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Shravasti News: बुआ के साथ सो रही थी तबस्सुम, पिता ने मौत बनकर दी दस्तक

Sat, 15 Nov 2025 01:22 AM IST
Lucknow Bureau लखनऊ ब्यूरो
Updated Sat, 15 Nov 2025 01:22 AM IST
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Tabassum was sleeping with her aunt, when her father arrived as death.
मां फातिमा के सा​थ बिलखती रूबीना। - फोटो : मां फातिमा के सा​थ बिलखती रूबीना।
इकौना (श्रावस्ती)। मेरी भतीजी तबस्सुम मुझे बहुत मानती थी..., मेरे ही पास ज्यादातर रहती थी...। बृहस्पतिवार रात वो मेरे साथ ही सो रही थी...। रात लगभग 10 बजे भाई रोज अली पहुंचे और तबस्सुम को जगा कर अपने साथ लेकर चले गए...। काश मैंने तबस्सुम को न ले जाने दिया होता तो उसकी जान बच सकती थी...। उक्त बातें मृतक रोज अली की सौतेली बहन व मृतका तबस्सुम की बुआ रुबीना ने बिलखते हुए बताईं।
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रुबीना ने बताया कि टंडवा महंत के खललपुरवा निवासी बड़ी बहन बाजबुल की सास का इंतकाल हो गया था। बृहस्पतिवार को उनकी रूहानी विदाई का कार्यक्रम था। भाई रोज अली, मां फातिमा व अन्य परिजन उसमें शामिल होने गए थे। इस दौरान तबस्सुम मेरे पास ही थी। वहीं, गुलनाज और मुईन भाभी शहनाज के साथ उनके कमरे में थे। रात लगभग आठ बजे भाई रोज अली व अन्य परिजन घर लौटे। इस दौरान फातिमा उनके पास लेटे-लेट सो गई थी। रात लगभग 10 बजे भाई आए और तबस्सुम को अपने साथ लेकर कमरे में चले गए।
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शोर सुनकर पहुंचे, दरवाजा तोड़ा तो सन्न रह गए : इंसाद
मृतक रोज अली के पड़ोस में रहने वाले व कमरे का दरवाजा तोड़ने वाले इंसाद अली ने बताया कि सुबह वो खेत में काम कर रहे थे। इस दौरान अचानक से रोज अली के घर से रोने-चीखने की आवाज सुनाई दी। मैं दौड़कर उनके घर पहुंचा तो सभी लोग दरवाजा खोलने का प्रयास कर रहे थे। कोई कुछ बता नहीं पा रहा था। बस सब मर गए...सब मर गए का शोर सुनाई दे रहा था। मैंने भी दरवाजा खोलने का प्रयास किया, लेकिन दरवाजा अंदर से बंद था। इस पर मैंने पैर से कई बार दरवाजे पर ठोकर मारी, इससे दरवाजा खुल गया। अंदर जाकर देखा तो रोज अली का शव फंदे से लटक रहा था। वहीं परिवार के अन्य सदस्यों के शव बिस्तर पर पड़े थे।
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गर्म था रोज अली का शव, बचने की संभावना में नीचे उतारा
इंसाद ने बताया कि दरवाजा तोड़कर जब वो लोग अंदर पहुंचे तो रोज अली का शरीर गर्म था। इससे हम सभी ने उनके जीवित होने का अंदेशा लगाया और तत्काल शव को फंदे से नीचे उतारा, लेकिन रोज अली की भी मौत हो चुकी थी।

मिन्नतों के बाद जन्मा था मुईन
घटना स्थल पर बिलख रही महिलाओं ने बताया कि रोज अली की पत्नी को एक के बाद एक लगातार दो बेटियां हुईं। इस पर दरगाह व मजारों पर मिन्नतेें मांगी। मिन्नतों के बाद मुईन का जन्म हुआ, लेकिन रोज अली ने अपने एकलौते बेटे की भी हत्या कर दी।


मुंबई में ही पढ़ती थीं दोनों बेटियां
परिजनों ने बताया कि रोज अली के साथ-साथ उनके सभी भाई राजगीर थे और मुंबई में रहकर घर बनाते थे। बच्चों को पढ़ाने के लिए सभी अपने परिवार को भी अपने साथ रखते थे। रोज अली की दोनों बेटियां तबस्सुम व गुलनाज भी मुंबई में पढ़ाई कर रही थी।
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