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नहीं थम रही अवैध कटान, ककरदरी जंगल हो रहा वीरान
Updated Fri, 14 Dec 2018 11:50 PM IST
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जमुनहा (श्रावस्ती)। ककरदरी जंगल में धड़ल्ले से अवैध कटान हो रही है। लकड़हारे कटान कर नए तरीके से लकड़ी को निश्चित ठिकाने पर पहुंचा रहे हैं। इसकी जानकारी के बाद भी विभाग अंजान बना हुआ है।
ककरदरी जंगल वीरान होता जा रहा है। माफिया की ओर से पेड़ों को काटकर पहले ठूठ बनाया जाता है। इसके बाद उन्हें जड़ से काट कर बेचा जा रहा है। इसका नजारा ककरदरी जंगल में देखा जा सकता है। माफिया पहले महंगी प्रजाति के पेड़ों की डाल व ऊपर के हिस्से को कुल्हाड़ी से काट कर छांट देते हैं। इसके बाद उसे सूखने के लिए छोड़ दिया जाता है।
इसके बाद विभागीय कर्मचारियों से मिलकर पेड़ों को काटने के बाद उसकी जड़ों को खोद कर मिट्टी डाल दी जाती है। माफिया पेड़ों को जलौनी के रूप में बहराइच सहित आसपास के क्षेत्रों में महंगे दामों में बेच देते हैं। ऐसा नजारा मल्हीपुर, जमुनहा, बदला सहित अन्य बाजारों में देखा जा सकता है।
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इस संबंध में नाम न छापने की शर्त पर एक वन कर्मी ने बताया कि पेड़ों को पहले छाटने से कटान के दौरान पेड़ आसानी से गिर जाते हैं। इससे आसपास के पेड़ों पर कोई प्रभाव नहीं पड़ता। इससे जांच के दौरान यह भी पता नहीं चलता कि यहां कभी पेड़ भी था। वहीं प्रभागीय वनाधिकारी एपी यादव ने बताया कि कटान की हमें कोई जानकारी नहीं है। मामले की जांच कराई जाएगी। यदि इस तरह का मामला पाया जाता है तो कार्रवाई की जाएगी।
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ककरदरी जंगल वीरान होता जा रहा है। माफिया की ओर से पेड़ों को काटकर पहले ठूठ बनाया जाता है। इसके बाद उन्हें जड़ से काट कर बेचा जा रहा है। इसका नजारा ककरदरी जंगल में देखा जा सकता है। माफिया पहले महंगी प्रजाति के पेड़ों की डाल व ऊपर के हिस्से को कुल्हाड़ी से काट कर छांट देते हैं। इसके बाद उसे सूखने के लिए छोड़ दिया जाता है।
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इसके बाद विभागीय कर्मचारियों से मिलकर पेड़ों को काटने के बाद उसकी जड़ों को खोद कर मिट्टी डाल दी जाती है। माफिया पेड़ों को जलौनी के रूप में बहराइच सहित आसपास के क्षेत्रों में महंगे दामों में बेच देते हैं। ऐसा नजारा मल्हीपुर, जमुनहा, बदला सहित अन्य बाजारों में देखा जा सकता है।
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इस संबंध में नाम न छापने की शर्त पर एक वन कर्मी ने बताया कि पेड़ों को पहले छाटने से कटान के दौरान पेड़ आसानी से गिर जाते हैं। इससे आसपास के पेड़ों पर कोई प्रभाव नहीं पड़ता। इससे जांच के दौरान यह भी पता नहीं चलता कि यहां कभी पेड़ भी था। वहीं प्रभागीय वनाधिकारी एपी यादव ने बताया कि कटान की हमें कोई जानकारी नहीं है। मामले की जांच कराई जाएगी। यदि इस तरह का मामला पाया जाता है तो कार्रवाई की जाएगी।