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गर्मी में परेशान है गौरैया, बचाना है आपको
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श्रावस्ती। घर के आंगन में फुदकने वाली गौरैया का अस्तित्व गर्मी के कारण खतरे में है। इसे बचाने के लिए पक्षी प्रेमियों व वन विभाग ने आम लोगों से अपील की है। इसमें घरों के बाहर व छतों पर गौरैया सहित अन्य पक्षियों के लिए पानी व चारा रखने को कहा गया है। भिनगा में पक्षी प्रेमियों ने कुछ लोगों को घोंसला भी दिया है।
गांव हो या शहर खरफूस व खपरैल के मकान आलीशान ईंट व पत्थर के मकानों में बदल गए हैं। घर में आंगन के साथ ही अनाज भी गायब हो गया है। घर के आंगन में लगे हैंडपंप व बाल्टी में रखे पानी के स्थान पर छत पर टंकी लगने लगी है। अब न तो गौरैया को पीने के लिए शुद्ध पानी मिल पा रहा है और न ही खाने के लिए दाना। इसी के साथ भीषण गर्मी गौरैया सहित अन्य पक्षियों के लिए किसी मुसीबत से कम नहीं है। इसीलिए गौरैया संरक्षण करने वालों के साथ ही वन विभाग ने आम लोगों से इस लुप्त हो रहे पक्षी को बचाने की अपील की है।
वन विभाग ने कहा है कि ज्यादा से ज्यादा लोग अपने घरों की छतों पर छज्जे या फिर बरामदे में घोंसला बनाकर पानी व दाना जरूर रखें। वर्षों से भिनगा में गौरैया संरक्षण करने वाले जमीर अहमद बताते हैं कि वह कई वर्षों से गौरैया संरक्षण के कार्य कर रहे हैं। इस कार्य में उनके परिवार के अन्य लोग भी साथ दे रहे हैं। उन्होंने अपने घर, बालकनी, सीढ़ी व छत पर गौरैया को आश्रय देने के लिए एक छोटा सा लकड़ी का घर बनाया है। खास बात यह है कि इनमें गौरैया आती हैं। घासफूस एकत्र करती है और अंडे भी देती हैं। वह कहते है कि हमें गौरैया बचाने का प्रयास करना चाहिए।
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अब कहीं भी खरफूस व खपरैल का मकान नहीं बचा है इसीलिए गौरैया का आशियाना धीरे-धीरे समाप्त हो गया है। पहले किसान बाजरा, धान व गेहूं की फसल बचाने के लिए खेतों में टिन व कपड़े का स्टेच्यू खड़ा कर देते थे। अब कीटनाशक दवाओं का ज्यादा इस्तेमाल किया जाता है। मोबाइल टॉवर का रेडिएशन भी पक्षियों की संख्या घटाने का मुख्य कारण है।
गौरैया की 26 प्रजाति पाई जाती हैं। शहरी इलाकों में हाउस स्पैरो, स्पेनिश स्पैरो, सिंड स्पैरो, डेड सी स्पैरो और ट्री स्पैरो प्रजाति की गौरैया दिखती हैं। अब इन पर संकट मंडरा रहा है। इनको बचाने के लिए सभी को आगे आना चाहिए। इस समय गर्मी ज्यादा है इसलिए अपने घरों में दाना व पानी की व्यवस्था जरूर करें।
- एपी यादव, डीएफओ
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गांव हो या शहर खरफूस व खपरैल के मकान आलीशान ईंट व पत्थर के मकानों में बदल गए हैं। घर में आंगन के साथ ही अनाज भी गायब हो गया है। घर के आंगन में लगे हैंडपंप व बाल्टी में रखे पानी के स्थान पर छत पर टंकी लगने लगी है। अब न तो गौरैया को पीने के लिए शुद्ध पानी मिल पा रहा है और न ही खाने के लिए दाना। इसी के साथ भीषण गर्मी गौरैया सहित अन्य पक्षियों के लिए किसी मुसीबत से कम नहीं है। इसीलिए गौरैया संरक्षण करने वालों के साथ ही वन विभाग ने आम लोगों से इस लुप्त हो रहे पक्षी को बचाने की अपील की है।
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वन विभाग ने कहा है कि ज्यादा से ज्यादा लोग अपने घरों की छतों पर छज्जे या फिर बरामदे में घोंसला बनाकर पानी व दाना जरूर रखें। वर्षों से भिनगा में गौरैया संरक्षण करने वाले जमीर अहमद बताते हैं कि वह कई वर्षों से गौरैया संरक्षण के कार्य कर रहे हैं। इस कार्य में उनके परिवार के अन्य लोग भी साथ दे रहे हैं। उन्होंने अपने घर, बालकनी, सीढ़ी व छत पर गौरैया को आश्रय देने के लिए एक छोटा सा लकड़ी का घर बनाया है। खास बात यह है कि इनमें गौरैया आती हैं। घासफूस एकत्र करती है और अंडे भी देती हैं। वह कहते है कि हमें गौरैया बचाने का प्रयास करना चाहिए।
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अब कहीं भी खरफूस व खपरैल का मकान नहीं बचा है इसीलिए गौरैया का आशियाना धीरे-धीरे समाप्त हो गया है। पहले किसान बाजरा, धान व गेहूं की फसल बचाने के लिए खेतों में टिन व कपड़े का स्टेच्यू खड़ा कर देते थे। अब कीटनाशक दवाओं का ज्यादा इस्तेमाल किया जाता है। मोबाइल टॉवर का रेडिएशन भी पक्षियों की संख्या घटाने का मुख्य कारण है।
गौरैया की 26 प्रजाति पाई जाती हैं। शहरी इलाकों में हाउस स्पैरो, स्पेनिश स्पैरो, सिंड स्पैरो, डेड सी स्पैरो और ट्री स्पैरो प्रजाति की गौरैया दिखती हैं। अब इन पर संकट मंडरा रहा है। इनको बचाने के लिए सभी को आगे आना चाहिए। इस समय गर्मी ज्यादा है इसलिए अपने घरों में दाना व पानी की व्यवस्था जरूर करें।
- एपी यादव, डीएफओ