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न ‘धड़का’ दिल, न लगा मरहम
siddharthnagar
Updated Sun, 29 Jul 2018 11:12 PM IST
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सिद्धार्थनगर। संयुक्त जिला अस्पताल की हार्ट केयर यूनिट सात साल पहले बनी थी। आज यहां न कोई मशीन पहुंची और न कोई डॉक्टर। वर्तमान में यूनिट में ताला लगा हुआ है। बर्न यूनिट का भी संचालन नहीं हो रहा है। इससे जुड़े मरीजों का उपचार सर्जिकल वार्ड में होता है।
संयुक्त जिला चिकित्सालय परिसर में हृदय रोग से जुड़े मरीजों के समुचित इलाज के लिए लगभग 60 लाख रुपये की लागत से मार्च 2010 हार्ट केयर यूनिट बनकर तैयार हुई। शासन स्तर से चिकित्सकों, कर्मियों की तैनाती न होने और उपकरणों को उपलब्ध न कराने से भवन में ताला लगा हुआ है। इसके बाद प्रदेश में तीन दलों की सरकारें प्रदेश में शासन कर चुकी हैं। पर, किसी ने इस ओर ध्यान नहीं दिया। ऐसे में हृदय संबंधी बीमारी से पीड़ित बड़े शहरों या निजी चिकित्सकों पर निर्भर रहते हैं। इसी प्रकार 2009-10 में ही लगभग 40 लाख की लागत से बर्न यूनिट बनी। इस भवन पर भी ताला लगा है। इससे जुड़े मरीजों का इलाज जिला अस्पताल में स्थापित सर्जिकल वार्ड में एक किनारे व्यवस्था दी गई है। यहां समुचित उपचार नहीं हो पाता है।
मेडिकल कॉलेज रेफर किए जाते हैं मरीज
संयुक्त जिला अस्पताल के इमरजेंसी वार्ड में हार्ट से संबंधित हर सप्ताह औसतन पांच से 10 मरीज बाबा राघव दास मेडिकल कालेज गोरखपुर रेफर किए जाते हैं। इमरजेंसी ड्यूटी में बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. संजय चौधरी कहते हैं कि ऐसे मरीजों को प्राथमिक उपचार के बाद मेडिकल कॉलेज रेफर कर दिया जाता है।
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नहीं हो रही सुनवाई
हार्ट केयर, बर्न केयर यूनिट का संचालन करने को लेकर सीएमओ, सीएमएस द्वारा समय-समय पर पत्र व्यवहार किया जा रहा है। उच्च स्तरीय बैठकों में उच्चाधिकारियों के समक्ष मुद्दा उठता है। निस्तारण का आश्वासन भी मिलता है, पर बीते आठ वर्षों से जिम्मेदारों की अनदेखी जनपदवासियों को भारी पड़ रही है। केंद्र, प्रदेश में भाजपा की सरकार, जनप्रतिनिधि भी उन्हीं के हैं। इस जिले का चयन नीति आयोग ने अति पिछड़े क्षेत्रों में चयन भी किया है, बावजूद कोई पहल नहीं हो पा रही है।
हार्ट केयर यूनिट, बर्न केयर यूनिट का भवन बनकर तैयार है। इसके संचालन के लिए संसाधनों की उपलब्धता के साथ ही स्वीकृत पदों के सापेक्ष तैनाती के लिए उच्च स्तर पर पत्र लिखा गया है।
डाँ. रोचस्मति पांडेय, मुख्य चिकित्सा अधीक्षक
बोले जनप्रतिनिधि, करेंगे ठोस प्रयास
सांसद जगदंबिका पाल ने कहा कि इस मुद्दे को प्रमुख सचिव चिकित्सा, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण से मिलकर जल्द शुरू कराने के लिए प्रयास करेंगे। इसके लिए जरूरत पड़ी तो स्वास्थ्य मंत्री से भी मुलाकात कर समस्या से अवगत कराऊंगा। सदर विधायक श्याम धनी राही ने कहा कि दोनों भवनों का संचालन इस पिछड़े जनपद के लिए काफी अहम है। इसे शुरू कराने के लिए स्वास्थ्य विभाग के उच्चाधिकारियों को लिखित रूप से अवगत कराऊंगा।
