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रास्ते की भूमि को लेकर 29 को जलसत्याग्रह करेंगे ग्रामीण
Wed, 22 May 2019 11:15 PM IST
गोरखपुर ब्यूरो
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Published by: गोरखपुर ब्यूरो
Updated Wed, 22 May 2019 11:15 PM IST
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जमीन
- फोटो : अमर उजाला
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सिद्धार्थनगर। उस्का ब्लॉक क्षेत्र के फुलवरिया गांव के भलुहा टोला के ग्रामीण गांव तक रास्ते की जमीन के लिए 29 मई को जमुआर नाले में महिलाओं व बच्चों के साथ जल सत्याग्रह करेंगे। ग्रामीणों ने डीएम समेत अन्य अधिकारियों को पत्र भेजकर रास्ता के लिए भूमि उपलब्ध कराने की मांग की है।
उस्का क्षेत्र के फुलवरिया गांव के भलुहा टोला निवासी इंद्रदेव प्रसाद, लवकुश पासवान, रामचंदर, राधिका, राजदेव, किशोरी, शिवनाथ, चिनकी, राजेंद्र, मोतीलाल व शांति आदि ने डीएम समेत अन्य अधिकारियों को पत्र भेजकर कहा है कि वर्तमान में गांव में चकबंदी कार्य चल रहा है। इस दौरान अधिकारियों से गांव तक जाने के लिए रास्ते की भूमि निकालने की मांग की गई, लेकिन उन्होंने सही जवाब नहीं दिया। चकबंदी के दौरान ही गांव तक जाने के लिए रास्ते की भूमि निकाली जा सकती है। रास्ते का समाधान न होने पर हम ग्रामीण महिलाओं व बच्चों के साथ 29 मई को जमुआर नाला में जल सत्याग्रह करेंगे। इस दौरान किसी प्रकार का हादसा होता है तो शासन प्रशासन इसके लिए जिम्मेदार होगा।
आजादी के बाद से रास्ते को लेकर दंश झेल रहे ग्रामीण
सिद्धार्थनगर। आजादी के बाद से ही उस्का ब्लॉक क्षेत्र के फुलवरिया गांव के भलुहा टोला के तीन सौ से अधिक आबादी रास्ते के लिए सांसत झेल रही है। गांव उस्का-सोहांस मार्ग पर करछुलिया जमुआर नाला पुल से आठ सौ मीटर की दूरी पर स्थित है। गांव से लेकर मुख्य सड़क तक इसी आठ सौ मीटर दूरी के बीच रास्ते के लिए भूमि उपलब्ध नहीं है।
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तीन माह तक जलमग्न रहता है गांव
भलुहा गांव के चारो ओर रिंग बांध होने के साथ ही कोई रास्ता नहीं होने से बरसात में तीन माह तक यह गांव पानी से घिरा रहता है। पार्वती, छबि लाल, सीमा, किसलावती, चंदमति, दयाराम, रोहित व गीता आदि का कहना है कि बारिश व बाढ़ के दौरान जुलाई से सितंबर तक हमारा गांव े पानी से घिर जाता है।
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उस्का क्षेत्र के फुलवरिया गांव के भलुहा टोला निवासी इंद्रदेव प्रसाद, लवकुश पासवान, रामचंदर, राधिका, राजदेव, किशोरी, शिवनाथ, चिनकी, राजेंद्र, मोतीलाल व शांति आदि ने डीएम समेत अन्य अधिकारियों को पत्र भेजकर कहा है कि वर्तमान में गांव में चकबंदी कार्य चल रहा है। इस दौरान अधिकारियों से गांव तक जाने के लिए रास्ते की भूमि निकालने की मांग की गई, लेकिन उन्होंने सही जवाब नहीं दिया। चकबंदी के दौरान ही गांव तक जाने के लिए रास्ते की भूमि निकाली जा सकती है। रास्ते का समाधान न होने पर हम ग्रामीण महिलाओं व बच्चों के साथ 29 मई को जमुआर नाला में जल सत्याग्रह करेंगे। इस दौरान किसी प्रकार का हादसा होता है तो शासन प्रशासन इसके लिए जिम्मेदार होगा।
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आजादी के बाद से रास्ते को लेकर दंश झेल रहे ग्रामीण
सिद्धार्थनगर। आजादी के बाद से ही उस्का ब्लॉक क्षेत्र के फुलवरिया गांव के भलुहा टोला के तीन सौ से अधिक आबादी रास्ते के लिए सांसत झेल रही है। गांव उस्का-सोहांस मार्ग पर करछुलिया जमुआर नाला पुल से आठ सौ मीटर की दूरी पर स्थित है। गांव से लेकर मुख्य सड़क तक इसी आठ सौ मीटर दूरी के बीच रास्ते के लिए भूमि उपलब्ध नहीं है।
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तीन माह तक जलमग्न रहता है गांव
भलुहा गांव के चारो ओर रिंग बांध होने के साथ ही कोई रास्ता नहीं होने से बरसात में तीन माह तक यह गांव पानी से घिरा रहता है। पार्वती, छबि लाल, सीमा, किसलावती, चंदमति, दयाराम, रोहित व गीता आदि का कहना है कि बारिश व बाढ़ के दौरान जुलाई से सितंबर तक हमारा गांव े पानी से घिर जाता है।