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148 पंचायतों में पेयजल पहुंचाने में खर्च होगा तीन सौ करोड़
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श्रावस्ती। ग्रामीण इलाकों में भी अब रहने वाले लोगों को पेयजल मिलेगा। इसके लिए जलजीवन मिशन फेज वन के तहत 148 पंचायतें चयनित की गई हैं। यहां 300 करोड़ रुपये खर्च करके पेयजल घरों तक पहुंचाया जाएगा। 128 पंचायतों का इस्टीमेट भी शासन को भेजा जा चुका है। इसमें से 29 पंचायतों में इस्टीमेट को स्वीकृति भी मिल गई है।
तराई वाले इस जिले के पानी में आर्सेनिक की मात्रा ज्यादा है। जिसके चलते चर्मरोग सहित अन्य रोगों से लोग परेशान रहते हैं। इसकी पुष्टि कई बार पानी की जांच में हो चुकी है। सबसे ज्यादा स्थिति भारत नेपाल सीमा पर स्थित सिरसिया, जमुनहा व हरिहरपुररानी की खराब है। यहां तो आलम यह है कि यदि पानी निकाल कर कुछ देर रख दिया जाए तो वह पीला व दुर्गंधित हो जाता है। इन्हीं समस्याओं को समाप्त करने के लिए भारत सरकार का जलजीवन मिशन फेज वन शुरू हो गया है। इसके तहत 148 पंचायतें जिले में चिह्नित की गई है। जिन्हें वाटर पाइप लाइन से जोड़ा जाएगा।
इस काम पर करीब तीन सौ करोड़ रुपये खर्च होगा। इसके लिए कार्यदायी संस्था एलएनटी ने 128 पंचायतों का इस्टीमेट बना कर भेज दिया है। जिसमें से 29 पंचायतों में काम करने की स्वीकृति मिल गई है, इस पर करीब 90 करोड़ रुपये खर्च होगा। सीडीओ ईशान प्रताप सिंह ने बताया कि जलजीवन मिशन के लिए सर्वे व इस्टीमेट बनाने का काम प्रारंभ हो गया है। कुछ स्थानों का स्टीमेट स्वीकृत हो गया है। शेष का जल्द ही स्वीकृत हो जाएगा।
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मिशन के तहत होने हैं चार काम
जलजीवन मिशन के तहत चार काम होने है। इसमें पाइप लाइन बिछाना, पंपहाउस, बाउंड्रीवाल व सोलर पैनल लगाना है। इसी काम के लिए यह पूरा पैसा खर्च होगा। पेयजल योजना में पंप व पाइप लाइन की क्षमता जनसंख्या पर आधारित होगी। प्रति व्यक्ति को प्रतिदिन 65 लीटर पेयजल मिले, इसी को आधार मानते हुए क्षमता तैयार की जाएगी।
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तराई वाले इस जिले के पानी में आर्सेनिक की मात्रा ज्यादा है। जिसके चलते चर्मरोग सहित अन्य रोगों से लोग परेशान रहते हैं। इसकी पुष्टि कई बार पानी की जांच में हो चुकी है। सबसे ज्यादा स्थिति भारत नेपाल सीमा पर स्थित सिरसिया, जमुनहा व हरिहरपुररानी की खराब है। यहां तो आलम यह है कि यदि पानी निकाल कर कुछ देर रख दिया जाए तो वह पीला व दुर्गंधित हो जाता है। इन्हीं समस्याओं को समाप्त करने के लिए भारत सरकार का जलजीवन मिशन फेज वन शुरू हो गया है। इसके तहत 148 पंचायतें जिले में चिह्नित की गई है। जिन्हें वाटर पाइप लाइन से जोड़ा जाएगा।
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इस काम पर करीब तीन सौ करोड़ रुपये खर्च होगा। इसके लिए कार्यदायी संस्था एलएनटी ने 128 पंचायतों का इस्टीमेट बना कर भेज दिया है। जिसमें से 29 पंचायतों में काम करने की स्वीकृति मिल गई है, इस पर करीब 90 करोड़ रुपये खर्च होगा। सीडीओ ईशान प्रताप सिंह ने बताया कि जलजीवन मिशन के लिए सर्वे व इस्टीमेट बनाने का काम प्रारंभ हो गया है। कुछ स्थानों का स्टीमेट स्वीकृत हो गया है। शेष का जल्द ही स्वीकृत हो जाएगा।
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मिशन के तहत होने हैं चार काम
जलजीवन मिशन के तहत चार काम होने है। इसमें पाइप लाइन बिछाना, पंपहाउस, बाउंड्रीवाल व सोलर पैनल लगाना है। इसी काम के लिए यह पूरा पैसा खर्च होगा। पेयजल योजना में पंप व पाइप लाइन की क्षमता जनसंख्या पर आधारित होगी। प्रति व्यक्ति को प्रतिदिन 65 लीटर पेयजल मिले, इसी को आधार मानते हुए क्षमता तैयार की जाएगी।