्था गिनाई जाए कम है। जिम्मेदारों की लापरवाही के कारण पूरा परिसर झाड़ से घिर गया है। वहां आने-जाने में दिक्क्त होती है।
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बोले प्राचार्य : किया जा रहा पत्राचार
प्राचार्य शशिभूषण त्रिपाठी ने बताया कि यहां सबसे बड़ी दिक्कत शिक्षकों की कमी है। पिछले वर्ष सेवानिवृत्त शिक्षक पढ़ा रहे थे, लेकिन इस वर्ष उन्हें भी यह कहते हुए रोक दिया गया कि नए शिक्षकों की तैनाती होगी। दो नए प्रवक्ता की तैनात हुई है। एक तो शिक्षण कार्य शुरू कर दिए हैं, दूसरे अभी आए नहीं हैं। फिर भी बेहतर शिक्षा देने के लिए प्रयासरत हैं। हैंडपंप खराब है उसे ठीक करवाने के लिए कहा गया है।
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अव्यवस्था का आलम यह है कि पेयजल की कोई व्यवस्था नहीं है। दो हैंडपंप लगे थे जो बहुत पहले खराब हो चुके हैं। शौचालय की स्थिति दयनीय है। खेल की कोई व्यवस्था नहीं है, विद्यालय ग्राउंड झाड़ से घिर गया है। छात्रों की संख्या में इस बार कमी आ गई है, जहां पिछले वर्ष 560 छात्र थे, वहीं इस बार इनकी संख्या घटकर 500 पर पहुंच गई है। लोगों की मानें तो इसके पीछे शिक्षकों कमी बताई जा रही है।
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बोले छात्र: बिन शिक्षक कैसे करें पढ़ाई
बीए तृतीय वर्ष के छात्र सरफुद्दीन, सुनील यादव, घनश्याम यादव ने कहा कि यहां सुविधा के नाम पर कुछ भी नहीं है और असुविधाओं का अंबार है। शिक्षकों की घोर कमी है। कॉलेज में न तो हैंडपंप है और न ही शौचालय। जितनी भी अव्यवस्था गिनाई जाए कम है। जिम्मेदारों की लापरवाही के कारण पूरा परिसर झाड़ से घिर गया है। वहां आने-जाने में दिक्क्त होती है।
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बोले प्राचार्य : किया जा रहा पत्राचार
प्राचार्य शशिभूषण त्रिपाठी ने बताया कि यहां सबसे बड़ी दिक्कत शिक्षकों की कमी है। पिछले वर्ष सेवानिवृत्त शिक्षक पढ़ा रहे थे, लेकिन इस वर्ष उन्हें भी यह कहते हुए रोक दिया गया कि नए शिक्षकों की तैनाती होगी। दो नए प्रवक्ता की तैनात हुई है। एक तो शिक्षण कार्य शुरू कर दिए हैं, दूसरे अभी आए नहीं हैं। फिर भी बेहतर शिक्षा देने के लिए प्रयासरत हैं। हैंडपंप खराब है उसे ठीक करवाने के लिए कहा गया है।