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पुत्रों की दीर्घायु के लिए माताओं ने किया हलषष्ठी व्रत
siddharthnagar
Updated Sun, 02 Sep 2018 12:07 AM IST
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अमर उजाला
- फोटो : अमर उजाला
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सिद्धार्थनगर/डुमरियागंज। पुत्रों की दीर्घायु व सुख-समृद्धि के उद्देश्य से शनिवार को माताओं ने हलषष्ठी व्रत-उपवास किया। पारंपरिक रीति रिवाज से माताओं ने कुश का पूजन-अर्चन कर मांगलिक आशीर्वाद ग्रहण किया। शहर के सिंहेश्वरी मंदिर से लेकर पुरानी नौगढ़ के शिवमंदिर में काफी भीड़ भी देखी गई। इस बीच नवविवाहिताओं ने भी व्रत रखकर पुत्र प्राप्ति का आशीर्वाद मांगा।
शनिवार सुबह महिलाओं ने महुआ का दातून करने के बाद स्नान किया। इसके बाद वह पूजन थाल में महुआ का पत्ता, महुआ, चना, तिन्नी का चावल, कुश और पीला वस्त्र लेकर पूजा करने वाले स्थानों पर पहुंचीं। इसके बाद महिलाओं ने कुश और महुआ के डंठल को जमीन में लगाकर कर उसके नीचे चना और महुआ चढ़ाया। इस दौरान महिलाओं ने कुश में गांठ लगाकर और पीला वस्त्र उसके ऊपर डालकर अपने पुत्रों के दीर्घायु की कामनाएं कीं। पूजन के बाद महिलाओं ने अलग-अलग समूह में कथा सुनाई। यह सिलसिला दोपहर तक चलता रहा।
इस दौरान डुमरियागंज डाकबंगले में मेले जैसा दृश्य दिखाई दिया। यहां बच्चों ने जमकर लुत्फ उठाया। पूजा समाप्त होने पर घर पहुंचने के बाद बिना हल चलाए वाली जमीन पर पैदा किए गए चौराई का साग और तिन्नी का चावल बनाकर व्रती महिलाओं ने व्रत पूरा किया। दीपमाला, माधुरी देवी, शशि पांडेय, संजना, रागिनी आदि ने बताया कि इस पर्व का महत्व विशेष है। इस दिन सभी महिलाएं अपने पुत्रों के दीर्घायु और पुत्र प्राप्ति के लिए व्रत रखती हैं। इस पर्व में 24 घंटे में सिर्फ एक बार ही भोजन ग्रहण कर पानी पीने की मान्यता है।
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शनिवार सुबह महिलाओं ने महुआ का दातून करने के बाद स्नान किया। इसके बाद वह पूजन थाल में महुआ का पत्ता, महुआ, चना, तिन्नी का चावल, कुश और पीला वस्त्र लेकर पूजा करने वाले स्थानों पर पहुंचीं। इसके बाद महिलाओं ने कुश और महुआ के डंठल को जमीन में लगाकर कर उसके नीचे चना और महुआ चढ़ाया। इस दौरान महिलाओं ने कुश में गांठ लगाकर और पीला वस्त्र उसके ऊपर डालकर अपने पुत्रों के दीर्घायु की कामनाएं कीं। पूजन के बाद महिलाओं ने अलग-अलग समूह में कथा सुनाई। यह सिलसिला दोपहर तक चलता रहा।
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इस दौरान डुमरियागंज डाकबंगले में मेले जैसा दृश्य दिखाई दिया। यहां बच्चों ने जमकर लुत्फ उठाया। पूजा समाप्त होने पर घर पहुंचने के बाद बिना हल चलाए वाली जमीन पर पैदा किए गए चौराई का साग और तिन्नी का चावल बनाकर व्रती महिलाओं ने व्रत पूरा किया। दीपमाला, माधुरी देवी, शशि पांडेय, संजना, रागिनी आदि ने बताया कि इस पर्व का महत्व विशेष है। इस दिन सभी महिलाएं अपने पुत्रों के दीर्घायु और पुत्र प्राप्ति के लिए व्रत रखती हैं। इस पर्व में 24 घंटे में सिर्फ एक बार ही भोजन ग्रहण कर पानी पीने की मान्यता है।
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