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Shravasti News: बुलियन बिक्री रोकें सराफा कारोबारी
Sun, 17 May 2026 01:02 AM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, श्रावस्ती
संवाद न्यूज एजेंसी, श्रावस्ती
Updated Sun, 17 May 2026 01:02 AM IST
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कलेक्ट्रेट में सराफा कारोबारियों के साथ बैठक करतीं डीएम । स्रोत- सूचना विभाग
श्रावस्ती। डीएम अन्नपूर्णा गर्ग व एसपी राहुल भाटी ने शनिवार को कलेक्ट्रेट सभागार में सराफा व्यापारियों के साथ बैठक कर व्यापारियों से देशहित में सोने की बुलियन (ईंट/बिस्कुट) की खरीद-बिक्री को हतोत्साहित करने की अपील की।
बैठक में हिस्सेदारी करते हुए डीएम अन्नपूर्णा गर्ग ने कहा कि भारत प्रति वर्ष लगभग 24-24.5 करोड़ मीट्रिक टन कच्चे तेल का आयात करता है, जिस पर औसतन 130-135 अरब डॉलर (लगभग 11.12 लाख करोड़ रुपये) खर्च होते हैं। खाड़ी युद्ध के चलते कच्चे तेल के आयात में गंभीर समस्या आ रही है और इसके मूल्य में वृद्धि हुई है। इससे देश को अत्यधिक विदेशी मुद्रा खर्च करना पड़ रही हैं।
ऐसी स्थिति में विदेशी मुद्रा के व्यय पर नियंत्रण करना आवश्यक है। इसलिए, ठोस सोना, सोने के सिक्के और गोल्ड बार की बिक्री न करके केवल आभूषणों की बिक्री करना देश हित में होगा। डीएम की अपील पर सराफा व्यापारी एसोसिएशन और स्थानीय व्यापारियों ने अपनी पूर्ण सहमति व्यक्त की।
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उपायुक्त राज्य कर आनंद कुमार राय ने बताया कि देश में घरेलू स्तर पर केवल एक-दो टन सोने का उत्पादन होता है। जबकि प्रति वर्ष लगभग 700-800 टन सोने का आयात बाहर से होता है, जिस पर लगभग 72 अरब डॉलर (लगभग 6 लाख करोड़ रुपये) की विदेशी मुद्रा खर्च होती है।
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बैठक में हिस्सेदारी करते हुए डीएम अन्नपूर्णा गर्ग ने कहा कि भारत प्रति वर्ष लगभग 24-24.5 करोड़ मीट्रिक टन कच्चे तेल का आयात करता है, जिस पर औसतन 130-135 अरब डॉलर (लगभग 11.12 लाख करोड़ रुपये) खर्च होते हैं। खाड़ी युद्ध के चलते कच्चे तेल के आयात में गंभीर समस्या आ रही है और इसके मूल्य में वृद्धि हुई है। इससे देश को अत्यधिक विदेशी मुद्रा खर्च करना पड़ रही हैं।
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ऐसी स्थिति में विदेशी मुद्रा के व्यय पर नियंत्रण करना आवश्यक है। इसलिए, ठोस सोना, सोने के सिक्के और गोल्ड बार की बिक्री न करके केवल आभूषणों की बिक्री करना देश हित में होगा। डीएम की अपील पर सराफा व्यापारी एसोसिएशन और स्थानीय व्यापारियों ने अपनी पूर्ण सहमति व्यक्त की।
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उपायुक्त राज्य कर आनंद कुमार राय ने बताया कि देश में घरेलू स्तर पर केवल एक-दो टन सोने का उत्पादन होता है। जबकि प्रति वर्ष लगभग 700-800 टन सोने का आयात बाहर से होता है, जिस पर लगभग 72 अरब डॉलर (लगभग 6 लाख करोड़ रुपये) की विदेशी मुद्रा खर्च होती है।