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दुख से मुक्ति के साधन हैं चार आर्य सत्य : दीपालोक

Tue, 10 Feb 2026 12:55 AM IST
लखनऊ ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, श्रावस्ती
संवाद न्यूज एजेंसी, श्रावस्ती Updated Tue, 10 Feb 2026 12:55 AM IST
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The four noble truths are the means of freedom from suffering: Deepalok
गंध कुटी में पूजा करते श्रीलंका के अनुयायी।- संवाद
कटरा। बौद्ध तपोस्थली श्रावस्ती सोमवार को श्रीलंका से आए अनुयायियों के 60 सदस्यीय दल से गुलजार रही। सभी ने बौद्ध भिक्षु दीपालोक के नेतृत्व में पारंपरिक ढंग से गंधकुटी पर पूजा-अर्चना की। इस दौरान बौद्ध सभा का भी आयोजन किया गया।
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बौद्ध सभा को संबोधित करते हुए भिक्षु दीपालोक ने भगवान बुद्ध के चार आर्य सत्यों और अष्टांगिक मार्ग के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि ये सिद्धांत दुख से मुक्ति और मानसिक शांति प्राप्त करने के मार्गदर्शक हैं।
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उन्होंने अहिंसा, सत्य, संतोष, करुणा और मध्यम मार्ग अपनाने की आवश्यकता पर बल दिया। साथ ही अति भोग और अति तपस्या से दूर रहने की बात भी कही। पूजन के दौरान बौद्ध अनुयायियों ने बुद्धम शरणम गच्छामि, धम्मम शरणम गच्छामि, संघम शरणम गच्छामि के उद्घोष के साथ परिक्रमा की।
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इसके बाद सभी ने बोधि वृक्ष, शिवली स्तूप, कौशाम कुटी, सूर्यकुंड, सभा मंडप, आनंद कुटी, कच्ची कुटी-पक्की कुटी आदि स्थलों का भ्रमण कर उनके इतिहास की जानकारी ली।
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