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संयुक्त जिला चिकित्सालय परिसर में हृदय रोग से जुड़े मरीजों के समुचित इलाज के लिए लगभग 60 लाख रुपये की लागत से मार्च 2010 हार्ट केयर यूनिट बनकर तैयार हुई। शासन स्तर से चिकित्सकों, कर्मियों की तैनाती न होने और उपकरणों को उपलब्ध न कराने से भवन में ताला लगा हुआ है। इसके बाद प्रदेश में तीन दलों की सरकारें प्रदेश में शासन कर चुकी हैं। पर, किसी ने इस ओर ध्यान नहीं दिया। ऐसे में हृदय संबंधी बीमारी से पीड़ित बड़े शहरों या निजी चिकित्सकों पर निर्भर रहते हैं। इसी प्रकार 2009-10 में ही लगभग 40 लाख की लागत से बर्न यूनिट बनी। इस भवन पर भी ताला लगा है। इससे जुड़े मरीजों का इलाज जिला अस्पताल में स्थापित सर्जिकल वार्ड में एक किनारे व्यवस्था दी गई है। यहां समुचित उपचार नहीं हो पाता है।
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मेडिकल कॉलेज रेफर किए जाते हैं मरीज
संयुक्त जिला अस्पताल के इमरजेंसी वार्ड में हार्ट से संबंधित हर सप्ताह औसतन पांच से 10 मरीज बाबा राघव दास मेडिकल कालेज गोरखपुर रेफर किए जाते हैं। इमरजेंसी ड्यूटी में बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. संजय चौधरी कहते हैं कि ऐसे मरीजों को प्राथमिक उपचार के बाद मेडिकल कॉलेज रेफर कर दिया जाता है।
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नहीं हो रही सुनवाई
हार्ट केयर, बर्न केयर यूनिट का संचालन करने को लेकर सीएमओ, सीएमएस द्वारा समय-समय पर पत्र व्यवहार किया जा रहा है। उच्च स्तरीय बैठकों में उच्चाधिकारियों के समक्ष मुद्दा उठता है। निस्तारण का आश्वासन भी मिलता है, पर बीते आठ वर्षों से जिम्मेदारों की अनदेखी जनपदवासियों को भारी पड़ रही है। केंद्र, प्रदेश में भाजपा की सरकार, जनप्रतिनिधि भी उन्हीं के हैं। इस जिले का चयन नीति आयोग ने अति पिछड़े क्षेत्रों में चयन भी किया है, बावजूद कोई पहल नहीं हो पा रही है।
हार्ट केयर यूनिट, बर्न केयर यूनिट का भवन बनकर तैयार है। इसके संचालन के लिए संसाधनों की उपलब्धता के साथ ही स्वीकृत पदों के सापेक्ष तैनाती के लिए उच्च स्तर पर पत्र लिखा गया है।
डाँ. रोचस्मति पांडेय, मुख्य चिकित्सा अधीक्षक
बोले जनप्रतिनिधि, करेंगे ठोस प्रयास
सांसद जगदंबिका पाल ने कहा कि इस मुद्दे को प्रमुख सचिव चिकित्सा, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण से मिलकर जल्द शुरू कराने के लिए प्रयास करेंगे। इसके लिए जरूरत पड़ी तो स्वास्थ्य मंत्री से भी मुलाकात कर समस्या से अवगत कराऊंगा। सदर विधायक श्याम धनी राही ने कहा कि दोनों भवनों का संचालन इस पिछड़े जनपद के लिए काफी अहम है। इसे शुरू कराने के लिए स्वास्थ्य विभाग के उच्चाधिकारियों को लिखित रूप से अवगत कराऊंगा।