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मतदाताओं ने चुन लिया अपना सांसद
ब्यूरो, अमर उजाला/शामली।
Updated Fri, 01 Jun 2018 12:21 AM IST
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- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
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शामली। कैराना लोकसभा सीट के उपचुनाव में भारतीय जनता पार्टी शामली जिले में हावी रही, जबकि सहारनपुर जनपद में भाजपा को भारी नुकसान हुआ। उसकी वजह दलित-मुसलिम और जाट गठजोड़ को माना जा रहा है, जिसने सहारनपुर के नकुड़ और गंगोह विधानसभा क्षेत्र में जमकर हैंडपंप चलाया। शामली जिले में भाजपा का प्रबंधन कारगर रहा, लेकिन सहारनपुर में प्रबंधन की हवा निकल गई।
भाजपा की तरफ से कैराना उपचुनाव जीतने के लिए शामली और सहारनपुर जनपद की जिम्मेदारी अलग -अलग नेताओं को सौंपी गई थी। संगठन की तरफ से जहां जातीय समीकरणों को साधने के लिए लगाया गया था, तो मंत्रियों को जिले की जिम्मेदारी दी गई थी। शामली जनपद की जिम्मेदारी प्रदेश के गन्ना विकास राज्यमंत्री सुरेश राणा के पास थी, तो सहारनपुर जनपद की नकुड़ और गंगोह विधानसभा क्षेत्र की जिम्मेदारी राज्यमंत्री धर्म सिंह सैनी के पास थी। चुनाव परिणामों पर गौर करें, तो शामली जनपद के तीनों विधानसभा क्षेत्रों में मिले भाजपा के वोट विपक्षी गठबंधन से ज्यादा ही रहे, जबकि नकुड़ और गंगोह में बड़ा अंतर पैदा हो गया।
उसकी बड़ी वजह सहारनपुर जनपद के नकुड़ और गंगोह में दलित मतदाताओं का गठबंधन की तरफ रुझान सामने आया है। क्योंकि 2014 के लोकसभा चुनाव में बसपा को जितना वोट मिला था, वह पूरी तरह गठबंधन की तरफ दिखाई दिया।
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इसकी गवाही 2014 के लोकसभा चुनाव के आंकडे़ भी देते हैं, क्योंकि 2014 के लोकसभा चुनाव में भाजपा ने नकुड़ और गंगोह सीट पर बड़े अंतर से जीत दर्ज की थी। वहीं, 2017 के विधानसभा चुनाव में भाजपा ने शामली और थानाभवन सीट जीती थी, जबकि कैराना सीट हार गई थी। अब उपचुनाव में भाजपा कैराना और शामली विधानसभा क्षेत्र में जीती, लेकिन थानाभवन क्षेत्र में 13807 वोटों के अंतर से हार गई।
वहीं, वर्ष 2014 के लोकसभा चुनाव से तुलना की जाए, तो तब नकुड़ विधानसभा क्षेत्र से भाजपा को 108583 वोट मिले थे, जबकि अब उपचुनाव में 86224 वोट ही मिल पाए हैं।इसी तरह गंगोह विधानसभा क्षेत्र से 2014 के चुनाव में भाजपा को 127082 वोट प्राप्त हुए थे, जबकि अब उपचुनाव में 96148 वोट ही मिल सके हैं। भारतीय जनता पार्टी नकुड़ और गंगोह विधानसभा क्षेत्र में 2014 की परफॉर्मेंस को भारी बरकरार नहीं रख पाई है।
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भाजपा की तरफ से कैराना उपचुनाव जीतने के लिए शामली और सहारनपुर जनपद की जिम्मेदारी अलग -अलग नेताओं को सौंपी गई थी। संगठन की तरफ से जहां जातीय समीकरणों को साधने के लिए लगाया गया था, तो मंत्रियों को जिले की जिम्मेदारी दी गई थी। शामली जनपद की जिम्मेदारी प्रदेश के गन्ना विकास राज्यमंत्री सुरेश राणा के पास थी, तो सहारनपुर जनपद की नकुड़ और गंगोह विधानसभा क्षेत्र की जिम्मेदारी राज्यमंत्री धर्म सिंह सैनी के पास थी। चुनाव परिणामों पर गौर करें, तो शामली जनपद के तीनों विधानसभा क्षेत्रों में मिले भाजपा के वोट विपक्षी गठबंधन से ज्यादा ही रहे, जबकि नकुड़ और गंगोह में बड़ा अंतर पैदा हो गया।
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उसकी बड़ी वजह सहारनपुर जनपद के नकुड़ और गंगोह में दलित मतदाताओं का गठबंधन की तरफ रुझान सामने आया है। क्योंकि 2014 के लोकसभा चुनाव में बसपा को जितना वोट मिला था, वह पूरी तरह गठबंधन की तरफ दिखाई दिया।
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इसकी गवाही 2014 के लोकसभा चुनाव के आंकडे़ भी देते हैं, क्योंकि 2014 के लोकसभा चुनाव में भाजपा ने नकुड़ और गंगोह सीट पर बड़े अंतर से जीत दर्ज की थी। वहीं, 2017 के विधानसभा चुनाव में भाजपा ने शामली और थानाभवन सीट जीती थी, जबकि कैराना सीट हार गई थी। अब उपचुनाव में भाजपा कैराना और शामली विधानसभा क्षेत्र में जीती, लेकिन थानाभवन क्षेत्र में 13807 वोटों के अंतर से हार गई।
वहीं, वर्ष 2014 के लोकसभा चुनाव से तुलना की जाए, तो तब नकुड़ विधानसभा क्षेत्र से भाजपा को 108583 वोट मिले थे, जबकि अब उपचुनाव में 86224 वोट ही मिल पाए हैं।इसी तरह गंगोह विधानसभा क्षेत्र से 2014 के चुनाव में भाजपा को 127082 वोट प्राप्त हुए थे, जबकि अब उपचुनाव में 96148 वोट ही मिल सके हैं। भारतीय जनता पार्टी नकुड़ और गंगोह विधानसभा क्षेत्र में 2014 की परफॉर्मेंस को भारी बरकरार नहीं रख पाई है।