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हैट्रिक लगाकर तोड़ा मिथक
Thu, 23 May 2019 11:23 PM IST
गोरखपुर ब्यूरो
ब्यूरो/अमर उजाला सिद्धार्थनगर
ब्यूरो/अमर उजाला सिद्धार्थनगर
Published by: गोरखपुर ब्यूरो
Updated Thu, 23 May 2019 11:23 PM IST
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jagdambika pal
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सिद्धार्थनगर। डुमरियागंज संसदीय क्षेत्र के इतिहास में अब तक कोई प्रत्याशी ऐसा नहीं रहा, जिसने लगातार तीन बार जीत हासिल की लेकिन 17वीं लोकसभा के चुनाव में भाजपा के जगदंबिका पाल ने लगातार तीन बार निर्वाचित होकर हैट्रिक का मिथक तोड़ने में कामयाब रहे। इससे पूर्व भाजपा के रामपाल सिंह ने तीन बार जीत दर्ज की थी, पर उन्हें बीच में चुनाव में हार का सामना करना पड़ा था।
संसदीय व्यवस्था के इतिहास पर गौर करें तो डुमरियागंज में 1952 से 16वीं लोकसभा चुनाव 2014 तक विभिन्न दलों से दिग्गजों ने ताल ठोका, पर जीत दर्ज करने को कौन कहे, जमानत भी गवां बैठे। 29 दिसंबर 1988 को जनपद बनने के बाद से 1991 से 2019 के चुनाव तक लगातार तीन बार निर्वाचित होने का सेहरा सिर्फ जगदंबिका पाल के माथे बंधा। समाजवादी पार्टी के बृजभूषण तिवारी ने वर्ष 1991, 1996 व 1998 में लगातार चुनाव लड़ा, पर सिर्फ 1996 में ही उन्हें सफलता मिल सकी। मो. मुकीम वर्ष 1999, 2004 व 2009 में क्रमश: कांग्रेस व बसपा से चुनावी रणभूमि में उतरे, पर इन्हें भी सिर्फ एक बार 2004 के चुनाव में बसपा से ही निर्वाचित होने का मौका मिला। इंजीनियर रिटायर रामपाल सिंह को 1991 में पहली बार भाजपा से प्रत्याशी बनाया और कद्दावर नेता मोहसिना किदवई को पराजित करने में सफल रहे।
वर्ष 1996 में सपा के बृजभूषण तिवारी के हाथों पराजित होकर दूसरे नंबर पर संतोष किया। वर्ष 1998 में पुन: राम पाल सिंह निर्वाचित हो गए। इनके नाम लगातार तीन बार जीत दर्ज करने का रिकॉर्ड नहीं बन सका। ऐसे में 17वीं लोकसभा के चुनाव में पिछले दो बार से निर्वाचित हो चुके सांसद जगदंबिका पाल के समक्ष हैट्रिक लगाने की कठिन चुनौती थी। मुख्यालय पर संपन्न मतगणना के बाद आए परिणाम में जगदंबिका पाल ने तीसरी बार निर्वाचित होकर डुमरियागंज के इतिहास में अपना नाम दर्ज कराने के साथ ही मिथक तोड़ने में कामयाब रहे।
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संसदीय व्यवस्था के इतिहास पर गौर करें तो डुमरियागंज में 1952 से 16वीं लोकसभा चुनाव 2014 तक विभिन्न दलों से दिग्गजों ने ताल ठोका, पर जीत दर्ज करने को कौन कहे, जमानत भी गवां बैठे। 29 दिसंबर 1988 को जनपद बनने के बाद से 1991 से 2019 के चुनाव तक लगातार तीन बार निर्वाचित होने का सेहरा सिर्फ जगदंबिका पाल के माथे बंधा। समाजवादी पार्टी के बृजभूषण तिवारी ने वर्ष 1991, 1996 व 1998 में लगातार चुनाव लड़ा, पर सिर्फ 1996 में ही उन्हें सफलता मिल सकी। मो. मुकीम वर्ष 1999, 2004 व 2009 में क्रमश: कांग्रेस व बसपा से चुनावी रणभूमि में उतरे, पर इन्हें भी सिर्फ एक बार 2004 के चुनाव में बसपा से ही निर्वाचित होने का मौका मिला। इंजीनियर रिटायर रामपाल सिंह को 1991 में पहली बार भाजपा से प्रत्याशी बनाया और कद्दावर नेता मोहसिना किदवई को पराजित करने में सफल रहे।
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वर्ष 1996 में सपा के बृजभूषण तिवारी के हाथों पराजित होकर दूसरे नंबर पर संतोष किया। वर्ष 1998 में पुन: राम पाल सिंह निर्वाचित हो गए। इनके नाम लगातार तीन बार जीत दर्ज करने का रिकॉर्ड नहीं बन सका। ऐसे में 17वीं लोकसभा के चुनाव में पिछले दो बार से निर्वाचित हो चुके सांसद जगदंबिका पाल के समक्ष हैट्रिक लगाने की कठिन चुनौती थी। मुख्यालय पर संपन्न मतगणना के बाद आए परिणाम में जगदंबिका पाल ने तीसरी बार निर्वाचित होकर डुमरियागंज के इतिहास में अपना नाम दर्ज कराने के साथ ही मिथक तोड़ने में कामयाब रहे।
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