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Shamli News: बहन ने हौंसला दिया तो सभी को बचाने में हुई कामयाब
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- एक बार तो ऐसा लगा सभी अल्लाह को प्यारे हो जायेंगे,
संवाद न्यूज एजेंसी
थानाभवन। मकान में लगी आग को देख कोई नहीं कह सकता था, कि इसमें रहने वाले जीवित बचे होंगे। लेकिन बेटी के हौसले और धैर्य ने सभी परिजनों को सुरक्षित आग से बचा लिया। हालांकि इस दौरान छत से कूदने में बच्चों को थोड़ी चोट जरूर लगी, लेकिन सभी के सुरक्षित बाहर आने के बाद लोग इसे कुदरत का करिश्मा ही बता रहे हैं। इस हादसे की चश्मदीद और अपने छोटे भाई बहनों को बचाने वाली नरगिस की जुबानी आगजनी से बच निकलने की कहानी...........
'' शनिवार की रात करीब 11 बजे का समय था। मकान के निचले हिस्से में आग लगी देखी, तो अचानक ही मैं घबरा गई। सभी भाई-बहन भी जग चुके थे, और घबराए हुए थे। आग के विकराल रूप को देखकर एक बार मुझे लगा कि आज तो सभी अल्लाह को प्यारे हो जायेंगे। अब्बा भी शोर मचाते हुए हमें तीसरी मंजिल पर जाने के लिए कह रहे थे। छोटी बहन महविश ने भी हौंसला बढ़ाया और पांचों भाई ओर बहनों को लेकर मैं तीसरी मंजिल पर पहुंच गई। दिमाग में चल रहा था कि यदि भाई या फिर बहन में से किसी को भी कुछ हुआ तो अब्बा को क्या मुंह दिखाउंगी। महविश की मदद से एक के बाद एक पहले तो भाई जुनैद को 30 फुट की ऊंचाई से लटका पास के ही खेत में छोड़ा। इसके बाद अन्य चारों को भी इसी तरह से बाहर निकाला। हालांकि, सभी को चोटें लगी है। मैं खुद भी चोटिल हो गई हूं मगर सुकून है कि भाई और बहनों को सकुशल निकालने में कामयाब रही। यदि जरा भी देर हो जाती तो सभी अल्लाह को प्यारे हो गए होते।''
नरगिस के इस हौसले और धैर्य की ग्रामीण सरहाना कर रहे हैं। आगजनी की सूचना पर मौके पवर पहुंचे पूर्व प्रधान राव मुरसलीन और अन्य ग्रामीणों ने कहा कि यदि नरगिस हिम्मत नहीं जुटाती, तो शायद परिवार के सदस्य काल के गाल में भी समा सकते थे।
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संवाद न्यूज एजेंसी
थानाभवन। मकान में लगी आग को देख कोई नहीं कह सकता था, कि इसमें रहने वाले जीवित बचे होंगे। लेकिन बेटी के हौसले और धैर्य ने सभी परिजनों को सुरक्षित आग से बचा लिया। हालांकि इस दौरान छत से कूदने में बच्चों को थोड़ी चोट जरूर लगी, लेकिन सभी के सुरक्षित बाहर आने के बाद लोग इसे कुदरत का करिश्मा ही बता रहे हैं। इस हादसे की चश्मदीद और अपने छोटे भाई बहनों को बचाने वाली नरगिस की जुबानी आगजनी से बच निकलने की कहानी...........
'' शनिवार की रात करीब 11 बजे का समय था। मकान के निचले हिस्से में आग लगी देखी, तो अचानक ही मैं घबरा गई। सभी भाई-बहन भी जग चुके थे, और घबराए हुए थे। आग के विकराल रूप को देखकर एक बार मुझे लगा कि आज तो सभी अल्लाह को प्यारे हो जायेंगे। अब्बा भी शोर मचाते हुए हमें तीसरी मंजिल पर जाने के लिए कह रहे थे। छोटी बहन महविश ने भी हौंसला बढ़ाया और पांचों भाई ओर बहनों को लेकर मैं तीसरी मंजिल पर पहुंच गई। दिमाग में चल रहा था कि यदि भाई या फिर बहन में से किसी को भी कुछ हुआ तो अब्बा को क्या मुंह दिखाउंगी। महविश की मदद से एक के बाद एक पहले तो भाई जुनैद को 30 फुट की ऊंचाई से लटका पास के ही खेत में छोड़ा। इसके बाद अन्य चारों को भी इसी तरह से बाहर निकाला। हालांकि, सभी को चोटें लगी है। मैं खुद भी चोटिल हो गई हूं मगर सुकून है कि भाई और बहनों को सकुशल निकालने में कामयाब रही। यदि जरा भी देर हो जाती तो सभी अल्लाह को प्यारे हो गए होते।''
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नरगिस के इस हौसले और धैर्य की ग्रामीण सरहाना कर रहे हैं। आगजनी की सूचना पर मौके पवर पहुंचे पूर्व प्रधान राव मुरसलीन और अन्य ग्रामीणों ने कहा कि यदि नरगिस हिम्मत नहीं जुटाती, तो शायद परिवार के सदस्य काल के गाल में भी समा सकते थे।
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